Thursday, September 21, 2017

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महाभारत के मंच पर उतरे समाजवादी पार्टी के पात्र, मुलायम सिंह ने "घृतराष्ट्र" का चरित्र करने से मना किया

अंग्वाल न्यूज डेस्क
महाभारत के मंच पर उतरे समाजवादी पार्टी के पात्र, मुलायम सिंह ने "घृतराष्ट्र" का चरित्र करने से मना किया

महाभारत तो आपको याद ही होगी ना। चंद्रवंशियों के दो परिवारों के बीच की हुई महाभारत की लड़ाई में अपनों ने ही अपनों को छला था। किसी ने सत्ता के लिए तो किसी ने अपने स्वाभिमान के लिए एक-दूसरे पर हर प्रकार के हथियारों से वार किया। उत्तर प्रदेश में सोमवार का दिन सपा परिवार के बीच महाभारत का मंच लेकर आया। पिता-पुत्र, चाचा-भतीजा और न जानें कितनों ही रिश्तों पर छुरियां चलते देखी गई। लगभग इस बार भी चरित्र पुरानी महाभारत जैसे ही...जिसमें शकुनी से लेकर दुप्रद....जरासंघ...सब हैं और कई तो अपने चरित्र को पूर्ण रूप से निभा भी रहे हैं लेकिन यूपी की इस महाभारत में अगर किसी का चरित्र अलग नजर आया तो वो था युवराज के पिता घृतराष्ट्र का...जिन्होंने पिता मोह में कुछ भी होने नहीं दिया...अपने भाइयों के लिए दम ठोका ...और युवराज को ही पद के घमंड में होने की बात कहते हुए उन्हें गिरा देने की चेतावनी भी दे डाली।

 

 

चंद्रवंशियों की महाभारत में घृतराष्ट्र ने पुत्र मोह में घटनाक्रमों की अनदेखी की और कहीं न कहीं एक बड़े युद्ध की नींव रख दी थी लेकिन इस बार सपा प्रमुख घर में छिड़ी महाभारत के बावजूद पुत्र मोह में नहीं बंधें। उन्होंने कई बार युवराज अखिलेश को चेतावनी दी...साथ ही उसकी सेना को भी सीमा में रहने की नसीहत दी। विवाद दूर करने के लिए कई दौर की बातचीत हुई। इसके बावजूद जब सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने एक बड़े मंच से सपा सरकार के मुखिया और कुनबे के युवराज अखिलेश को पद पाते ही अपना मानसिक संतुलन खोने की बात कही, तो युवराज समर्थक भड़क गए। बावजूद इसके सपा प्रमुख ने अपना भ्रातृप्रेम प्रदर्शित किया...अपने भाई शिवपाल यादव को उन्होंने अपना हमराही करार देते हुए उन्हें सही करार दिया। उन्होंने युवराज को बताया कि आखिर कैसे उन लोगों ने सपा के इस विशाल संगठन की नींव रखी। भले ही पांडवों-कौरवों के बीच हुई महाभारत में शायद ही कोई चाचा-भतीजा सामने आया हो..लेकिन सोमवार को सपा की बैठक के दौरान विवादों को लेकर चाचा शिवपाल और भजीते अखिलेश के बीच नोंक-झोंक और धक्कामुक्की होने की खबरें भी सामने आईं। 


    बहरहाल, इस महाभारत का असर क्या ''हस्तिनापुर'' पर पड़ेगा...क्या सपा परिवार की इस लड़ाई से दूसरे राजा रूपी दलों के सेनापति अपना प्रभुत्व बढ़ाएंगे...सूबे में अगले साल चुनाव होने हैं...ऐसे में सपा परिवार के भीतर की कलह का लाभ क्या भाजपा...कांग्रेस...बसपा उठा सकेंगे। सत्ता की लड़ाई के अंतिम दौर में सपा साम्राज्य में बिखराव और उसके राजा-सेनापति और सेना के बीच आपसी टकराव ने यह बात को साबित कर दिया है कि इस समय अगर कोई भी इनसे लड़ा तो सपा साम्राज्य पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो जाएगा। बहरहाल...सब कुछ भविष्य के गर्भ में छिपा है...देखना दिलचस्प होगा कि आखिर आगामी विधानसभा चुनावों में सपा सरकार किस तरह अपना वर्चस्व कायम रख पाएगी...या अंर्तकलह के चलते बिखर जाएगी।

 

 

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