Friday, July 3, 2020

Breaking News

   उत्तराखंड: कोरोना के 46 नए मामले, कुल पॉजिटिव केस हुए 1199     ||   माले: ऑपरेशन समुद्र सेतु के तहत आईएनएस जलश्व से मालदीव में फंसे 700 भारतीय लाए जा रहे वापस     ||   बिहार: ADG लॉ एंड ऑर्डर ने जताई आशंका, प्रवासियों के आने से बढ़ सकता है अपराध     ||   दिल्ली: बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने संभाला अपना पदभार     ||   भोपाल की बडी झील में पलटी आईपीएस अधिकारियों की नाव, कोई जनहानी नहीं    ||   सुरक्षा परिषद के मंच का दुरुपयोग करके कश्मीर मसले को उछालने की कोशिश कर रहा PAK: भारतीय विदेश मंत्रालय     ||   IIM कोझिकोड में बोले पीएम मोदी- भारतीय चिंतन में दुनिया की बड़ी समस्याओं को हल करने का है सामर्थ    ||   बिहार में रेलवे ट्रैक पर आई बैलगाड़ी को ट्रेन ने मारी टक्कर, 5 लोगों की मौत, 2 गंभीर रूप से घायल     ||   CAA और 370 पर बोले मालदीव के विदेश मंत्री- भारत जीवंत लोकतंत्र, दूसरे देशों को नहीं करना चाहिए दखल     ||   जेएनयू के वाइस चांसलर जगदीश कुमार ने कहा- हिंसा को लेकर यूनिवर्सिटी को बंद करने की कोई योजना नहीं     ||

यहां लोगों को नाम नहीं बल्कि संगीत की धुन से बुलाते हैं, जानें इस जगह के बारे में

अंग्वाल न्यूज डेस्क
यहां लोगों को नाम नहीं बल्कि संगीत की धुन से बुलाते हैं, जानें इस जगह के बारे में

नई दिल्ली। जब भी हमें किसी को बुलाना होता है तो उसके नाम से बुलाते हैं। क्या आपने ऐसी जगहों के बारे में सुना है जहां लोगों को संगीत की धुन के आधार पर बुलाया जाता है। शायद आप यह सुनकर हैरान हो गए होंगे कि संगीत की धुन से किसी को कैसे बुलाया जा सकता है। आइए हम आपको आज भारत उत्तरपूर्व राज्य में स्थित एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां लोगों को संगीत की धुन से बुलाया जाता है।

गौरतलब है कि यह जगह स्थित है उत्तरपूर्वी राज्य मेघालय में है। इस गांव का नाम है ‘‘कॉन्गथॉन्ग’’। यह एक ऐसा गांव है जहां हर कोई एक दूसरे को कोई खास धुन या संगीत के माध्यम से बुलाता है। यहां के जंगलों में सुनाई देने वाली विभिन्न प्रकार की धुन और चहचहाहट की गूंज वाली आवाज लोग निकालते हैं। वह एक विभिन्न प्रकार की सीटी बजाते हैं। यह इस गांव की परंपरा है। 

यहां बता दें कि इस गांव में बच्चे के जन्म के बाद उसकी मां एक खास धुन बजाती है और उस बच्चे को उम्रभर उसी धुन से बुलाया जाता है। ऐसा नहीं है कि यहां बच्चों के नाम नहीं होते हैं पर कोई गलती करने पर ही उसे उसके नाम से बुलाया जाता है। मेघालय के जंगलों में बसने वाले लोग यहां मिलने वाले सामानों से ही जिंदगी गुजारते हैं। 


ये भी पढ़ें - स्पेसएक्स ने किया चंद्रमा पर जाने वाले पहले यात्री का ऐलान, जापानी अरबपति युसाकू माएजावा करें...

आपको बता दें कि साल 2000 में यहां बिजली पहुंची है और यहां तक पहुंचने के लिए कच्चा रास्ता भी 2013 में बनाया गया है। यहां के रहने वाले खांगसित कहते हैं कि हम जंगलों के बीच चारों ओर से पहाड़ियों से घिरी हुई जगह में रहते हैं। जिस संगीत की धुन से लोग एक दूसरे को पुकारते हैं वह 30 सेकेंड तक लंबी होती है लेकिन सब प्रकृति से प्रेरित हैं और ईश्वर की बनाई इस अनोखी दुनिया में खुश हैं। यहां रहने वाले खासी समुदाय के लोगों को इस बात का पता नहीं है कि संगीत की धुन के जरिए बुलाने की परंपरा की शुरुआत कब हुई लेकिन उन्होंने कहा उनका मानना है कि गांव की स्थापना के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है। 

गौर करने वाली बात है कि कॉन्गथॉन्ग में रहने वाला खासी समुदाय इस परंपरा को जींगरवई लॉवई के नाम से संबोधित करता है इसका मतलब कबीले की पहली महिला का संगीत है। 

Todays Beets: