Tuesday, October 4, 2022

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चाइल्ड पोर्नोग्राफी को लेकर SC का कड़ा निर्देश , 6 हफ्ते के भीतर केंद्र से जवाब दाखिल करने को कहा

अंग्वाल न्यूज डेस्क
चाइल्ड पोर्नोग्राफी को लेकर SC का कड़ा निर्देश , 6 हफ्ते के भीतर केंद्र से जवाब दाखिल करने को कहा

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है । शीर्ष अदालत ने केंद्र की मोदी सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए कहा कि सरकार ने अब तक चाइल्ड पोर्नोग्राफी को रोकने के लिए क्या क्या काम किया है , इसकी जानकारी कोर्ट को आगामी 6 हफ्ते के भीतर दें। हालांकि इस मुद्दे से जुड़ी एक याचिका को गत दिनों सुप्रीम कोर्ट में खारिज कर दिया था , जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा था कि पोर्नोग्रफी और सेक्शुअल क्राइम के संबंध का परीक्षण किया जाए। याचिकाकर्ता ने कहा था कि हाल में असम में एक मामले की छानबीन में यह बात सामने आई कि छह साल की लड़की का मर्डर चार बच्चों ने किया था और ये चारों पोर्न देखने के आदी थे। इसके बाद वहां गाइडलाइंस बनाई गईं कि जांच अधिकारी रेप और सेक्शुअल ऑफेंस के केस में तय की गई मानक प्रक्रियाओं का पालन करें।

विदित हो कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार से पूछा कि पिछले कुछ सालों में उनकी सरकार की ओर से इस रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए है । इसके एक विस्तृति रिपोर्ट कोर्ट ने 6 हफ्तों के भीतर मांगी है । 


बता दें कि पोर्नोग्रफी से जुड़े एक मामले (Pronography) में अधिवक्ता कमलेश वासवानी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी। 2013 में दाखिल अर्जी में उन्होंने कहा था कि इंटरनेट लॉ के अभाव में पोर्न विडियो को बढ़ावा मिल रहा है। वासवानी ने बताया कि मार्केट में 20 लाख पोर्न विडियो हैं और इन्हें इंटरनेट से सीधे सीडी में डाउनलोड किया जा सकता है। बच्चे आसानी से यह कंटेंट देख सकते हैं। वासवानी का कहना है कि बच्चों के दिमाग पर पोर्न विडियो का बुरा असर पड़ रहा है और पूरी सोसायटी खतरे में है।

शुरुआती याचिका चाइल्ड पोर्नोग्रफी रोकने ( Ban on Child Pronography) के लिए थी। बाद में तमाम तरह की पोर्नोग्रफी ब्लॉक करने की गुहार इसमें जोड़ दी गई। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिया था कि पोर्न साइट्स को ब्लॉक करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी और फिर मार्च 2016 में आदेश दिया था कि संबंधित अथॉरिटी सुझाव दे कि किस तरह से इन गतिविधियों को रोका जा सकता है। वासवानी के मुताबिक, कोर्ट ने अपने ऑर्डर में इसे रोकने के लिए कदम उठाने को कहा था।

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