Thursday, December 1, 2022

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खड़गे के सिर ''काटों '' भरा ताज , बड़ा सवाल...क्या आंतरिक गतिरोध खत्म कर पाएंगे नए कांग्रेस अध्यक्ष

दीपक गौड़
खड़गे के सिर

नई दिल्ली । कांग्रेस को आखिरकार 24 सालों बाद गांधी परिवार के बाहर से कोई ऐसा नेता मिल गया है , जो अब पार्टी की कमान संभालेगा । पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के गत 17 अक्टूबर को हुए चुनावों में अपने प्रतिद्वंदी शशि थरूर को 7 हजार से ज्यादा मतों से हरा दिया है । इसके साथ कांग्रेस में नए युग की शुरुआत होगी , इसे अभी खड़गे युग कहा जा रहा है , लेकिन इस बात में भी कोई दोराय नहीं है कि खड़गे के सिर आया ताज ''कांटों से भरा'' होगा । इस समय पार्टी में काफी गतिरोध है । पिछले कुछ समय में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता,  गांधी परिवार से इतर कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की मांग करते हुए G-23 गुट बना बैठे । कई राज्यों में पार्टी आंतरिक गतिरोध के चलते बुरे दौर से गुजर रही है । लगातार पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस का हाथ'' छोड़कर कहीं भाजपा का दामन थामe तो कई ने किसी दूसरी पार्टी को । ऐसे में आने वाला समय में खड़गे के लिए राहें कांटों भरी ही रहेंगी ।    

 

पहले जानें कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को

- बता दें कि 80 वर्षीय मल्लिकार्जुन खड़गे कई दशकों से कांग्रेस से जुड़े हैं , वर्तमान समय में वह गांधी परिवार के बहुत करीबी हैं और पार्टी के भी काफी वरिष्ठ नेता हैं ।

-  खड़गे कर्नाटक के बीदर से आते हैं. उन्होंने बीए और एलएलबी की पढ़ाई की है और पेशे से वकील भी रह चुके हैं । 

- खड़गे सबसे पहले 1969 में कर्नाटक के गुलबर्ग सिटी कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे । 

- इसके बाद 1972 में पहली बार चुनकर विधानसभा गए. तब से लेकर 2009 तक वो कुल 9 बार विधायक रहे । 

- 1976 में वो पहली बार कर्नाटक में कैबिनेट मंत्री बने । 

-  खड़गे को 1988 में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया । 

- 2005 में वो कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने. इसके बाद वो तमाम बड़े पदों पर रहे ।

 


गांधी परिवार के बहुत करीबी हैं खड़गे

असल में जब से कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हुई थी , जब से लेकर चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख के दो दिन पहले तक खड़गे का नाम तक नहीं लिया जा रहा था । लेकिन अंदरखाने कुछ ओर ही पक रहा था । गांधी परिवार के बेहद करीबी माने जाने वाले खड़गे अंतिम समय में चुनाव मैदान में कूदते हैं और आज वह चुनाव जीतकर पार्टी के नए अध्यक्ष बन गए हैं । कांग्रेस के ही कुछ नेता और दूसरे दलों के नेताओं का कहना है कि भले ही खड़गे नए अध्यक्ष बन गए हों , लेकिन आज भी गांधी परिवार ही पार्टी को चलाएगा । इसके लिए पिछले दिनों सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने खड़गे पक्ष में वोट पड़ें इसके लिए अंदर खाने बातें की हैं । 

कई चुनौतियों का करना पड़ेगा सामना 

असल में कांग्रेस पिछले कुछ सालों में आंतरिक गतिरोध के चलते ज्यादा सुर्खियों में रही है । मध्य प्रदेश , राजस्थान , पंजाब , गोवा , उत्तराखंड , जम्मू कश्मीर , हिमाचल प्रदेश समेत ऐसे कई राज्य हैं , जहां प्रदेश कांग्रेस में नेताओं के बीच आपसी गतिरोध खुलकर सामने आए । इसके चलते न केवल पार्टी हल्की पड़ी , बल्कि इन दलों के कई दिग्गज नेता नाराज होकर भाजपा समेत कई अन्य दलों के साथ जा खड़े हुए । इतना ही नहीं पार्टी के कई दिग्गज नेता पार्टी का नेतृत्व बदले जाने की मांग को लेकर सोनिया गांधी के खिलाफ खड़ा हो गया , जिसे जी 23 गुट भी कहा जाता है , ये दिग्गज नेता भी कांग्रेस से अलग हो गए हैं । अब इन सबकों साथ लाने , पार्टी के भीतर जारी गतिरोध को खत्म करने और आने वाले चुनावों में पार्टी के दमदार प्रदर्शन जैसे कई मुद्दे पर खड़गे को एकसाथ काम करना होगा , जो उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी । 

गुजरात - हिमाचल में हैं चुनाव

इस बीच आने वाले महीनों में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं । इन चुनावों में अभी तक आलम यह है कि हिमाचल प्रदेश में अभी तक जहां पार्टी अपनी कोई रणनीति तक नहीं बना पाई है , वहीं गुजरात में आम आदमी पार्टी कांग्रेस से ज्यादा सुर्खियों में आ गई है । ऐसे में आने वाले दिनों में खड़गे के आगे दोनों राज्यों के लिए मजबूत रणनीति और सभी नेताओं को खुश रखने के लिए भी एक प्लान बनाने की जरूरत होगी । 

बदलने लगे पार्टी नेताओं के सुर

खड़गे के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी में अपनी भूमिका पर बात करते हुए कहा, 'मैं कांग्रेस अध्यक्ष की भूमिका पर टिप्पणी नहीं कर सकता । यह मल्लिकार्जुन खड़गे तय करेंगे कि मेरी भूमिका क्या रहेगी ।

 

वहीं चुनाव हारने के बाद शशि थरूर के भी सुर बदले । वह बोले -  पार्टी का अध्यक्ष बनना एक बड़े सम्मान वाली बात है साथ ही एक बड़ी जिम्मेदारी है । मैं चाहता हूं खड़गे को इसमें सफलता मिले। एक हजार से अधिक सहयोगियों का समर्थन प्राप्त करना, और पूरे भारत में कांग्रेस के इतने शुभचिंतकों की आशाओं और आकांक्षाओं को आगे बढ़ाना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी । इसी क्रम में राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन सचिन पायलट ने मल्लिकार्जुन खड़गे की जीत पर कहा कि, 90 प्रतिशत वोट खड़गे के पक्ष में पड़े हैं । सही मायनों में ये लोकतंत्र जी जीत है । वहीं, आने वाली समस्याओं का सामना हम मिलकर करेंगे ।  

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