Friday, August 23, 2019

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एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा एयर स्ट्राइक के 'हीरो' , कारगिल युद्ध में भी निभाई थी अहम भूमिका

अंग्वाल संवाददाता
एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा एयर स्ट्राइक के

नई दिल्ली । भारतीय वायुसेना के इतिहास में 26 फरवरी का दिन एक बड़ी सफलता के रूप में दर्ज हो जाएगा। वायुसेना के मिराज-2000 विमानों ने पाकिस्तान में घुसकर वहां मौजूद आतंकी ठिकानों को न केवल ध्वस्त किया, बल्कि दुश्मन देश की कार्रवाई के लिए तैयार होने से पहले अपने 'सर्जिकल स्ट्राइक-2' को अंजाम भी दे डाला। भारतीय वायुसेना के इस अदम्य साहसिक ऑपरेशन पर देश गर्व महसूस कर रहे हैं, लेकिन इस सब के बीच आपका बता दें कि इस ऐतिहासिक ऑपरेशन के असली हीरो में से एक हैं एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा । इनके नेतृत्व में ही मंगलवार सुबह 12 मिराज विमानों ने पाकिस्तान में 40 किमी अंदर धुसकर जैश ए मोहम्मद के सबसे बड़े कैंप और लॉंचिंग पैड को ध्वस्त किया, जबकि खबरें हैं कि इस एयर स्ट्राइक में 200 से ज्यादा आतंकियों के मारे जाने की खबरें आ रही हैं। बहरहाल, आपको बता दें कि एयर चीफ मार्शल ने देश को ऐसे ऐतिहासिक पल देने का पहला मौका नहीं दिया है बल्कि कारगिल युद्ध के दौरान भी उन्होंने खुद लड़ाकू विमान में सवाल होकर पाकिस्तान के छक्के छुड़ाए थे।

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जानिए देश के इस हीरो को...

बता दें कि 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान बीरेंद्र सिंह धनोवा अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर थे। करगिल युद्ध के समय उनके नेतृत्व में स्क्वाड्रन ने ऊंचे इलाकों में रात में बमबारी के नए तरीकों का उपयोग किया था। इससे पहले कभी इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। उनके स्क्वाड्रन को मुख्यालय डब्ल्यूएसी के सर्वश्रेष्ठ लड़ाकू स्क्वाड्रन के रूप में चुना गया था । इतना ही नहीं उन्हें इस संघर्ष में अपने वीर कार्यों के लिए युद्ध सेवा मेडल (वाईएसएम) और वायु सेना मेडल (वीएम) से सम्मानित किया गया। 17 दिसंबर 2016 को, भारत सरकार ने एयर मार्शल बीरेंद्र सिंह धनोआ को भारतीय वायु सेना के नए प्रमुख के रूप में नियुक्त किया था।

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पंजाब में जन्मे धनोवा IAS अफसर के पुत्र

पंजाब में पैदा हुए ( घरुआन गांव ) धनोवा के पित सारायण सिंह एक IAS अधिकारी थे, जिन्होंने  80 के दशक के दौरान पंजाब सरकार और बिहार सरकार के मुख्य सचिव के रूप में सेवाएं दी। इसके बाद उन्हें पंजाब राज्य के गवर्नर के सलाहकार के रूप में काम किया। उनके दादा कैप्टन संत सिंह ने ब्रिटिश भारतीय सेना के कप्तान के रूप में द्वितीय विश्व युद्ध में लड़ा था। वह भारतीय राष्ट्रीय सैन्य महाविद्यालय, देहरादून के पूर्व छात्र हैं और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से स्नातक थे। उन्होंने 1992 में वेलिंगटन में रक्षा सेवाओं के स्टाफ कॉलेज में एक स्टाफ कोर्स भी किया है।


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जून 78 में वायु सेना के लड़ाकू दल में शामिल

असल में धनोआ को भारतीय वायु सेना के लड़ाकू दल में जून 1978 में चुना गया था। उन्होंने विभिन्न प्रकार के लड़ाकू जेट विमानों को उड़ाया है । वे एक योग्य उड़ान प्रशिक्षक है। उन्होंने एचजेटी -16 किरण, मिग -21, एसईपीईसीएटी जगुआर, मिग-29 और सुखोई-30 एमकेआई सहित स्पेक्ट्रम में लड़ाकू विमान उड़ाए हैं।

इन पदकों से किया सम्मानित

इसी क्रम में बता दें कि एयर चीफ मार्शल धनोआ को उनकी सेवाओं के लिए कई पदकों से भी सम्मानित किया गया है। उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (2016), अति विशिष्ट सेवा पदक (2015), युद्ध सेवा मेडल (1 999), और वायु सेना मेडल (1 999)। 1 अगस्त, 2015 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा उन्हें मानद एडीसी भी नियुक्त किया गया था।

 

 

 

 

 

 

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