Friday, August 17, 2018

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भारत के कैशलेस होने की राह में ये चार वजह बनेंगी रोढ़ा

अंग्वाल संवाददाता
भारत के कैशलेस होने की राह में ये चार वजह बनेंगी रोढ़ा

नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था को नए सीरे से निखारने के लिए केंद्र सरकार ने नोटबंदी जैसा बड़ा कदम उठाया। देश को कैशलेस बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर तरीके से लोगों को उत्साहित करते हैं। इन दिनों टीवी, रेडियो पर कैशलेस ट्रांजिक्शन को बढ़ावा देने के लिए कैंपेन चलाए जा रहे हैं ताकि लोग खरीददारी और लेन देने में ज्यादा से ज्यादा से ज्यादा डेबिट-क्रेटिड कार्ड, ई वॉलेट और मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करें। मगर तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि देश का अभी कैशलेस होना है मुश्किल है। आपको बता दें कि देश में 90 फीसद लेनदेन नकद होता है।

जानिए वो कौन सी बड़ी दिक्कतें हैं ...

इंटरनेट यूज़र हैं कम

देश में अभी 34.2 करोड़ इंटरनेट यूजर हैं, यानी 27 फीसदी आबादी ही इंटरनेट का इस्तेमाल कर रही है, जबकि 73 फीसदी आबादी यानी 91.2 करोड़ लोगों के पास इंटरनेट नहीं है। इंटरनेट उपलब्ध कराने वाली कंपनियों का वैश्विक औसत 67 फीसदी है। इसमें नाइजीरिया, केन्या, घाना और इंडोनेशिया से देशों से भी भारत पिछड़ा हुआ है। ऐसे में जब तक देश के हर बाशिंदे तक इंटरनेट सुविधा नहीं पहुंच जाती भारत का कैशलेस होना नामुम्किन है।

मोबाइल इंटरनेट की धीमी स्पीड

भारत में पेज लोड होने का औसत समय 5.5 सेकेंड है, जबकि चीन में 2.6 सेकेंड और दुनिया में सबसे तेज इजरायल में 1.3 सेकेंड है। श्रीलंका और बांग्लादेश में भी भारत से ज्यादा 4.5 और 4.9 सेकेंड है। ऐसे में अगर हमें अपने देश को कैशलेस होने की दिशा में आगे बढ़ाना है तो इंटरनेट की स्पीड बढ़ानी होगी।


स्मार्टफोन यूज़र भी हैं कम

भारत में स्मार्टफोन यूज करने वाले लोगों की संख्या भी काफी कम है। देश में अभी सिर्फ 17 फीसदी लोग ही स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। कम आमदनी वाले वर्ग में सिर्फ सात फीसदी लोगों के पास स्मार्टफोन है जबकि अमीरों में 22 फीसदी लोगों के पास स्मार्टफोन है। 

पीओएस मशीनें की है जरुरत

देश में प्रति 10 लाख की आबादी पर महज 856 पीओएस मशीनें हैं। आरबीआई की अगस्त 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक कुल 14.6 लाख पीओएस मशीनें हैं। ब्राजील जिसकी आबादी भारत से 84 फीसदी कम है, 39 गुणा अधिक पीओएस मशीनें हैं।

इन मुद्दों को हल किए बगैर भारत में कैशलेस ट्रांजिक्शन को बढ़ावा  देना आसान नहीं होगा। गौरतलब है कि भारत में जबतक इन तकनीकी समस्याओं को दूर नहीं किया जाएगा तब तक भारत में कैशलेस ट्रांजिक्शन को तेजी से लागू करने में कई मुश्किलें आएंगी। 

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