Friday, February 28, 2020

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हरिद्वार सीट- यहां राष्ट्रीय दलों का बोलबाला, निर्दलीय और क्षेत्रिय दलों के प्रत्याशियों को खारिज कर देती है जनता

अंग्वाल न्यूज डेस्क
हरिद्वार सीट- यहां राष्ट्रीय दलों का बोलबाला, निर्दलीय और क्षेत्रिय दलों के प्रत्याशियों को खारिज कर देती है जनता

देहरादून। ''उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2012-एक नजर में'' कॉलम में इस बार हम बात करेंगे देवभूमि की हरिद्वार सीट के बारे में। चुनावी समर में इस बार भले ही इस सीट पर काफी उथल-पुथल मची हो, लेकिन हम आपको बताएंगे कि पिछली बार इस सीट के सियासी समीकरण क्या रहे। यूं तो उत्तराखण्ड की ज्यादातर सीटों पर निर्दलीय और क्षेत्रिय पार्टियों के उम्मीदवारों ने राष्ट्रीय दलों के मतदाताओं में भारी सेंध लगाई थी लेकिन कुछ सीटें ऐसी थीं, जहां निर्दलीय उम्मीदवरों और क्षेत्रिय पीर्टियों को मतदाताओं ने सिरे से खारिज कर दिया। इनमें से हरिद्वार सीट पर कुछ ऐसे ही परिणाम नजर आए।

वर्ष 2012 में हरिद्वार विधानसभा सीट के सियासी समीकरण को देखें तो प्रत्याशियों की संख्या 17 थी। इनमें से भाजपा के मदन कौशिक ने 42297 (51.36%) वोट हासिल करके कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी 33677 (40.89%) को 9620 (11.68%) वोटों के अंतर से हराया था। यहां पर 1,21,562 मतदाताओं में से 82352 (67.79%) ने ही वोट किया था।


नहीं दिखा निर्दलीय और क्षेत्रिय पार्टियों का बोलबाला

उत्तराखंड की ज्यादातर विधानसभा सीटों पर निर्दलियों ने राष्ट्रीय दलों के मतदाताओं को काफी रिझाया था लेकिन इस सीट पर निर्दलीय और क्षेत्रिय पीर्टियों को मतदाताओं ने ज्यादा तरजीह नहीं दी। यहां से तीसरे नंबर पर रहे बसपा के गुलशन अरोड़ा ने सिर्फ 3225 (3.91%) वोट पाए। चौथे नंबर पर रहे निर्दलीय उम्मीदवार अशोक शर्मा को सिर्फ 748 (0.17%) वोट ही मिल सके। अगर इस सीट से खड़े आठों निर्दलीय उम्मीदवारों के वोटों को देखा जाए तो इन्हें कुल मतदान का सिर्फ 2.5 फीसदी (2122 वोट) वोट ही मिला। इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवोरों की संख्या ज्यादा होने से भी बड़ी पार्टियों के वोट बैंक पर कोई फर्क नहीं पड़ा था।

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