Friday, June 18, 2021

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महात्मा गांधी की परपोती जालसाजी में गिरफ्तार , कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा

अंग्वाल न्यूज डेस्क
महात्मा गांधी की परपोती जालसाजी में गिरफ्तार , कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा

नई दिल्ली । राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की परपोती एक बड़े गबन के मामले में कोर्ट ने उन्हें 7 साल कैद की सजा सुनाई है । उनपर 60 लाख रुपये के गबन और जालसाजी के आरोप लगे थे , जिसकी जांच में दोष साबित होने पर उन्हें दक्षिण अफ्रीका की डरबन कोर्ट ने 7 साल कैद की सजा सुनाई । 56 वर्षीय आशीष लता रामगोबिन ने बिजनेसमैन एसआर महाराज के साथ धोखाधड़ी की है । 

बता दें कि आशीष लता रामगोबिन देश की मशहूर एक्टविस्ट इला गांधी और दिवंगत मेवा रामगोबिन की बेटी है । वर्ष 2015 में उनपर बिजनेस मैन एसआर महाराज के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगे थे । मामले की जांच में सामने आया कि महाराज ने आशीष लता रामगोबिन को भारत में मौजूद एक कंसाइनमेंट के लिए आयात और सीमा शुल्क के तौर पर 62 लाख रुपये एडवांस दिए थे । 

इस मामले की जांच में सामने आया कि उन्होंने जाली दस्तावेज और चालान संभावित निवेशकों को दे दिए ताकि वह यह विश्वास जता सकें कि भारत से उनके कंसाइनमेंट के तीन कंटेनर मंगाने के लिए कवायद को तेज कर चुकी हैं । उस दौरान जब मामला डरबन के राष्ट्रीय अभियोजन प्राधिकरण में पहुंचा तो उनकी जालसाजी के सबूत रखे गए , हालांकि बाद में उन्हें 50 हजार रैंड की जमानत पर रिया कर दिया गया था । 


इस मामले में सोमवार को फिर से डरबन कोर्ट में सुनवाई हुई , जिसमें बताया गया कि 2015 में लता रामगोबिन न्यू अफ्रीका अलाइंस फुटवियर डिस्ट्रीब्यूटर के डायरेक्टर महाराज से मुलाकात की थी । महाराज की यह कंपनी जूते , कपड़े और लिनेन के कपड़ों का आयात निर्यात करती है , जिसके लिए उन्होंने भारत से लिनेन के एक कंसाइनमेंट को लेकर बात की थी । लता रामगोबिन ने भारत में अपनी पहुंच का हवाला देते हुए कंसाइनमेंट पहुंचवाने की बात कही थी । लेकिन उन्होंने फीस के तौर पर 62 लाख रुपये एडवांस लेने के बाद फर्जी दस्तावेज कंपनी को दिए । 

दस्तावेजों के फर्जी होने की जानकारी मिलने पर महाराज ने लता के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करवाया था । इस मामले की सुनवाई मे सोमवार को डरबन कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए 7 साल कैद की सजा सुनाई है । 

बता दें कि लता रामगोबिन एनजीओ इंटरनेशनल सेंटर फॉर नॉन वॉयलेंस की संस्थापक और कार्यकारी निदेशक हैं । इस मामले में सजा सुनाने के बाद डरबन कोर्ट ने सजा की अपील करने की अनुमति देने से मना कर दिया है । 

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