Thursday, June 30, 2022

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अग्निपथ योजना को लेकर सरकार से उलट है रक्षा विशेषज्ञों की राय , जानिए आखिर क्या हैं मतभेद

अंग्वाल न्यूज डेस्क
अग्निपथ योजना को लेकर सरकार से उलट है रक्षा विशेषज्ञों की राय , जानिए आखिर क्या हैं मतभेद

नई दिल्ली । देश की तीनों सेनाओं में युवाओं की भर्ती का रास्ता खोलते हुए मोदी सरकार ने गत मंगलवार को अग्निपथ स्कीम (Agnipath Scheme) का ऐलान किया । इसके तहत साढ़े 17 साल से लेकर 21 साल का युवा देश की तीनों सेनाओं में 4 साल के लिए अपनी सेवाएं दे सकता है , जिसके लिए उसे एक अच्छा वेतन और कुछ सुविधाएं भी मिलेंगी । इतना ही नहीं भर्ती होने वाले जवानों में से 25 फीसदी को उनके कामकाज का आंकलन करने के बाद स्थायी कमिशन भी दिया जाएगा । रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने देश के तीनों सेना प्रमुखों के साथ एक पत्रकार वार्ता में इस स्कीम का ऐलान करने के साथ ही देश की पुरानी सेना भर्ती व्यवस्था को बदल दिया । हालांकि इस स्कीम का अब बिहार में भारी विरोध हुआ है । वहीं कई रक्षा विशेषज्ञ भी सेना की इस योजना से इतेफाक नहीं रखते हैं । उन्होंने सरकार की इस स्कीम में कई खामियां गिनाई हैं ।

अग्निपथ स्कीम का ऐलान करने के साथ ही रक्षामंत्री राजनाथ सिंह समेत तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने दावा किया है कि इस स्कीम से देश की तीनों सशस्त्र सेनाओं में बड़ा बदलाव आएगा । लेकिन के रक्षा विशेषज्ञ सरकार की राय से सहमत नहीं हैं । इन जानकारों का कहना है कि देश में सेना भर्ती के लिए यह सही तरीका नहीं है । वहीं सशस्त्र बलों के भूतपूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen) ने इस स्‍कीम को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया जाहिर की है।

कई विशेषज्ञों की राय है कि मोदी सरकार की इस योजना या 'टूर आफ ड्यूटी' जांची परखी नहीं है । इस पर पहले कोई ट्रॉयल नहीं किया गया है इसे सीधा अमल में लाया जा रहा है । यह देश की सेना में भर्ती के लिए नई व्यवस्था के रूप में कोई अच्छी योजना नहीं है । हालांकि कुछ पूर्व सैनिकों का यह भी मानना है कि इस योजना की आलोचना या सराहना करना जल्दबाजी होगी। देशवासियों को थोड़ा समय देकर इसके बारे में बोलना चाहिए।

हालांकि इस योजना के विरोध में सवाल उठने शुरू तो हो गए हैं , जहां कई विशेषज्ञ इस योजना को लेकर खुश नहीं है , वहीं सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे कुछ युवाओं में इसे लेकर निराशा  नजर आए । बिहार में कई जिलों में ऐसे युवाओं ने प्रदर्शन और विरोध दर्ज कराया है ।


बता दें कि इस स्कीम के अनुसार , भर्ती प्रक्रिया के सभी मापदंड पूरे कर अग्निवीर का सम्मान पाने वाले युवाओं को पहले साल का मासिक वेतन 30,000 रुपये मिलेगा । लेकिन उसके हाथ में केवल 21,000 रुपये ही आएंगे । उनके खाते से प्रति महीने नौ हजार रुपये एक सरकारी कोष में जाएंगे जिसमें सरकार की ओर से भी समान राषि डाली जाएगी । वहीं दूसरे साल सैनिक का वेतन 33,000 रुपये, तीसरे साल 36,500 रुपये और चौथे साल 40,000 रुपये होगा । अग्निपथ स्‍कीम के तहत तीनों सेनाओं में इस साल करीब 46,000 सैनिक भर्ती किए जाएंगे । चयन के लिए पात्रता आयु साढ़े 17 वर्ष से 21 वर्ष के बीच होगी ।  

रक्षा विशेषज्ञों की राय से इतर , कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस स्कीम को लेकर सरकार पर निशाना साधा । वह बोलीं – भाजपा सरकार सेना भर्ती को अपनी प्रयोगशाला क्यों बना रही है । योजना की घोषणा से पहले कोई गंभीर सोच-विचार नहीं किया गया । सैनिकों की लंबी नौकरी सरकार को बोझ लग रही है? युवा कह रहे हैं कि ये 4 वर्षीय नियम छलावा है । हमारे पूर्व सैनिक भी इससे असहमत हैं।  

बहरहाल , सरकार के इस स्कीम के ऐलान के बाद से ही कुछ कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं । वहीं रक्षा विशेषज्ञों की राय भी इस मामले में सरकार के समर्थन में नहीं दिख रही । ऐसे में अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या सरकार अपनी स्कीम में कोई बदलाव करेगी ।  

 

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