Wednesday, August 5, 2020

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चीन को ''दोस्त'' रूस से करारा झटका , मास्को से जारी आदेश में एस-400 मिसाइलों की आपूर्ति पर तत्काल रोक

अंग्वाल न्यूज डेस्क
चीन को

नई दिल्ली । भारतीय सेना और देशवासियों के लिए सोमवार का दिन दो अच्छी खबरें लेकर आया । पहली खबर आई कि फ्रांस ने भारत के साथ हुए रक्षा सौदे के तहत 5 राफेल विमानों को लेकर भारतीय पायलटों ने उड़ान भर ली है । 29 जुलाई को अंबाला एयरबेस पर भारतीय पायलट विमान लेकर आ जाएंगे । वहीं भारत के धुरविरोधी देशों में शुमार चीन को उसके कथित मित्र देश रूस ने ठेंगा दिखा दिया है । खबर है कि चीन की आशाओं से उलट रूस ने बीजिंग को दी जाने वाली एस- 400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की आपूर्ति पर तत्‍काल रोक लगा दी है । खास बात यह है कि इस मिसाइल को रोकने से पहले मास्‍को ने बीजिंग पर जासूसी करने का आरोप लगाया था। हालांकि इस सबके बीच चीन ने भी इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है । इस पूरे घटनाक्रम में एक खास बात यह है कि रूस ने चीन को भले ही मिसाइल की आपूर्ति पर तत्काल रोक लगा दी हो , लेकिन उसने भारत को वक्त पर मिसाइल देने का वादा दोहराया है।    

बता दें कि जहां फ्रांस ने भारत को 36 राफेल लड़ाकू विमानों के रक्षा सौदे के तहत 5 और विमान दे दिए हैं। वहीं चीन के मित्र देश रूस ने उसे झटका दिया है । असल में पिछले दिनों रूसी अधिकारियों ने अपने सेंट पीटर्सबर्ग आर्कटिक सोशल साइंसेज अकादमी के अध्यक्ष वालेरी मिट्को को चीन को गोपनीय सामग्री सौंपने का दोषी पाया है। इसके बाद मास्को ने बीजिंग पर जासूसी करवाने का भी आरोप लगाया था , जिसके बाद अब रूस ने बीजिंग को दी जाने वाली एस 400 मिसाइल की आपूर्ति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है । रूस के इस फैसले को चीन के जासूसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है । 

विदित हो कि रूस ने इन मिसाइलों की आपूर्ति को ऐसे समय में रोका है , जब चीन लगातार अपने पड़ोसी देशों के साथ गतिरोध बनाए हुए है । पूर्वी लद्दाख में चीनी सेनाओं के खूनी संघर्ष के बाद भारत के साथ उसके तनावपूर्ण रिश्‍ते हैं। हांगकांग और दक्षिण चीन सागर को लेकर वह अमेरिका व यूरोपीय देशों के साथ जापान, ऑस्‍टेलिया, वियतनाम, कंबोडिया, इंडोनेशिया से उसके रिश्‍ते तल्‍ख हो गए हैं। ऐसे में रूस का एस-400 मिसाइलों पर रोक लगाना चीन के लिए चिंता का विषय हो सकता है। रूस के इस कदम के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। 


रूस के इस फैसले के बाद चीन ने अपने बचाव में बयान जारी किया है । चीन ने सफाई देते हुए कहा है कि मास्को इस तरह का निर्णय लेने के लिए मजबूर है, क्योंकि वह चिंतित है कि इस समय एस-400 मिसाइलों का वितरण पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की महामारी विरोधी गतिविधियों को प्रभावित करेगा। चीन ने आगे कहा कि रूस नहीं चाहता कि इससे बीजिंग को कोई परेशानी हो। चीन का कहना है कि कई कारणों से रूस को मिसाइल देने के निर्णय को स्‍थगित करना पड़ा है। बीजिंग का कहना है कि इस प्रकार के हथियारों की डील एक जटिल प्रक्रिया है। इसके अलावा हथियारों को प्रयोग में लाने के लिए कर्मियों को प्रशिक्षण लेना पड़ता है। इसके लिए कर्मियों को रूस भेजना पड़ता, लेकिन कोरोना महामारी के दौर में यह काफी खतरनाक है। 

बता दें कि एस-400 मिसाइल सिस्टम, एस-300 का अपडेटेड वर्जन है। यह 400 किलोमीटर के दायरे में आने वाली मिसाइलों और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी खत्म कर देगा। एस-400 डिफेंस सिस्टम एक तरह से मिसाइल शील्ड का काम करेगा, जो पाकिस्तान और चीन की एटमी क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को सुरक्षा देगा। यह सिस्टम एक साथ एक बार में 72 मिसाइल दाग सकता है। यह सिस्टम अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट एफ-35 को भी गिरा सकता है।

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