Tuesday, October 4, 2022

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Independence Day: पीएम मोदी बोले - भाई भतीजावाद भारत छोड़ो , जिन्होंने देश को लूटा है उन्हें लौटाना पड़ेगा

अंग्वाल न्यूज डेस्क
Independence Day: पीएम मोदी बोले - भाई भतीजावाद भारत छोड़ो , जिन्होंने देश को लूटा है उन्हें लौटाना पड़ेगा

नई दिल्ली । India 76th Independence Day । भारत आज अपना 76वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है । ऐसे में पहली बार लाल किले से स्वदेशी तोप से सलामी दी गई । लाल किले की प्राचीर पर ध्वजारोहण करने के बाद देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मैं देशवासियों के साथ ही दुनियाभर में फैले भारत प्रेमियों को, भारतीयों को आजादी के इस अमृत महोत्सव की बहुत-बहुत बधाई देता हूं । वह बोले - न सिर्फ हिंदुस्तान का हर कोना, लेकिन दुनिया के हर कोने में आज किसी न किसी रूप में भारतीयों के द्वारा या भारत के प्रति अपार प्रेम रखने वाला विश्व के हर कोने में ये हमारा तिरंगा आन-बान-शान के साथ लहरा रहा है । इस दौरान पीएम मोदी ने देश की राजनीति में भाई भतीजावाद भारत छोड़ो का नारा देते हुए कहा कि जिन्होंने देश को लूीटा हैं उन्हें अब लौटाना होगा । 

सपना पूरा करने का जिम्मा उठाना होगा

पीएम मोदी ने इस दौरान कहा - जब वह 130 करोड़ देशवासियों के सपनों को देखते हैं और उनके संकल्पों की अनुभूति करते हैं तो आने वाले 25 साल के लिए देश को ‘‘पंच प्राण’’ पर अपनी शक्ति, अपने संकल्पों और अपने सामर्थ्य को केंद्रित करना है । हमें पंच प्राण को लेकर 2047 तक चलना है, जब आजादी के 100 साल होंगे, आजादी के दीवानों के सारे सपने पूरा करने का जिम्मा उठा करके चलना है । 

हमें अंग्रेजों जैसा दिखने की जरूरत नहीं

पीएम मोदी ने कहा कि हमें अंग्रेजों के जैसे दिखने की जरूरत नहीं है, गुलामी की मानसिकता से बाहर आने की जरूरत है ।  पीएम ने कहा कि जब हम अपनी धरती से जुड़ेंगे तभी तो ऊंचा उड़ेंगे और विश्व को समाधान देंगे । दुनिया आज भारत से प्रभावित हो रही है । हम वो लोग हैं जो प्रकृति के साथ रहना जानते हैं । ग्लोबल वार्मिंग की समस्या हल हमारे पास है । 

आज का दिन पूण्य पड़ाव है

वह बोले - हिंदुस्तान का कोई कोना, कोई काल ऐसा नहीं था, जब देशवासियों ने सैंकड़ों सालों तक गुलामी के खिलाफ जंग न की हो, जीवन न खपाया हो, यातनाएं न झेली हो, आहुति न दी हो । आज हम सब देशवासियों के लिए ऐसे हर महापुरुष को, हर त्यागी और बलिदानी को नमन करने का अवसर है । आज का ये दिवस ऐतिहासिक है । एक पूण्य पड़ाव, एक नई राह , एक नए संकल्प और नए सामर्थ्य के साथ कदम बढ़ाने का ये शुभ अवसर है. देश कृतज्ञ है मंगल पांडे, तात्या टोपे, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, असफाक उल्ला खां, राम प्रसाद बिस्मिल ऐसे अनगिनत ऐसे हमारे क्रांति वीरों ने अंग्रेजों की हुकूमत की नींव हिला दी थी । आजादी की जंग लड़ने वाले और आजादी के बाद देश बनाने वाले भी  अनेक महापुरुषों को आज नमन करने का अवसर है । 

सभी महापुरुषों को याद किया गया


वह बोले - अमृत महोत्सव के दौरान  देशवासियों ने देश के हर कोने में लक्ष्यावधि कार्यक्रम किये. शायद इतिहास में इतना विशाल, व्यापक, लंबा एक ही मकसद का उत्सव मनाया गया हो. वो शायद एक पहली घटना हुई है । हिंदुस्तान के हर कोने में उन सभी महापुरुषों को याद करने का प्रयास किया गया, जिनको किसी न किसी कारणवश इतिहास में जगह न मिली, या उनकों भुला दिया गया था. आज देश ने खोज खोज कर ऐसे वीरों, महापुरुषों, बलिदानियों, सत्याग्रहियों को याद किया, नमन किया । 

संकल्प बड़ा था तो हम आजाद हो गए

उन्होंने कहा - संकल्प बड़ा था तो हम आजाद हो गए, संकल्प छोटा होता तो आज भी संघर्ष कर रहे होते । 75 साल में आज इन सबको और देश के कोटि-कोटि नागरिकों को, जिन्होंने 75 साल में अनेक कठिनाइयों के बीच भी देश को आगे बढ़ाने के लिए अपने से जो हो सका, वो करने का प्रयास किया है, को स्मरण करने का दिन है ।

पंच प्रण का महत्व बताया

वह बोले - आने वाले 25 साल के लिए हमें 'पंच प्रण' पर अपनी शक्ति, संकल्पों और सामर्थ्य को केंद्रित करना होगा. अनुभव कहता है कि एक बार हम सब संकल्प लेकर चल पड़ें, तो हम निर्धारित लक्ष्यों को पार कर लेते हैं । जिस प्रकार से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनी है, जिस मंथन के साथ बनी है, कोटि-कोटि लोगों के विचार प्रवाह को संकलित करते हुए बनी है. भारत की धरती से जुड़ी हुई शिक्षा नीति बनी है । 

ग्लोबल वार्मिंग का समाधान हमारे पास

पीएम ने कहा - आज विश्व पर्यावरण की समस्या से जूझ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग की समस्याओं के समाधान का रास्ता हमारे पास है । इसके लिए हमारे पास वो विरासत है, जो हमारे पूर्वजों ने हमें दी है । हमने देखा है कि कभी कभी हमारे टैलेंट भाषा के बंधनों में बंध जाते हैं , ये गुलामी की मानसिकता का परिणाम है,  हमें हमारे देश की हर भाषा पर गर्व होना चाहिए । हम वो लोग हैं, जो जीव में शिव देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नर में नारायण देखते हैं । हम वो लोग हैं, जो नारी को नारायणी कहते हैं, हम वो लोग हैं, जो पौधे में परमात्मा देखते हैं । हम वो लोग हैं, जो नदी को मां मानते हैं, हम वो लोग हैं, जो कंकड़-कंकड़ में शंकर देखते हैं । आत्मनिर्भर भारत, ये हर नागरिक का, हर सरकार का, समाज की हर एक इकाई का दायित्व बन जाता है ।. आत्मनिर्भर भारत, ये सरकारी एजेंडा या सरकारी कार्यक्रम नहीं है, ये समाज का जन-आंदोलन है, जिसे हमें आगे बढ़ाना है . 

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