Friday, June 5, 2020

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पाकिस्तान में फिर तख्तापलट की सुगबुगाहट , आर्मी चीफ बाजवा गुपचुप व्यापारी नेताओं से मिल रहे , ब्रिगेड 111 में छुट्टियां रद्द

अंग्वाल न्यूज डेस्क
पाकिस्तान में फिर तख्तापलट की सुगबुगाहट , आर्मी चीफ बाजवा गुपचुप व्यापारी नेताओं से मिल रहे , ब्रिगेड 111 में छुट्टियां रद्द

नई दिल्‍ली । क्या पाकिस्तान की इमरान खान सरकार एक बार फिर से वहां की फौज की साजिश भी भेट चढ़ेगी । ...क्या पाकिस्तान में एक बार फिर से तख्तापलट होगा और सैन्य शासन चलेगा । पाकिस्तान के आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा के हाल में देश के दिग्गज व्यापारी नेताओं के साथ गुप्त बैठकों के बीच इस तरह की खबरें पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया में सुर्खियां बंटोर रही हैं । मिली जानकारी के अनुसार , पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी करांची और रावलपिंडी में स्थित सैन्य कार्यालय में ऐसी तीन बैठकें हो चुकी हैं । अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक , इन बैठकों में बाजवा ने कारोबारी नेताओं से पूछा कि अर्थव्यवस्था को कैसे सही रास्ते पर लाया जाए और किस तरह से पाक में विदेशी निवेश बढ़ाया जाए । इन बैठकों के बाद सरकारी अधिकारियों को जल्दबाजी में कई निर्देश भी जारी कर दिए गए । 

इस सब को लेकर दो घटनाक्रमों ने पाकिस्तान में शासन को लेकर एक नई सोच पैदा कर दी है । असल में पाकिस्‍तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा (Qamar Javed Bajwa) ने फौज की 111 ब्रिगेड में छुट्टियां रद्द कर दी हैं । वहीं जनरल बाजवा ने पाकिस्तान के बड़े कारोबारियों के साथ गुप्त बैठक की है । इन दोनों घटनाक्रम को देखते हुए पाकिस्तान में एक बार फिर तख्तापलट (Coup) की आशंका जताई जा रही है. ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्‍योंकि पाकिस्तान  में 111 बिग्रेड का ही इस्तेमाल हमेशा से तख्तापलट (Coup) करने में किया जाता रहा है । 

विदित हो कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा जम्‍मू-कश्‍मीर से आर्टिकल 370 (Article 370) हटाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है । इस सब के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में जिस तरह से इस मुद्दे को लेकर मुंह की खाई है , उससे पाकिस्तानी फौज अपनी सरकार से खुश नहीं है । विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान में विदेश नीति और खासकर कश्‍मीर मुद्दे पर सेना की भूमिका ही निर्णायक होती है । कश्‍मीर पर इमरान खान सरकार के अंतरराष्‍ट्रीय मोर्चे पर शिकस्‍त खाने और पाकिस्‍तान की बदहाल अर्थव्‍यवस्‍था के कारण माना जा रहा है कि पर्दे के पीछे अदृश्‍य शक्ति के रूप में रहने वाली सेना एक बार फिर सामने दिखने लगी है। 


बता दें कि पाकिस्तानी सेना की 111 ब्रिगेड रावलपिंडी में तैनात रहती है । यह पाकिस्तानी सेना के हेडक्वार्टर की गैरिसन ब्रिगेड है , जिसका इस्तेमाल इससे पहले सैन्य तख्तापलट की गतिविधियों में हुआ है । इसलिए इसे तख्तापलट ब्रिगेड (Coup Brigade) भी कहते हैं । पहली बार तख्तापलट के लिए इस ब्रिगेड का इस्तेमाल वर्ष 1958 में हुआ था. जब पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल अयूब ख़ान ने वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्ज़ा को उनके पद से हटा दिया था । इसके अलावा वर्ष 1969, 1977 और 1999 में भी तख्तापलट के लिए पाकिस्तानी सेना ने अपनी इसी Brigade का इस्तेमाल किया था। 

एक आंकड़े के मुताबिक पाकिस्तान की कुल ज़मीन का 12 प्रतिशत सेना के पास है । पाकिस्तान में सैन्य अफसरों को कौड़ियों के भाव ज़मीनें दे दी जाती हैं । इन जमीनों को वहां के सैन्य अफसर Market Rate पर बेचकर करोड़ों रुपये कमाते हैं । पाकिस्तान की कई बड़ी Petroleum कंपनियों के मालिक भी वहां की सेना ही है । इतना ही नहीं पाकिस्तान की सेना Askari Bank के नाम से एक प्राइवेट बैंक भी चलाती है और ये बैंक पाकिस्तान के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों में से एक है । ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि पाकिस्तानी की अर्थव्यवस्था की एक बड़ी कड़ी सेना से ही जुड़ी है ।   

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