Thursday, April 2, 2020

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मायावती ने 'दिल पर पत्थर रख के मुंह पर मेकअप कर लिया', BSP ने गेस्टहाउस कांड वाली SP से गठबंधन कर लिया

अंग्वाल न्यूज डेस्क
मायावती ने

नई दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को अपनी पार्टी के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए आखिरकार 'दिल पर पत्थर ' रखते हुए गेस्टहाउस कांड को अंजान देने वाली राजनीतिक पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया । उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ एक संयुक्त प्रेसवार्ता करते हुए आगामी लोकसभा चुनावों के लिए 80 सीटों मे से 38-38 सीटों के बंटवारे का ऐलान किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला, लेकिन इस दौरान वह अपने साथ गेस्टहाउस कांड में हुए बर्ताव को भी नहीं भूली । उन्होंने परोक्ष रूप से अखिलेश यादव को इसकी याद दिलाते हुए कहा- मैंने देशहित में गेस्टहाउस कांड से ऊपर उठकर सपा के साथ गठबंधन करने का फैसला लिया है। हालांकि इस दौरान उनकी बातों में कहीं न कहीं सपा के साथ तल्ख रिश्तों का छाया भी नजर आई। 

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अस्तित्व बचाने को उठाए मजबूर कदम

बता दें कि एक समय ऐसा था जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दो धुरविरोधी दल थे, लेकिन पिछले लोकसभा चुनावों में जहां बसपा का खाता भी नहीं खुल सका, वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के परिवार के कुछ लोग ही अपनी सीट बचा पाए। इससे इतर विधानसभा चुनावों में भी दोनों दलों को मुंह की खानी पड़ी । प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई सपा को गिनी चुनी सीटें ही मिली, जबकि बसपा का प्रदर्शन भी काफी खराब रहा। ऐसी सूरत में दोनों दलों का साथ आकर भाजपा को चुनौती देना जरूरी हो गया था।

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कभी धुरविरोधी-आज साथी

अपनी धुरविरोधी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर दोनों की दलों के अध्यक्ष काफी सतर्क थे। अखिलेश यादव और मायावती दोनों ने एक पहले से लिखे पेपर को मात्र पढ़ने का काम किया, ताकि बोलते वक्त कोई ऐसी बात एक दूसरे के लिए न निकले जाए, जिससे अंतिम समय में फिर से कोई दल आहत हो जाए। गेस्ट हाउस कांड की टीस को भूलते हुए मायावती ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की साझा प्रेस कांफ्रेंस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की नींद उड़ाने वाली है। उन्होंने कहा कि इससे पहले 1993 में कांशीराम और मुलायम सिंह यादव ने गठबंधन करके यूपी विधानसभा का चुनाव लड़ा था। उस दौरान भी दोनों दलों को काफी सफलता मिली थी। 


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25 साल पहले गठबंधन की दिलाई याद

हालांकि पत्रकारों से पूछने से पहले ही मायावती ने स्पष्ट किया कि गेस्ट हाउस कांड से ऊपर उठते हुए हमने यह गठबंधन करने का फैसला लिया है। हमने देशहित में गेस्ट हाउस कांड को भुला दिया है. 25 साल बाद सपा-बसपा का गठबंधन बना है। यह गठबंधन भाजपा जैसे घोर जातिवादी और सांप्रदायिक पार्टी से लड़ने के लिए बना है। यह गठबंधन न केवल दो पार्टियों का गठबंधन है बल्कि बहुसंख्यक समाज का गठबंधन है।

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कांग्रेस से गठबंधन कभी नहीं

हालांकि इस दौरान जहां सपा ने अपने लिए कई अन्य दलों के साथ गठजोड़ के दरवाजों को खोल कर रखा, वहीं मायावती ने लखनऊ में एक साझा पत्रकार वार्ता में मायावती ने साफ तौर से कहा है कि हम न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश के किसी भी चुनाव में बसपा कांग्रेस जैसी पार्टियों के साथ गठबंधन करके चुनाव में नहीं उतरेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि इनका वोट बसपा को ट्रांसफर नहीं होता है। वहीं एसपी-बीएसपी के वोट आसानी से एक-दूसरे को ट्रांसफर हो जाते हैं। पिछले दिनों सपा-बसपा ने मिलकर चुनाव लड़े तो भाजपा की ज्यादातर पर हार हुई। 

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