Monday, February 17, 2020

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अब जमीन के नीचे नहीं बल्कि हवा में होगी आलू की खेती , बिना मिट्टी के कर सकेंगे 12 गुना ज्यादा पैदावार 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
अब जमीन के नीचे नहीं बल्कि हवा में होगी आलू की खेती , बिना मिट्टी के कर सकेंगे 12 गुना ज्यादा पैदावार 

नई दिल्ली । विज्ञान के इस युग में हर दिन कोई न कोई नया चमत्कार होता ही रहता है । बात आकाश की करें या पाताल की दिनों दिन नई खोज से दुनिया भर के वैज्ञानिक अपनी धरती और यहां रहने वाले लोगों के लिए कई लाभकारी अविष्कार करते आ रहे हैं। कुछ ऐसे ही अविष्कार इन दिनों खेती को लेकर भी जारी है। चलिए बात करते हैं ऐसी ही एक एरोपोनिक तकनीक की , जिसकी मदद से अब किसान आलू जमीन के नीचे न उगाकर , हवा में आलू की खेती कर सकेंगे । हरियाणा के करनाल जिले (Karnal) में स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र में इस तकनीक पर काम पूरा कर लिया है। अप्रैल 2020 तक किसानों के लिए बीज बनाने का काम भी शुरू हो जाएगा। इस तकनीक से हवा में आलू उगेंगे और पैदावार भी करीब 10 से 12 गुना ज्यादा होगी। इस एरोपोनिक तकनीक के जरिए जमीन की मदद लिए बिना हवा में ही फसल उगाई जा सकती है। बड़े-बड़े बॉक्स में आलू के पौधों को लटका दिया जाता है. जिसमें जरूरत के हिसाब से पानी और पोषक तत्व डाले जाते हैं ।

बता दें कि करनाल के शामगढ़ गांव में स्थित आलू प्रोद्योगिकी केंद्र का इंटरनेशनल पोटेटो सेंटर के साथ एमओयू साइन हुआ है । इसके बाद भारत सरकार द्वारा एरोपोनिक तकनीक के प्रोजेक्ट को अनुमति मिल गई है । आलू का बीज उत्पादन करने के लिए आमतौर पर हम ग्रीन हाउस तकनीक का इस्तेमाल करते थे, जिसमें पैदावार काफी कम आती थी। 


बहरहाल , अब एरोपोनिक तकनीक से आलू का उत्पादन किया जाएगा , जिसमें बिना मिट्टी, बिना जमीन के आलू पैदा होंगे । इसमें एक पौधा 40 से 60 छोटे आलू देगा, जबकि पूर्व की ग्रिन हाउस वाली तकनीक से एक पौधे से पांच आलू ही निकलते थे । लेकिन एरोपोनिक तकनीक से तैयार हुए पौधे को खेत में बीज के तौर पर रोपित किया जा सकेगा । इस तकनीक से करीब 10 से 12 गुना पैदावार बढ़ जाएगी।

चलिए आपको बताते हैं कि आखिर यह एरोपोनिक तकनीक है क्या । इस तकनीक में मिट्टी की जरूरत नहीं पड़ती. बड़े-बड़े प्लास्टिक और थर्माकोल के बॉक्स में आलू के माइक्रोप्लांट डाले जाते हैं । बाद में थोड़े थोड़ समय में इनमें पोषक तत्व डाले जाते हैं, जिससे जिससे जड़ों का विकास होता है और कुछ समय बाद आलू के छोटे-छोटे ट्यूबर बनने शुरू हो जाते हैं । इस दौरान आलू के पौधों को सभी न्यूट्रिएंट दिए जाते हैं, जिससे पैदावार अच्छी होती है । 

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