Monday, March 1, 2021

Breaking News

   सरकार की सत्याग्रही किसानों को इधर-उधर की बातों में उलझाने की कोशिश बेकार है-राहुल गांधी     ||   थाइलैंड में साइना नेहवाल कोरोना पॉजिटिव, बैडमिंटन चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने गई हैं विदेश     ||   एयर एशिया के विमान से पुणे से दिल्ली पहुंची कोरोना वैक्सीन की पहली खेप     ||   फिटनेस समस्या की वजह से भारत-ऑस्ट्रेलिया चौथे टेस्ट से गेंदबाज जसप्रीत बुमराह बाहर     ||   दिल्ली: हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की पार्टी विधायकों के साथ बैठक, किसान आंदोलन पर चर्चा     ||   हम अपने पसंद के समय, स्थान और लक्ष्य पर प्रतिक्रिया देने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं- आर्मी चीफ     ||   कानपुर: विकास दुबे और उसके गुर्गों समेत 200 लोगों की असलहा लाइसेंस फाइल हुई गायब     ||   हाथरस कांड: यूपी सरकार ने SC में पीड़िता के परिवार की सुरक्षा पर दाखिल किया हलफनामा     ||   लखनऊ: आत्मदाह की कोशिश मामले में पूर्व राज्यपाल के बेटे को हिरासत में लिया गया     ||   मानहानि केस: पायल घोष ने ऋचा चड्ढा से बिना शर्त माफी मांगी     ||

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के भारत को मजबूत साझेदार बताने पर चीन 'झुलसा', अखबार के जरिए गीदड़भभकी

अंग्वाल न्यूज डेस्क
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के भारत को मजबूत साझेदार बताने पर चीन

नई दिल्ली । जो बाइडेन ने बुधवार को अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति की शपथ ली । वहीं भारतीय मूल की कमला हैरिस अब अमेरिका की उप राष्ट्रपति बन गई हैं । दोनों ने करीब 25 हजार सुरक्षागार्ड की तैनाती के बीच अमेरिका में सत्ता परिवर्तन को अंजाम दिया । अब भले ही बाइडेन के दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के मुखिया बनने के बाद इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि वह अपनी रणनीति से अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में अपने देश की हुई किरकिरी की  क्षतिपूर्ति करेंगे । ट्रंप के सत्ता से बेदखल होने के बाद यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि अब अमेरिका के दोस्तों और दुश्मनों की सूची में बदलाव भी देखा जा सकता है , लेकिन भारत और चीन को लेकर अमेरिका समेत दोनों ही देशों का रुख साफ है । खुद बाइडेन ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वह भारत को अपना एक अहम साझेदार मानता है , वहीं चीनी मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट में लिखा गया है कि चीन के साथ अमेरिका के संबंध बाइडेन के आने के बाद भी सुधरने नहीं जा रहे हैं । 

बता दें कि भारत के साथ ही अमेरिका की मीडिया में भी इस तरह की संभावनाएं जताई जा रही हैं कि अमेरिका (America) में हुआ सत्ता परिवर्तन उसके लिए कुछ सुकून लेकर आएगा । इतना ही नहीं बाइडेन के पद संभालने से इंडो-यूएस (Indo-US) के संबंध कमजोर नहीं होगे । खुद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने साफ कर दिया है कि भारत उनके लिए अहम साझेदार है और दोनों देशों के रिश्ते मजबूत बने रहेंगे । 

हालांकि इसी क्रम में चीन को लेकर अमेरिका का नजरिया नहीं बदला है । अमेरिका के नए रक्षामंत्री लॉयड ऑस्टिन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चीन की दादागिरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी । 

बहरहाल , बाइडेन सरकार के आने के बाद एक बार फिर से चीन को अब भारत अमेरिका के संबंधों में मजबूती आने की बात परेशान कर रही है । इसी के चलते चीन की भारत के खिलाफ बयानबाजी तीखी होती जा रही है । असल में चीन की कम्युनिस्ट सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स (Global Times) ने लिखा है कि कुछ भारतीय विशेषज्ञों ने भारत सरकार को अमेरिका के साथ मिलकर तिब्बत कार्ड (Tibet Card) खेलने का सुझाव दिया है । यदि भारत ने ऐसा किया तो दोनों देशों के बीच रिश्ता पूरी तरह खत्म हो जाएगा .


अखबार ने अपने लेख में कहा है कि तिब्बत चीन का हिस्सा है और उस पर किसी की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी । 

ग्लोबल टाइम्स में छपे लेख में कहा गया है, ‘भारत में ब्रह्मा चेलानी जैसे कुछ भूराजनीतिज्ञों ने कहा है कि भारत सरकार को अमेरिका के साथ मिलकर तिब्बत कार्ड खेलना चाहिए । इतना ही नहीं उन्होंने अमेरिका के तिब्बत कानून का लाभ उठाने की भी सलाह दी है । वहीं कुछ अन्य जानकारों का कहना है कि तिब्बत ने अगर दूसरा रास्ता चुना तो चीन के लिए यह स्थिति काफी खराब होगी। 

चीनी सरकार के मुखपत्र ने अपने लेख में लिखा - भारत ने निजी फायदे के लिए चीन को परेशान करने के लिए तिब्बत कार्ड नहीं खेलना चाहिए । भारत के कुछ भूराजनीतिज्ञों को तिब्बत की समझ नहीं है । तिब्बत कार्ड खेलकर कुछ भारतीय चीन को मजबूर करना चाहते हैं कि वो कश्मीर को भारत के हिस्से के रूप में मान्यता दे, लेकिन इन लोगों ने कभी महसूस नहीं किया कि तिब्बत का प्रश्न भारत-चीन संबंधों के लिए कितना संवेदनशील है ।  ये लोग आग से खेल रहे हैं । 

Todays Beets: