Thursday, November 26, 2020

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पीएचडी और एमफिल करने वाले छात्र हो जाएं सावधान, 60 फीसदी साहित्यिक चोरी पर पंजीकरण होगा रद्द

अंग्वाल न्यूज डेस्क
पीएचडी और एमफिल करने वाले छात्र हो जाएं सावधान, 60 फीसदी साहित्यिक चोरी पर पंजीकरण होगा रद्द

नई दिल्ली। उच्च शिक्षण संस्थानों से पीएचडी और एमफिल करने वाले छात्र सावधान हो जाएं। देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में सभी प्रोग्राम में साहित्यिक चोरी विनिमय 2018 लागू हो गया है। इस विनिमय के लागू होने के बाद अब पीएचडी या एमफिल करने वाले छात्रों को अपने थीसिस के साथ एक शपथ पत्र भी देना होगा। अपने शपथ पत्र में छात्रों को यह बताना होगा कि शोध पत्र, शोध निबंध या समान दस्तावेज उसके द्वारा तैयार किए गए हैं। 60 फीसदी से ज्यादा साहित्य की चोरी पर छात्रों का पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। 

गौरतलब है कि छात्रों को शपथ पत्र में स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने जो दस्तावेज तैयार किए हैं वह उनका मौलिक लेखन है और इसके लिए किसी भी तरह की चोरी नहीं की गई है। वहीं, सुपरवाइजर या गाइड को भी प्रमाण पत्र में बताना होगा कि उसके छात्र ने अपने शोध में साहित्यिक चोरी नहीं की है।  

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यहां बता दें कि पीएचडी और एमफिल करने वाले छात्रों द्वारा साहित्यिक चोरी को रोकने के मकसद से केंद्र सरकार ने साहित्यिक चोरी विनियम 2018 तैयार करवाया है और यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। गौर करने वाली बात है कि छात्र जब अपने थीसिस जमा करेगा तो विभाग या विश्वविद्यालय प्रबंधन उसकी साहित्यिक चोरी रोकने वाले सॉफ्टवेयर से जांच करवाएगा। इसके साथ ही संस्थान को डिग्री देने के एक महीने के भीतर उक्त शोध को शोध गंगा ई-रिपोजिटरी के  तहत अपलोड होगी।  

गौर करने वाल बात है कि नए विनिमय में साहित्यिक चोरी की श्रेणी भी तय की गई है। 10 फीसदी तक की चोरी पर किसी तरह का जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। 40 फीसदी चोरी करने वाले छात्रों को 6 महीने के अंदर दोबारा शोधपत्र जमा करना होगा। वहीं 40 से 60 फीसदी तक की चोरी करने वाले छात्रों को डीबार किया जाएगा जबकि 60 फीसदी से ज्यादा साहित्यिक चोरी पर छात्र का पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।  

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