Thursday, January 23, 2020

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निर्भया के गुनहगारों की फांसी फिर टली , 22 जनवरी को अब नहीं मिलेगी सजा-ए-मौत , ये है कारण

अंग्वाल न्यूज डेस्क
निर्भया के गुनहगारों की फांसी फिर टली , 22 जनवरी को अब नहीं मिलेगी सजा-ए-मौत , ये है कारण

नई दिल्ली । दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया गैंगरेप कांड में एक नया मोड आ गया है । निर्भया गैंगरेप के दोषी मुकेश कुमार की अर्जी पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई , जिसमें मुकेश ने डेथ वारंट पर रोक लगाने की मांग की है । फांसी की सजा पाने वाले मुकेश ने अपनी याचिका में कहा कि उसकी दया याचिका अभी राष्ट्रपति के पास लंबित है, इसलिए डेथ वारंट को रद्द कर दिया जाए । सुनवाई के दौरान दिल्ली एएसजी और दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि निर्भया के दोषियों को 22 जनवरी को फांसी नहीं दी जा सकती है । राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका पर फैसला देने के बाद दोषियों को 14 दिन का वक्त देना होगा । ऐसे में साफ हो गया है कि आगामी निर्धारित 22 जनवरी को इन दोषियों की फांसी की सजा नहीं होने जा रही है । वहीं मुकेश के अलावा अभी अन्य तीन दोषियों ने दया की याचिका दायर नहीं की है। 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने मंगलवार को मुकेश की क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी थी । 18 दिसंबर को तिहाड़ जेल अथॉरिटी ने सभी दोषियों को नोटिस जारी किया है , जिसमें कहा गया कि आप चाहें 7 दिन के अंदर दया याचिका दाखिल कर सकते हैं । वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान दो दोषियों की ओर से कहा गया कि उनके केस को सही पैरवी नहीं मिली है, इसलिए इस पर भी गौर किया जाना चाहिए । 

इस मामले में मुकेश की वकील रिबाका जॉन ने कहा कि 7 जनवरी को ट्रायल कोर्ट की ओर से पारित आदेश अभी तक तामिल नहीं हो सका है । अगर हम 18 दिसंबर के आदेश पर दया याचिका दायर करने के लिए 7 दिन का नोटिस देते तो 25 दिसंबर को यह समाप्त हो जाता , लेकिन एमिकस को दोषी से मिलने की अनुमति 30 तारीख को दी गई और दोषी ने तुरंत बताया कि वह एक क्यूरेटिव फाइल करने का इरादा रखता है । सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री से कागजात मिलने के बाद 2 दिन के अंदर क्यूरेटिव याचिका दाखिल की गई ।


क्यूरेटिव याचिका खारिज होने के बाद दया याचिका दायर करने के लिए हमने एक दिन भी इंतजार नहीं किया । मैं राष्ट्रपति से आवेदन पर विचार करने के लिए कह रही हूं । दया याचिका राष्ट्रपति का संवैधानिक कर्तव्य है और यह कोई अनुग्रह का काम नहीं है । 

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि आपकी अपील अप्रैल 2017 में खारिज कर दी गई थी । उस समय से अब तक ढाई साल गुजर चुके हैं । उनकी ओर से एक समीक्षा याचिका तक दर्ज नहीं हुई , न ही कोई क्यूरेटिव दाखिल हुई । आपको ये दाखिल करने से क्या रोका गया? कोर्ट ने कहा कि कोई डेथ वारंट जारी होने तक दया याचिका दायर करने का इंतजार क्यों करेगा । दोषी को कोर्ट जाने के लिए मुकम्मल वक्त दिया गया है । 

बहरहाल , इस सब के बाद एक बात तो साफ होती नजर आ रही है कि आने वाली 22 जनवरी को अब इन चारों को फांसी की सजा नहीं दी जाएगी । अब आने वाला समय ही बताएगा कि आखिर निर्भया के दोषियों को कब उनकी करनी की सजा मिलेगी । 

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