Tuesday, October 20, 2020

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PM MODI ने किया अटल - टनल का उद्घाटन , बोले - सालों तक रक्षा जरूरतों की अनदेखी की गई

अंग्वाल न्यूज डेस्क
PM MODI ने किया अटल - टनल का उद्घाटन , बोले - सालों तक रक्षा जरूरतों की अनदेखी की गई

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सामरिक दृष्टि से बेहद अहम 'अटल टनल' का उद्घाटन किया । रोहतांग में दुनिया की सबसे बड़ी 'अटल टनल' का लोकार्पण करने के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आज सिर्फ अटल जी का ही सपना पूरा नहीं हुआ है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के करोड़ों लोगों का दशकों पुराना इंतजार खत्म हुआ है । 9.02 किमी लंबी सुरंग के उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा - मेरा सौभाग्य है कि मुझे अटल टनल के लोकार्पण का अवसर मिला है । इस महायज्ञ में अपना पसीना बहाने वाले, अपनी जान जोखिम में डालने वाले, मेहनतकश जवानों, इंजीनियरों और मजदूर भाई बहनों को मैं नमन करता हूं । इस दौरान उन्होंने पूर्व की केंद्र सरकारों पर भी हमला बोलते हुए कहा कि हमारी सरकार से पहले की सरकारों ने सालों तक देश की रक्षा जरूरतों की अनदेखी की । इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे ।  

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अटल टनल भारत के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ताकत देने वाली है. ये विश्व स्तरीय बॉर्डर कनेक्टिविटी का जीता-जागता उदाहरण है । उन्होंने कहा - अटल टनल लेह, लद्दाख की लाइफलाइन बनेगी ।  लेह-लद्दाख के किसानों, बागवानों और युवाओं के लिए भी अब देश की राजधानी दिल्ली और दूसरे बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी । अटल टनल से मनाली और केलांग के बीच की दूरी 3-4 घंटे कम हो ही जाएगी । पीएम मोदी ने कहा कि पहाड़ के मेरे भाई-बहन समझ सकते हैं कि पहाड़ पर 3-4 घंटे की दूरी कम होने का मतलब क्या होता है । 

 उन्होंने कहा - साल 2005 में ये आंकलन किया गया था कि ये टनल लगभग 950 करोड़ रुपये में पूरी हो जाएगी।  लेकिन लगातार होने वाली देरी के कारण ये तीन गुना से भी ज्यादा, यानी करीब 3200 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद पूरी हुई है। कल्पना कीजिए कि 20 साल और लग जाते तो क्या स्थिति होती!

उन्होंने कहा अटल जी के साथ ही एक और पुल का नाम जुड़ा है- कोसी महासेतु का। बिहार में कोसी महासेतु का शिलान्यास भी अटल जी ने ही किया था। लेकिन इसका काम भी अटका रहा। 2014 में सरकार में आने के बाद कोसी महासेतु का काम हमने तेज करवाया। कुछ दिन पहले ही कोसी महासेतु का भी लोकार्पण किया जा चुका है।


पीएम बोले - अटल जी की सरकार जाने के बाद, जैसे इस काम को भी भुला दिया गया। हालात ये थी कि साल 2013-14 तक टनल के लिए सिर्फ 1300 मीटर का काम हो पाया था । जिस रफ्तार से 2014 में अटल टनल का काम हो रहा था, अगर उसी रफ्तार से काम चला होता तो ये सुरंग साल 2040 में जाकर पूरा हो पाती। आपकी आज जो उम्र है, उसमें 20 वर्ष और जोड़ लीजिए, तब जाकर लोगों के जीवन में ये दिन आता, उनका सपना पूरा होता , लेकिन जब विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ना हो, जब देश के लोगों के विकास की प्रबल इच्छा हो, तो रफ्तार बढ़ानी ही पड़ती है। अटल टनल के काम में भी 2014 के बाद, अभूतपूर्व तेजी लाई गई। बीआरओ के सामने आने वाली हर अड़चन को दूर किया गया। नतीजा ये हुआ कि जहां हर साल पहले 300 मीटर सुरंग बन रही थी, उसकी गति बढ़कर 1400 मीटर प्रति वर्ष हो गई। सिर्फ 6 साल में हमने 26 साल का काम पूरा कर लिया । 

जानें और क्या बोले पीएम मोदी...

- सच्चाई यही है कि दौलत बेग ओल्डी की एयरस्ट्रिप वायुसेना के अपने इरादों से शुरू हो पाई। उसमें राजनीतिक इच्छाशक्ति कहीं नजर नहीं आई

- अटल टनल की तरह ही अनेक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के साथ ऐसा ही व्यवहार किया गया।  

- लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी के रूप में सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण एयर स्ट्रिप 40-45 साल तक बंद रही। क्या मजबूरी थी, क्या दबाव था?

अहम है अटल टनल

विदित हो कि रोहतांग में स्थित 9.02 किलोमीटर लंबी ये टनल मनाली को लाहौल स्फीति से जोड़ती है । इस टनल की वजह से मनाली और लाहौल स्फीति घाटी सालों भर एक-दूसरे से जुड़े रह सकेंगे।  इससे पहले बर्फबारी की वजह से लाहौल स्फीति घाटी साल के 6 महीनों तक देश के बाकी हिस्सों से कट जाती थी। इस टनल' का निर्माण अत्याधुनिक तकनीक की मदद से पीर पंजाल की पहाड़ियों में किया गया है । इसकी वजह से मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो गई है और दोनों स्थानों के बीच सफर में लगने वाले समय में 4 से 5 घंटे की कमी आएगी

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