Wednesday, May 25, 2022

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SC में याचिकाकर्ता बोले - समुदाय विशेष के खिलाफ एक्शन , सॉलीसीटर जनरल बोले - तथ्य बताएं , ये भाषण का मंच नहीं

अंग्वाल न्यूज डेस्क
SC में याचिकाकर्ता बोले - समुदाय विशेष के खिलाफ एक्शन , सॉलीसीटर जनरल बोले - तथ्य बताएं , ये भाषण का मंच नहीं

नई दिल्ली । जहांगीरपुरी में एमसीडी के ऑपरेशन बुलडोजर को लेकर गुरुवार को याचिककर्ताओं और सरकारी पक्ष के वकीलों के बीच गर्मागरम बहस हुई । मिशन बुलडोजर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं में से एक जमीयत उलेमा-ए-हिंद की तरफ से पक्ष रख रहे दुष्यंत दवे ने इसे राष्ट्रीय महत्व का मामला करार दिया ।  इस दौरान उन्होंने सरकार की इस कार्रवाई को एक समुदाय को निशाना बनाने की साजिश करार दिया । वह बोले - इस तरह की कार्रवाई पहले कभी नहीं हुई है । उन्होंने आगे कहा कि पुलिस ने हिन्दू पक्षे के ऊपर भी एफआईआर की है कि आपने बिना अनुमति यात्रा निकाली । वहीं याचिकाकर्ताओं की इन दलीलों पर सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि आप तथ्यों पर बात करें , यह भाषण देने का कोई मंच नहीं है । 

विदित हो कि जस्टिस एल. नागेश्वर राव और बीआर गवई की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है । इस पीठ के सामने याचिककर्ताओं के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि कानूनन 5 से 15 दिन का नोटिस मिलना चाहिए था । ऐसे मामलों में कई बार कोर्ट ने नोटिस की मियाद को बढ़ाया है ।  उन्होंने कहा कि भाजपा नेता ने चिट्ठी लिखी और लोगों को बिना मौका दिए कार्रवाई शुरू हो गई ।  दिल्ली में 1731 अनधिकृत कॉलोनी है । लगभग 50 लाख लोग रहते हैं , लेकिन एक ही कॉलोनी को निशाना बनाया जा रहा है । दवे ने कहा कि 30 साल से ज़्यादा पुराने निर्माण को अचानक गिराना शुरू कर दिया । 

वहीं एक याचिकाकर्ताओं के एक अन्य वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अतिक्रमण और अवैध निर्माण पूरे देश की समस्या है , लेकिन इसकी आड़ में एक समुदाय को निशाना बना रहे हैं । वह बोले - एमपी के मंत्री ने कहा कि अगर मुसलमान धार्मिक यात्रा पर हमला करेंगे तो उनसे कोई रियायत नहीं होगी. यह किसने तय कर दिया? यह कहां का कानून है? कहीं-कहीं तो समुदाय के लोगों को अपने इलाके में कैद से कर दिया गया है ।  यह समय है कि कोर्ट यह संदेश दे कि देश में कानून का शासन है । 


इस सब पर पीठ के सामने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इनको केस के तथ्यों पर बात करने के लिए कहि ।  यह भाषण का मंच नहीं है ।  इसके बाद जज ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों से कहा कि आप केस पर बात करिए । जस्टिस की तरफ से कहा गया कि अतिक्रमण हटाने पर रोक नहीं लगा सकते हैं । ये काम बुलडोजर से ही होता है । तुषार मेहता ने ये भी कहा कि दिल्ली में हुई कार्रवाई अतिक्रमण हटाने की रुटीन प्रकिया है. जिसका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति या समुदाय विशेष को भी टारगेट करना नहीं है ।

सुनवाई के दौरान इस बीच बृंदा करात के वकील पी सुरेन्द्रनाथ ने कहा कि वो मौके पर मौजूद थीं ।  कोर्ट की रोक के बावजूद काफी देर तक वहां बुलडोजर चलता रहा । यानी आदेश के बाद भी कार्रवाई न रुकने को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है । 

 

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