Tuesday, November 30, 2021

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POCSO एक्ट पर SC ने बदला बांबे हाईकोर्ट का फैसला , अब स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट होना जरूरी नहीं

अंग्वाल न्यूज डेस्क
POCSO एक्ट पर SC ने बदला बांबे हाईकोर्ट का फैसला , अब स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट होना जरूरी नहीं

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को POCSO एक्ट में बड़ा बदलाव करते हुए बांबे हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया है । सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न के मामलों में स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट के बिना भी पॉक्सो एक्ट लागू होता है । हालांकि इससे पहले बांबे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक मामले में सुनवाई करते हुए एक आरोपी को बरी कर दिया था कि नाबालिग के निजी अंगों को स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट के टटोलना पॉक्सो एक्ट के तहत नहीं आता है । बांबे हाईकोर्ट के इस फैसले को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया था । अब कोर्ट ने नई व्यवस्था देते हुए बांबे हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया है ।

सुप्रीम कोर्ट ने दी नई व्यवस्था 

विदित हो कि अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बांबे हाईकोर्ट के एक मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में उठाया था , जिसमें नागपुर बेंच ने एक आरोपी को इन दलीलों के आधार पर बरी कर दिया था कि उसने नाबालिग को स्किन टू स्किन टच नहीं किया था । पॉक्सो एक्ट में इसके नहीं आने पर आरोपी को बरी कर दिया गया था । लेकिन सुप्रीम कोर्ट में इस मामले के पहुंचने के बाद शीर्ष अदालत ने नई व्यवस्था देते हुए कहा कि यौन उत्पीड़न के मामले में स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट होना जरूरी नहीं है , बिना कॉन्टेक्ट होने पर भी आरोपी पर पॉक्सो एक्ट लागू होगा ।

कोर्ट ने किया पोक्सो एक्ट को परिभाषित

इस नई व्यवस्था के बाद आरोपी को तीन साल की सजा सुनाई गई है । कोर्ट ने अपने फैसले में पॉक्सो (POCSO ) एक्ट को परिभाषित करते हुए कहा - सेक्सुअल सोच के साथ कपड़ों के साथ भी किसी को छूना पॉक्सो एक्ट के तहत आता है । इसमें टच शब्द का इस्तेमाल निजी अंगों के लिए किया गया है । जबकि फिजिकल कॉन्ट्रेक्ट का मतलब ये नहीं है कि इसके लिए स्किन टू स्किन कॉन्ट्रेक्ट हो । 


ये सब पोक्सो एक्ट के अंतर्गत

कोर्ट ने कहा कि सेक्सुअल मंशा के साथ शरीर के सेक्सुअल हिस्सों को छूना भी पोक्सो एक्ट के अंतर्गत आता है । ऐसा नहीं कहा जा सकता कि कपड़ों के ऊपर से बच्चों का यौन शोषण नहीं हुआ है । ऐसी परिभाषा देने से बच्चों की सुरक्षा के लिए बने इस एक्ट का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा । 

बांबे हाईकोर्ट के फैसले से सजा दिलाना मुश्किल

इससे पहले कोर्ट ने बांबे हाईकोर्ट के फैसलों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को दायर करते हुए कहा था कि बांबे हाईकोर्ट के फैसले से तो बुरी नीयत वाले लोगों को खुली छूट मिल जाएगी । ऐसे लोगों को सजा दिलाना भी मुश्किल काम हो जाएगा । 

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