Friday, September 17, 2021

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जानें यूसुफ सरवर खान क्यों बने दिलीप कुमार , फल व्यापारी के बेटे को किसने दिया यह नाम

अंग्वाल न्यूज डेस्क
जानें यूसुफ सरवर खान क्यों बने दिलीप कुमार , फल व्यापारी के बेटे को किसने दिया यह नाम

मुंबई । बॉलीवुड ने बुधवार को अपना ट्रेजडी किंग खो दिया । दिलीप कुमार का 98 वर्ष की आयु में आज सुबह निधन हो गया । उनके अभियन की कॉपी करके कई लोगों ने अपने करियर बना लिए । आज पूरा बॉलीवुड समेत उनके प्रशंसक शोक में हैं । पिछले कुछ दिनों से वह मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में भर्ती थी , हाल में उनकी सेहत में सुधार की खबर भी आई थी , लेकिन उनके निधन की खबर ने सबको चौंका दिया। उनके निधन के साथ ही हिंदी फिल्म सिनेमा की एक सदी का अंत हो गया है । हालांकि इस सबके बीच अभी भी लोगों के बीच यह चर्चा का विषय रहा है कि आखिर यूसुफ सरवर खान कैसे दिलीप कुमार बनकर बॉलीवुड पर छा गया । 

फल व्यापारी के इस बेटे को नहीं था फिल्मों का शौक

बता दें कि दिलीप कुमार के नाम से बॉलीवुड में शोहरत बटोरने वाले इस शख्स का असल नाम यूसुफ सरवर खान था । उनके पिता मोहम्मद सरवर खान फल के व्यापारी थे । देश दुनिया में नाम - पैसा - शौहरत पाने वाले यूसुफ खान को यह अंजादा भी नहीं रहा होगा कि एक दिन वह बॉलीवुड पर राज करेंगे । एक समय यह हाल था कि जिनके अभिनय की मिसालें आज हम देते हैं , एक समय उनकी फिल्मों में काम करने में कोई रुची ही नहीं थी , न ही वह अपना नाम बदलने के इच्छुक थे । असल में  दिलीप कुमार के पिता मुंबई में फलों का व्यापार करने आए थे । शुरुआती दिनों से ही दिलीप कुमार भी अपने पिता की मदद करते ।

बॉम्बे टॉकीज की मालकिन ने दिया था दिलीप कुमार नाम


आखिर यूसुफ खान कैसे दिलीप कुमार बने , इसकी एक कहानी है । असल में दिलीप कुमार को स्क्रीन पर मौका देने वाली बॉम्बे टॉकीज की ऑनर देविका रानी ने ही उनका नाम बदला था । एक दिन उनकी फिल्म रिलीज के पहले देविका रानी ने उन्हें अपने केबिन में बुलाया था । इस मुलाकात के बारे में दिलीप कुमार ने अपनी आत्मकथा 'द सबस्टैंस एंड द शैडो' में लिखा है, 'उन्होंने अपनी शानदार अंग्रेजी में कहा- यूसुफ मैं तुम्हें जल्द से जल्द एक्टर के तौर पर लॉन्च करना चाहती हूं । ऐसे में यह विचार बुरा नहीं है कि तुम्हारा एक स्क्रीन नेम हो । ऐसा नाम जिससे दुनिया तुम्हें जानेगी और दर्शक तुम्हारी रोमांटिक इमेज को उससे जोड़कर देखेगी । मेरे ख़याल से दिलीप कुमार एक अच्छा नाम है । जब मैं तुम्हारे नाम के बारे में सोच रही थी तो ये नाम अचानक मेरे दिमाग में आया । तुम्हें यह नाम कैसा लग रहा है?'

पहचान बदलने को तैयार नहीं थे यूसुफ 

अपनी आत्मकथा में दिलीप कुमार ने इस वाकये को बड़े व्यापक रूप में लिखा है । उन्होंने लिखआ कि देविका रानी की बात सुनकर मेरी बोलती बंद हो गई थी । मैं अपनी पहचान बदलने के लिए बिलकुल तैयार नहीं था । इसलिए उन्होंने देविका रानी से पूछा था, 'क्या ऐसा करना वाक़ई जरूरी है?' इस पर देविका रानी ने दिलीप कुमार को जवाब दिया कि ऐसा करना सही फैसला होगा।

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