Wednesday, August 15, 2018

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क्या वोट बैंक की राजनीति के चलते खट्टर सरकार ने नहीं की समय रहते कार्रवाई...2019 में हैं लोकसभा चुनाव

अंग्वाल न्यूज डेस्क
क्या वोट बैंक की राजनीति के चलते खट्टर सरकार ने नहीं की समय रहते कार्रवाई...2019 में हैं लोकसभा चुनाव

चंडीगढ़ । दुष्कर्म के आरोपों में दोषी करार दिए गए बाबा गुरमीत राम रहीम के जेल जाने के साथ ही पंचकुला में जो हुआ, उसकी पहले से आशंका थी। हाईकोर्ट ने पहले ही पंचकुला की ओर बढ़ते बाबा समर्थकों की चिंता पर स्वत संज्ञान लेते हुए पुलिस प्रशासन से अराजकता फैलाने वालों पर बल प्रयोग करने में किसी प्रकार की हिचक न करने के निर्देश दिए थे, बावजूद इसके पंजाब-हरियाणा समेत कई राज्यों में हिंसा भड़की। अकेले पंचकुला में हुई हिंसा में ही 36 लोग मारे गए। अब सवाल उठ रहा है कि क्या हरियाणा की खट्टर सरकार की ओर से धारा 144 लागू होने के बाद बाबा समर्थकों के एकत्र होने और उन्हें हटाने के लिए किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के पीछे क्या कोई राजनीतिक लाभ की मंशा थी। शायद हां....क्योंकि हाईकोर्ट ने खट्टर सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि खट्टर सरकार ने राजनीतिक लाभ पाने के लिए शहरों को जलने दिया और बाबा समर्थकों के आगे सरेंडर कर दिया था। 

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धारा 144 लागू होने के बावजूद कैसे जुटे इतने लोग

कांग्रेस ने शनिवार को एक पत्रकार वार्ता कर हरियाणा की खट्टर सरकार के साथ ही केंद्र की मोदी सरकार पर भी सवाल उठाए हैं। उनके तर्कों के पीछे कुछ बातें सही भी नजर आती हैं। मसलन, राज्य के कई हिस्सों में धारा 144 लागू होने के बावजूद आखिरकार लोगों को पुलिस प्रशासन ने क्यों पंचकुला में जाने दिया। क्या स्थानीय पुलिस प्रशासन को इस मामले की गंभीरता के बारे में पता नहीं था, या हरियाणा पुलिस पूर्व में हुए इस तरह के विवादों से सबक नहीं ले पाई थी। 

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भाजपा नेताओं के अटपटे बयान

एक ओर जहां बाबा समर्थक राम रहीम को दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिए जाने की सूरत में हिंसक होने की चेतावनी देते नजर आ रहे थे वहीं प्रशासन ने इस स्थिति से निपटने के लिए कोई रणनीति बनाई ही नहीं थी। राज्य की भाजपा सरकार के मंत्री तो इन दंगाई लोगों को एक बाबा के अनुयायी करार दे रहे थे, जो अपने बाबा के दर्शन के लिए जा रहे थे। इन्हीं दंगाई समर्थकों के पास से पुलिस ने अब हथियार, पेट्रोल बम और धारदार हथियार बरामद किए हैं। हरियाणा के शिक्षा मंत्री  रामविलास शर्मा ने एक विवादित बयान देते हुए कहा है कि धारा 144 डेरा के समर्थकों की श्रद्धा पर लागू नहीं होगा। उन्होंने अपने बयान में कहा कि बाबा के भक्त बहुत शांत हैं। वे पंचकुला में माहौल बिगाड़ने के लिए इकट्ठा नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि बाबा गुरमीत राम रहीम ने पीएम मोदी के 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' और 'स्वच्छ भारत' अभियान को सफल बनाने में बहुत योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि धारा 144 सिर्फ माहौल खराब ना हो इसके लिए लगाई गई है।


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हाईकोर्ट समर्थकों की मंशा समझ चुका था पर प्रशासन नहीं

पंचकुला में हिंसा से पहले हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिए कि अगर बाबा के खिलाफ फैसला आने पर कोई भी अराजकता फैलाए तो उसके खिलाफ बल का प्रयोग करने से हिचके नहीं। हाईकोर्ट ने ये बातें स्वत संज्ञान लेते हुए कहीं थी। हालांकि ये सूचना पहले से थी समर्थक हिंसक होने की सूरत में जमकर हंगामा काटेंगे और तोड़फोड़-आगजनी को अंजाम देगे। इसके लिए उन्होंने पेट्रोल बम और कई अन्य तरह के हथियारों की इंतजाम किया हुआ था। लेकिन इस सब के बावजूद पुलिस प्रशासन को शायद किसी प्रकार का बल प्रयोग करने के ऑर्डर थे, इसलिए हाईकोर्ट के निर्देशों और बड़ी उन्मादी भीड़ के हिंसक होने के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और मौके से भाग बैठी। 

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क्या 2019 लोकसभा चुनाव था कारण

इस सब के बीच जहां हाईकोर्ट ने भी खट्टर सरकार पर राजनीति लाभ उठाने के लिए शहरों को जलने देने का कटाक्ष किया है वहीं अब भाजपा विरोधी समेत प्रदेश की जनता भी इस बात को कहने लगी है कि भाजपा सरकार ने 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर अपने बाबा के इन समर्थक वोट बैंक के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी की। पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा के कई दिग्गज नेता बाबा राम रहीम के पास गए थे और अपने समर्थकों से भाजपा को वोट देने की बात कही थी। उस दौरान बाबा राम रहीम ने भी अपने समर्थकों से भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की थी। अब ऐसे में आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर हरियाणा की भाजपा सरकार इस वोट बैंक पर कैसे कठोर कार्रवाई करने के आदेश दे  सकती थी।

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