Friday, September 24, 2021

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अगर आप ''काले कोट'' में हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि आपकी जान दूसरों से ज्यादा कीमती है - सुप्रीम कोर्ट

अंग्वाल न्यूज डेस्क
अगर आप

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने एक अधिवक्ता की उस याचिका को खारिज कर दिया , जिसमें उन्होंने 60 साल से कम आयु में मरने वाले वकीलों के परिजनों को 50 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की थी । इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता को भी फटकार लगाते हुए कहा कि यह याचिका सिर्फ अधिवक्ता ने अपने प्रचार के उद्देश्य से की है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के जजों ने यह भी कहा कि अगर कोई काले कोट में है, इसका मतलब यह नहीं कि उसकी जान दूसरों से ज्यादा कीमती है । इस बयान के साथ ही कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 10 हज़ार रुपए का हर्जाना भी लगाया है । 

क्या था याचिका में ...बता दें कि अधिवक्ता प्रदीप कुमार यादव ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल करते हुए 60 साल से कम आयु में किसी वकील की मौत होने पर उसे 50 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की मांग की थी । उनका कहना था कि वकील सिर्फ अपने पास आने वाले मुकदमों से ही आय अर्जित करते हैं । उनकी आमदनी का कोई दूसरा साधन नहीं होता । वकील समाज की सेवा के लिए 24 घंटे तत्पर रहते हैं  लेकिन उन्हें कई तरह की परेशानियां उठानी पड़ती हैं । यहां तक कि अधिकतर मकान-मालिक अपने यहां किसी वकील को किराएदार नहीं रखना चाहते । 

अधिवक्ता कल्याण कोष में जमा होता है पैसा

याचिका में कहा गया कि प्रतिवर्ष जिला अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लाखों मुकदमे दाखिल होते हैं । हर मुकदमे के दाखिल होते समय अधिवक्ता कल्याण कोष के लिए भी लगभग ₹25 का स्टांप लगाया जाता है । पर जब कोई वकील दिक्कत में होता है, तो इस कोष का उसे कोई लाभ नहीं मिल पाता । बार एसोसिएशन और बार काउंसिल भी इन वकीलों की मदद के लिए आगे नहीं आते । ऐसे में इस फंड का सही उपयोग करने की व्यवस्था कोर्ट दे सकती है । इस राशि से 60 वर्ष की आयु से कम की उम्र में मरने वाले अधिवक्ता के परिजनों को मदद की जानी चाहिए । .

कोर्ट ने याचिका पर लगाई फटकार


सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, विक्रम नाथ और भी बी वी नागरत्ना की बेंच के सामने यह याचिका आई। पीठ के अध्यक्ष जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस याचिका पर नाराजगी जताते हुए कहा, "अब समय आ गया है कि हमें इस तरह के फर्जी पीआईएल को रोकने के लिए कुछ करें । आपकी याचिका में एक भी बात ऐसी नहीं है जिस पर विचार करने की जरूरत है । आप समझते हैं कि आप कहीं से भी कट और पेस्ट कर याचिका दाखिल कर देंगे और जज उसे नहीं पढ़ेंगे, तो ऐसा नहीं होता है । कोर्ट ने आगे कहा कहा कि पिछले दिनों बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है । सब के जीवन का समान महत्व है. वकीलों को अपवाद की तरह नहीं देखा जा सकता है । 

अधिवक्ता पर लगा जुर्माना 

कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करने के साथ ही अधिवक्ता प्रदीप कुमार यादव पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा दिया है । कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह सब याचिकाकर्ता ने महज सुर्खियों में आने के लिए दाखिल की है । 

 

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