Thursday, December 1, 2022

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सिर्फ सांकेतिक है कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव! एक - एक कर नाम वापस ले रहे उम्मीदवार , खड़गे का नया अध्यक्ष बनना तय

अंग्वाल न्यूज डेस्क
सिर्फ सांकेतिक है कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव! एक - एक कर नाम वापस ले रहे उम्मीदवार , खड़गे का नया अध्यक्ष बनना तय

नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनावों को लेकर पिछले कुछ दिनों से पार्टी के भीतर काफी हो हल्ला मचा हुआ है । एक समय ऐसा लग रहा था कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और गांधी परिवार के करीबी अशोक गहलोत कांग्रेस के नए अध्यक्ष बनेंगे , लेकिन राजस्थान में हुए हंगामे के बाद उनका पत्ता कट गया है । लेकिन चल रहे घटनाक्रम को देखकर ऐसा लग रहा है कि यह चुनाव मात्र सांकेतिक हैं , क्योंकि शुक्रवार सुबह खड़गे के नामांकन के लिए जाने की खबरों के बाद दिग्विजय सिंह ने बड़े सधे हुए लफ्जों का इस्तेमाल करते हुए अपने को इस रेस से बाहर होने का ऐलान किया । उन्होंने कहा कि खड़गे पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और मेरे सीनियर हैं , मैं उनके खिलाफ चुनाव नहीं लड़ूंगा । हालांकि उनके शब्दों में थोड़ी नाराजगी भी नजर आई । बहरहाल , अब कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनावों में सांकेतिक लड़ाई शशि थरूर बनाम मल्लिकार्जुन खड़गे की होगी , जिसमें खड़गे की जीत तय है। 

सोनिया के करीबी हैं खड़गे

बता दें कि अशोक गहलोत के साथ ही मल्लिकार्जुन खड़गे भी सोनिया गांधी के बेहद करीबी लोगों में शुमार हैं । यह चुनावों से पहले ही आशंका जताई जा रही थी कांग्रेस का अध्यक्ष गांधी परिवार का कोई बहुत करीबी नेता ही बनेगा । अब हालिया घटनाक्रम में जिस तरह दिग्विजय सिंह ने अपने सधे हुए शब्दों से अपना नामांकन नहीं भरने का ऐलान किया और खड़गे को समर्थन देने उनके घर जा पहुंचे और उनके साथ ही अशोक गहलोत भी खड़गे के घर पहुंचे , इससे साफ हो गया कि पार्टी आलाकमान का आशीर्वाद खड़के को है। 

वफादारी का इनाम पाते रहे हैं

मल्लिकार्जुन खड़गे गांधी परिवार के भरोसेमंद माने जाते हैं, जिसको लेकर समय-समय पर उन्हें पार्टी की ओर से वफादारी का इनाम भी मिलता रहा है। साल 2014 में खड़गे को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाया गया। लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने उन्हें 2020 में राज्यसभा भेज दिया। पिछले साल गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल खत्म होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बना दिया। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले 80 वर्षीय खड़गे ने एक लंबी पारी यूनियन पॉलिटक्स की भी खेली। वह संयुक्त मजदूर संघ के एक प्रभावशाली नेता थे, जिन्होंने मजदूरों के अधिकारों के लिए किए गए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। खड़गे का जन्म कर्नाटक के बीदर जिले के वारावत्ती इलाके में एक किसान परिवार में हुआ था। गुलबर्गा के नूतन विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और गुलबर्गा के सरकारी कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली। फिर गुलबर्गा के ही सेठ शंकरलाल लाहोटी लॉ कॉलेज से एलएलबी करने के बाद वकालत करने लगे। कांग्रेस का हाथ खड़गे ने साल 1969 में था और पहली बार 1972 में कर्नाटक की गुरमीतकल असेंबली सीट से विधायक बने। खड़गे गुरमीतकल सीट से नौ बार विधायक चुने गए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों में मंत्री का पद भी संभाला। 


गहलोत बोले - खड़गे अनुभवी हैं

मल्लिकार्जुन खड़गे के घर उनसे मिलने पहुंचे अशोक गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम सब कांग्रेसी आज सब एकजुट हैं । पिछले दिनों राजस्थान में जो हुआ उसकी नैतिक जिम्मेदारी मेरी थी , इसलिए मैंने फैसला लिया कि मैं पार्टी अध्यक्ष चुनाव नहीं लड़ूंगा । अब खड़गे ने जो नामांकन करने का फैसला लिया है वह पार्टी के लिए अच्छा है । वह एक अनुभवी नेता हैं । अध्यक्ष का मैच असल में एक  फ्रेंडली मैच है । उन्होंने कहा कि मैं पिछले 50 सालों से पार्टी में अलग अलग पदों पर रहा हूं । कई बार आदमी थक भी जाता है । मेरे लिए कोई पद महत्वपूर्ण नहीं है । मैं कांग्रेस को मजबूत करने के लिए काम करूंगा । 

पर्दे के पीछे सक्रिय हैं प्रियंका

कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के बीच सवाल उठ रहा था कि आखिर प्रियंका गांधी इस पूरी पिक्चर से गायब क्यों हैं? लेकिन अब कांग्रेस सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि प्रियंका पूरे चुनाव में परदे के पीछे से काफी अहम भूमिका निभा रही हैं । प्रियंका ये सुनिश्चित कर रही हैं कि कांग्रेस को कोई मजबूत अध्यक्ष मिले ।खबर है कि प्रियंका सचिन पायलट को राजस्थान की सत्ता सौंपने का मन बना चुकी हैं । दो साल पहले जब पायलट ने बगावत की थी तो उन्हें मनाने में सबसे बड़ी भूमिका प्रियंका गांधी की रही ।  माना जा रहा है कि पायलट की वापसी इसी शर्त पर हुई कि आने वाले वक्त में उन्हें राजस्थान की कमान सौंपी जा सकती है। इसीलिए अब प्रियंका का मानना है कि पार्टी को पायलट के नेतृत्व में अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए । 

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