Thursday, July 2, 2020

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ये हैं वो शख्स , जिनसे पूछे बिना सोनिया गांधी नहीं लेती कोई फैसला , ''मिशन महाराष्ट्र'' के लिए इन्हें भेजा था मुंबई

अंग्वाल न्यूज डेस्क
ये हैं वो शख्स , जिनसे पूछे बिना सोनिया गांधी नहीं लेती कोई फैसला ,

नई दिल्ली । यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार के दौरान कांग्रेस के ''थिंक टैंक '' और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के सबसे करीबी नेताओं में शुमार अहमद पटेल एक बार पार्टी को उबारने के लिए कांग्रेस का ''तुरुप का इक्का' बनकर सामने आए हैं । महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के साथ गठबंधन करके सरकार बनाने की जो जुगत इस समय जारी है , उसमें सोनिया गांधी ने पार्टी की ओर से अपने इस सबसे भरोसेमंद शख्स को बड़ी जिम्मेदारी दी है । अब से कुछ देर पहले अहमद पटेल मुंबई से लौटकर सोनिया गांधी को पूरी वस्तुस्थिति से अवगत कराने के लिए उनके घर पहुंचे हैं । वह इस समय कांग्रेस के लिए फिर से एक मंझे हुए रणनीतिकार की भूमिका निभा रहे हैं, जैसी उन्होंने मनमोहन सरकार के 2 कार्यकाल के दौरान निभाई थी । लेकिन ये अहमद पटेल कौन हैं और कैसे सोनिया गांधी के इतने करीबी हो गए, इस बार में चलिए हम आपको बताते हैं । 

सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार रहे अहमद पटेल न केवल उनके सलाहकारों के रूप में पार्टी में हैं , बल्कि वह एक कुशल रणनीतिकार भी कहे जाते हैं । बता दें कि अहमद पटेल 2017 में लगातार 5वीं बार राज्यसभा पहुंचे हैं । पटेल 1977 में 26 साल की उम्र में भरुच से लोकसभा चुनाव जीतकर तब के सबसे युवा सांसद बने थे । 

इसके बाद 1993 से लगातार वह राज्यसभा सदस्य हैं । अहमद पटेल पर्दे के पीछे की राजनीति में भरोसा करते रहे हैं , इसलिए राजनीति में रुचि रखने वाले लोग कांग्रेस के इस दिग्गज के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते हैं । चलिए इनके राजनीति सफरनामे पर एक नजर डालते हैं...

- अहमद पटेल 1977 से 1982 तक गुजरात की यूथ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे ।

- सितंबर 1983 से दिसंबर 1984 तक वो ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जॉइंट सेक्रेटरी रहे । 

-1985 में जनवरी से सितंबर तक वो प्रधानमंत्री राजीव गांधी के संसदीय सचिव रहे । 


-सितंबर 1985 से जनवरी 1986 तक पटेल ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी रहे।

-जनवरी 1986 में गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष बने और अक्टूबर 1988 तक इस पद पर रहे। 

- 1991 में नरसिम्हा राव के पीएम बनने के दौरान पटेल को कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य बनाया गया । 

-1996 में उन्हें ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था। यह वह समय था जब सीताराम केसरी पार्टी के अधय्क्ष हुआ करते थे । 

- वर्ष 2000 में उनकी भूमिका थोड़ी बदली , जब सोनिया गांधी का अपने निजी सचिव वी जॉर्ज से मनमुटाव हुआ । उनके अपना पद छोड़ने के बाद 2001 में अहमत पटेल सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार बन गए । 

- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को 2004 में गिराकर यूपीए की सरकार बनाने में उनका अहम योगदार माना जाता है ।

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