Thursday, December 1, 2022

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नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर SC का सवाल - 15 मई से पद खाली था , अब कैसे 24 घंटे में नाम भेज मंजूरी मिली

अंग्वाल न्यूज डेस्क
नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर SC का सवाल - 15 मई से पद खाली था , अब कैसे 24 घंटे में नाम भेज मंजूरी मिली

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में ज्यादा पारर्दिशता को लेकर केंद्र सरकार पर सवालों की बौंछार की । कोर्ट ने चुनाव आयुक्त अरुण गोयल की नियुक्ति की फाइल देखते हुए इसमें एकाएक आई तेजी पर भी सवाल उठाए । कोर्ट ने कहा 15 मई से यह पद खाली था । अचानक 24 घंटे से भी कम समय में नाम भेजे जाने से लेकर उसे मंजूरी देने की सारी प्रक्रिया पूरी कर दी गई । इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल दागते हुए पूछा -15 मई से 18 नवंबर के बीच क्या हुआ?"

सबसे जूनियर अधिकारी को कैसे चुना

इस दौरान कोर्ट ने कहा कानून मंत्री ने संविधान पीठ को 4 नाम भेजे । सवाल यह भी है कि यही 4 नाम क्यों भेजे गए । फिर उसमें से सबसे जूनियर अधिकारी को कैसे चुना गया । रिटायर होने जा रहे अधिकारी ने इस पद पर आने से पहले VRS लिया । 

अटॉर्नी जनरल बोले - पहले भी ऐसा हुआ है

कोर्ट में इस दौरान सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में कुछ भी गलत नहीं हुआ है । उन्होंने कोर्ट को बताया कि इससे पहले भी 12 से 24 घंटे में नियुक्ति हुई है । 

पहले क्या बोली थी कोर्ट


इससे पहले, बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के लिए परामर्श प्रक्रिया में देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने से निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी । सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि केंद्र में कोई भी सत्तारूढ़ दल "सत्ता में बने रहना पसंद करता है" और मौजूदा व्यवस्था के तहत पद पर एक "यस मैन" (हां में हां मिलाने वाला व्यक्ति) नियुक्त कर सकता है । 

इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट कुछ याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिसमें निर्वाचन आयुक्तों (EC) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी प्रणाली का अनुरोध किया गया है । 

-  केंद्र ने दलील दी कि 1991 के अधिनियम ने सुनिश्चित किया है कि निर्वाचन आयोग अपने सदस्यों के वेतन और कार्यकाल के मामले में स्वतंत्र रहता है और ऐसा कोई बिंदु नहीं है जो अदालत के हस्तक्षेप को वांछित करता हो । 

- वहीं जस्टिस के. एम. जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा था कि संस्थान की स्वतंत्रता उस सीमा पर सुनिश्चित की जानी चाहिए जिसके लिए प्रवेश स्तर पर नियुक्ति की जांच पड़ताल की जानी है। 

- इस पीठ में जस्टिस अजय रस्तोगी, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार शामिल हैं । 

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