Monday, October 26, 2020

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घाटी में फिर सियासी हंगामे की आशंका , ''गुपकार बैठक'' में अब्दुल्ला बोले - मोदी सरकार वापस दे हमारे अधिकार

अंग्वाल न्यूज डेस्क
घाटी में फिर सियासी हंगामे की आशंका ,

नई दिल्ली । जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए हुए एक साल से ज्यादा का समय हो गया है । केंद्र शासित राज्य बनाए जाने के बाद पिछले कुछ समय में राज्य के राजनेताओं की नजरबंदी भी हटाई गई है । हाल में राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती को भी रिया कर दिया गया । इस सबके साथ ही घाटी से फिर से सियासत को भड़काने और देश विरोधी बातें उठनी शुरू हो गई है । पहले चीन की मदद से राज्य में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का फैसला पलटने की बात कह चुके अब्दुल्ला ने गुरुवार को कई राजनीतिक दलों की हुई सियासी ''गुपकार बैठक '' में केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोला। उन्होंने कहा -हम भारत सरकार से राज्य के लोगों का अधिकार वापस मांगते हैं । जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक मुद्दे को हल करने की जरूरत है. हम सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की मांग करते हैं । हम फिर से मिलेंगे और एक रणनीति तैयार करेंगे । उनके इस बयान से ही आगामी दिनों में घाटी में फिर से सियासी हंगामे की आशंका जताई जा रही है।ॉ

बता दें कि महबूबा मुफ्ती के रिहा होने के बाद बुधवार को ही फारुख अब्दुल्ला ने उनसे मुलाकात की थी । इसके बाद आज यानी गुरुवार को एक ''गुपकार बैठक'' बुलाई गई थी , जिसमें केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ कुछ समय पहले संयुक्त बयान देने वाले सभी दलों के नेताओं को बुलाया गया था । इसमें उमर अब्दुल्ला के साथ सज्जाद लोन समेत कई नेता पहुंचा । इस बैठक में फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि हम महबूबा मुफ्ती को 14 महीने बाद हुई उनकी रिहाई के लिए बधाई देने के लिए इकट्ठा हुए हैं । हमने इस गठबंधन को गुपकार घोषणा कहने का फैसला किया है ।  एक बार फिर से नेशनल कांफ्रेंस के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला के विवादित बोल सामने आए। उन्होंने कहा कि हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं हमारे राज्य के लोगों के अधिकार वापस लौटाए जाएं । हम घाटी के राजनीतिक कैदियों को भी रिहा किए जाने की मांग करते हैं । 

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इस दौरान महबूबा मुफ्ती ने फिर से दोहराया कि दिल्ली ने हमसे जो छीना है हम हर हाल में उसे वापस लेकर रहेंगे । जबकि फारुख अब्दुल्ला अपने पूर्व के विवादित बयान पर चीन की मदद की बात कहते सुनाई दिए । इस सब बयानबाजी के बाद यह बात को साफ हो रही है कि आने वाले दिनों में जम्मू कश्मीर की सियासत एक बार फिर से गर्माने वाली है । 


खास बात यह रही कि इस दौरान उन्होंने आगे इस सबके लिए रणनीति बनाने और इस मुद्दे को लेकर लगातार मिलते रहने की बात कही । इस बैठक में उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, सज्जाद लोन समेत वह सभी नेता शामिल थे , जिन्होंने 4 अगस्त 2019 को साझा बयान जारी किया था। 

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चलिए आपको बता दें कि आखिर यह गुपकार समझौता क्या है । असल में 5 अगस्त 2019 को जब केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य से अनुच्छेद 370 हटाई तो घाटी के नेताओं ने एक साझा बयान जारी किया था । इस बयान में उन सभी ने अनुच्छेद 35A और 370 को खत्म करना या बदलने को असंवैधानिक करार दिया था । साथ ही कहा गया था कि राज्य का बंटवारा कश्मीर और लद्दाख के लोगों के खिलाफ ज्यादती है । इसे ही बाद में गुपकार समझौता कहा गया । 

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