Monday, July 13, 2020

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निर्भया के गुनहगारों को हाथ-पैरों में प्लास्टर लगा होने के बावजूद फांसी लगाई जाएगी - कानून के जानकार

अंग्वाल न्यूज डेस्क
निर्भया के गुनहगारों को हाथ-पैरों में प्लास्टर लगा होने के बावजूद फांसी लगाई जाएगी - कानून के जानकार

नई दिल्ली । निर्भया गैंगरेप कांड के चारों दोषियों को आगामी 3 मार्च को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दिए जाने का डेथ वारंट जारी हो चुका है । चारों को एक साथ फांसी दिए जाने की तैयारी जारी है । लेकिन इस सब के बीच दोषी अपनी सजा से बचने के लिए हर साजिश रच रहे हैं । पिछले दिनों दोषियों में से एक विनय ने फांसी की सजा से बचने के लिए अपने सिर को दीवार पर मारकर चोटिल कर लिया था । ऐसा कहा जा रहा है कि उसे इस बात के बारे में जानकारी दी गई थी कि अगर वह घायल हो जाता है तो उसकी 3 मार्च को होने वाली फांसी टल जाएगी । लेकिन बताने वालों ने उसे जेल मैन्यूवल के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी ।

कानून के जानकारों का कहना है कि महज दो स्थिति में ही फांसी को रोका जाता है , अगर फांसी की सजा पाने वाले शख्स किसी जानलेवा बीमारी से ग्रसित हो या वह मानसिक रूप से गंभीर बीमार हो जाए । इस सब के बीच अगर निर्भया के चारों गुनहगारों द्वारा खुद को घायल करने की साजिश रची जाती है और उनके हाथ पैर टूटते हैं तो प्लास्टर लगे होने के बावजूद उन्हें फांसी पर लटकाया जाएगा । 

बता दें कि निर्भया के चारों गुनहगारों के लिए तीसरा डेथ वारंट जारी हो चुका है , जिसके तहत चारों को 3 मार्च की सुबह 6 बजे एकसाथ फांसी पर लटकाया जाएगा। हालांकि दोषी अपनी इस सजा से बचने के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं । पिछले दिनों आरोपी विनय ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है कि वह मानसिक रूप से बीमार है ऐसे में उसे फांसी नहीं हो सकती । इतना ही नहीं दोषी की ओर से चुनाव आयोग को एक पत्र लिखकर कहा है कि जिस समय दिल्ली सरकार की ओर से सतेंद्र जैन ने दया याचिका को खारिज किया था उस समय वह मंत्री थे ही नहीं । उस दौरान दिल्ली विधानसभा चुनाव थे और वह याचिका को खारिज कर ही नहीं सकते । 


बहरहाल , आरोपी खुद को बचाने के लिए अपनी हर जुगत लगा रहे हैं । हालांकि यह भी तय है कि अब केवल एक दोषी पवन के पास ही क्यूरेटिव पीटिशन के साथ दया याचिका लगाने का विकल्प बाकी है। अगर उसकी ओर से ऐसी कोई याचिका लगाई जाती है तो देखना होगा कि क्या एक बार फिर से डेथ वारंट रद्द किया जाएगा । 

हालांकि जेल सूत्रों का कहना है कि चारों दोषी गत 17 फरवरी के बाद से सहम गए हैं । चारों न तो अब ठीक से खाना खा रहे हैं और बदहवाश से नजर आ रहे हैं । पवन को छोड़कर तीनों दोषियों को रोते हुए भी देखा गया है । हालांकि मनोचिकित्सक लगातार इनसे बात कर रहे हैं । 

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