Thursday, November 21, 2019

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कर्नाटक के बागी विधायक स्पीकर के फैसले के खिलाफ पहुंचे सुप्रीम कोर्ट , कहा -अपने दायित्व का पालन नहीं कर रहे

अंग्वाल न्यूज डेस्क
कर्नाटक के बागी विधायक स्पीकर के फैसले के खिलाफ पहुंचे सुप्रीम कोर्ट , कहा -अपने दायित्व का पालन नहीं कर रहे

बेंगलुरु । कर्नाटक की एचडी कुमार स्वामी सरकार पर आया सियासी संकट अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है । कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर  रमेश कुमार द्वारा कांग्रेस जेडीएस के इस्तीफा देने वाले 10 विधायकों के इस्तीफे पर अड़ंगा लगाया तो उक्त सभी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली है । कांग्रेस और जेडीएस के 10 बागी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है । इस्तीफा देने वाले विधायकों ने स्पीकर पर आरोप लगाए हैं कि वह अपने दायित्व का पालन नहीं कर रहे हैं । वहीं इस मामले में सुनवाई के दौरान बागी विधायकों की तरफ से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर के रवैये से अजीब परिस्थिति पैदा हो गई है । स्पीकर अपने दायित्य का पालन नहीं कर रहे हैं । वहीं कांग्रेस ने अपने 10 बागी विधायकों में से नौ को अयोग्य घोषित करने की मांग की । कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने कहा, "हमने अध्यक्ष केआर रमेश कुमार को दलबदल विरोधी कानून के तहत 9 बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए आवेदन दिया है । 

बता दें कि गत शुक्रवार को कांग्रेस जेडीएस के कुछ विधायकों ने अपना इस्तीफा दे दिया था । इस पर विधानसभा के स्पीकर के आर रमेश कुमार ने बागी विधायकों को लेकर सख्त रुख अख्तियार किया है । उन्होंने पार्टी से नाराज होकर इस्तीफा देने वाले कांग्रेस और जेडीएस के 13 विधायकों को स्पीकर ने मिलकर इस्तीफा देने के लिए कहा था । लेकिन जब कोई मिलने नहीं आता तो उन्होंने कहा कि  जिन 13 विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं उनमें से 8 के इस्‍तीफे कानून के मुताबिक नहीं हैं । ऐसा कहते हुए उन्होंने विधायकों को मिलने का समय दिया था । अब विधानसभा स्पीकर के इस रुख के खिलाफ बागी विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं । स्पीकर पर आरोप लगाए हैं कि वह अपने दायित्व का पालन नहीं कर रहे हैं । 

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विदित हो कि ऐसे समय में जब कर्नाटक की कुमार स्वामी सरकार पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, ऐसे समय में विधानसभा स्पीकर ने बागी विधायकों के रुख को लेकर राज्यपाल को पत्र लिखा है । वहीं स्पीकर रमेश कुमार ने पत्रकारों से कहा कि गवर्नर ने एक अन्‍य पत्र में मुझे सूचित किया कि निर्दलीय नागेश ने मंत्री पद छोड़ दिया है । मंत्री के मुद्दे पर मैं कुछ नहीं कर सकता । पता नहीं क्‍यों गवर्नर ने इस बारे में मुझे लिखा? ये तो निर्दलीय पर निर्भर करता है कि सदन में वह किसना समर्थन करते हैं । कांग्रेस ने कहा कि शंकर ने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय किया है । यदि यह नियमों के मुताबिक है तो कोई मुद्दा ही नहीं है । 

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उन्‍होंने कहा कि इस मुद्दे पर जांच की कोई जरूरत नहीं है ।  मेरे पास सभी दस्‍तावेज हैं , जिसमें साफ हुआ है कि बागी विधायकों ने विधिसम्‍मत ढंग से इस्‍तीफे नहीं दिए हैं । इस्तीफा देने वाले 13 विधायकों में से आठ ने नियमों के अनुरूप इस्तीफा नहीं दिया है । मैंने बाकी 5 को 12 से 15 जुलाई के बीच मिलने का वक्‍त दिया है । 

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हालांकि, पार्टी ने वरिष्ठ विधायक रामलिंगा रेड्डी को अयोग्य घोषित नहीं किया है, इसलिए उम्मीद है कि वह जल्द ही अपना इस्तीफा वापस ले लेंगे । वहीं पूर्व सीएम और कांग्रेसी नेता सिद्धारमैया ने राज्य सचिवालय में दो घंटे की लंबी बैठक के बाद कहा, "हम बागियों से आग्रह करते हैं कि वे अपना इस्तीफा वापस लें और पार्टी में रहें । सभी बागी पहले से सूचित किए जाने के बावजूद विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं हुए थे । इसके बाद सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि वे प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से दी गई लालच में फंसे हुए हैं और उन्हें पैसे के साथ मंत्री पद की पेशकश की गई है । 

सिद्धारमैया ने कहा, "भाजपा हमारी सरकार को उखाड़ फेंकने और सत्ता में लौटने के लिए एक साल में 5 बार कोशिश कर विफल रही और यह छठी बार फिर से विफल हो जाएगी ।  हमारे अधिकांश विधायक पार्टी के प्रति वफादार हैं और वे धोखा नहीं देंगे । 

 

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