Thursday, December 1, 2022

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जस्टिस चंद्रचूड़ बने देश के नए चीफ जस्टिस , 2 साल का होगा कार्यकाल , पिता थे 16वें CJI

अंग्वाल न्यूज डेस्क
जस्टिस चंद्रचूड़ बने देश के नए चीफ जस्टिस , 2 साल का होगा कार्यकाल , पिता थे 16वें CJI

नई दिल्ली । राष्ट्रपति भवन में हुए कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ को देश के 50वें चीफ जस्टि पद की शपथ दिलाई । उन्होंने सेवानिवृत्त हो रहे CJI यूयू ललित की जगह ली है । इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित अन्य लोग भी मौजूद थे । जस्टिस चंद्रचूड़ ने रिटायर हो चुके मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित का स्थान लिया है । जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल 10 नवंबर, 2024 तक रहेगा.जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ भी देश के चीफ जस्टिस रह चुके हैं । 

जानें जस्टिस चंद्रचूड़ से जुड़ी अहम बातें...

- 11 नवंबर 1959 को जन्मे जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता भी भारत के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं , उनके पिता यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ सबसे लंबे समय के लिए इस अहम पद पर रहे । 

- बता दें कि जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ 2016 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे । उससे पहले वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे । 

- जज के रूप में उनकी पहली नियुक्ति साल 2000 में बॉम्बे हाई कोर्ट में हुई थी । 

- उससे पहले 1998 से 2000 तक वह भारत सरकार के एडिशनल सॉलिसीटर जनरल रहे ।  

- उन्होंने 1982 में दिल्ली विश्वविद्यालय से वकालत की डिग्री हासिल की थी ।  उन्होंने प्रतिष्ठित हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाई की । 

- कोविड के दौर में उन्होंने ऑक्सीजन और दवाइयों की उपलब्धता पर कई आदेश दिए ।  एक ऐसा मौका भी आया जब वह खुद कोरोना पीड़ित होने के बावजूद अपने घर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए सुनवाई से जुड़े । 


-  हाल ही में उन्होनें रात 9 बज कर 10 मिनट तक कोर्ट की कार्यवाही चलाई और उस दिन अपने सामने लगे सभी मामलों को निपटाया । 

फैसले जो रहे चर्चा में

- व्यभिचार के लिए लगने वाली आईपीसी की धारा 497 को रद्द करते समय दिए गए फैसले में उन्होंने लिखा कि एक शादीशुदा महिला की भी अपनी स्वायत्तता है । उसे अपने पति की संपत्ति की तरह नहीं देखा जा सकता । उसका किसी और पुरूष से संबंध रखना तलाक का उचित आधार हो सकता है, लेकिन इसे अपराध मान कर दूसरे पुरुष को जेल में डाल देना गलत होगा । 

- उन्होंने अविवाहित महिलाओं को भी 20 से 24 हफ्ते के गर्भ को गिराने की अनुमति दी ।  इस ऐतिहासिक फैसले में उन्होंने यह भी कहा कि अगर पति ने ज़बरन संबंध बना कर पत्नी को गर्भवती किया है, तो उसे भी 24 हफ्ते तक गर्भपात का अधिकार होगा ।  इस तरह गर्भपात के मामले ने ही सही, कानून में पहली बार वैवाहिक बलात्कार यानी मैरिटल रेप को मान्यता मिली । 

- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समेत तमाम मौलिक अधिकारों को लेकर जस्टिस चंद्रचूड़ सजग रहे हैं । उन्होंने राजनीतिक और वैचारिक रूप से अलग-अलग छोर पर खड़े लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक जैसा आदेश दिया । वह यह कि सिर्फ अपने विचार व्यक्त करने के लिए किसी को जेल में डाल देना सही नहीं है । लंबे समय से सेना में स्थायी कमीशन के लिए लड़ाई लड़ रही महिला अधिकारियों को भी उन्होंने राहत दी । 

-  अयोध्या मामले का फैसला देने वाली 5 जजों की बेंच के जस्टिस चंद्रचूड़ भी सदस्य थे। 

-  आधार मामले ओर फैसला देते हुए उन्होंने निजता को मौलिक अधिकार घोषित करवाने में अहम भूमिका निभाई । 

पहली बार पिता पुत्र बने देश के सीजेआई

जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ 2 फरवरी 1978 से 11 जुलाई 1985 तक भारत के 16वें मुख्य न्यायाधीश रहे थे । न्यायपालिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब पिता-पुत्र CJI बने हैं । जस्टिस चंद्रचूड़ देश के प्रगतिशील और उदार जज के तौर पर जाने जाते हैं । 

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