Saturday, September 26, 2020

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बच्चों के लिए आफत न बन जाए ऑनलाइन क्लास , डॉक्टरों ने मेंटल -फिजिकल हेल्थ के लिए बताया खतरा

अंग्वाल न्यूज डेस्क
बच्चों के लिए आफत न बन जाए ऑनलाइन क्लास , डॉक्टरों ने मेंटल -फिजिकल हेल्थ के लिए बताया खतरा

 नई दिल्ली । कोरोना काल ने लोगों पर व्यापक असर डाला है । जहां देश दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समयावधि में चौपट होती नजर आ रही है , वहीं लोगों की शारीरिक और मानसिक स्थितियां भी इस दौरान बहुत प्रभावित हुई हैं । इस दौरान जहां लोगों की काम करने की क्षमताओं पर असर पड़ा है , वहीं लोग मानसिक विकारों से भी ग्रसित हो रहे हैं । ऐसे हालात में छात्रों के लिए ऑनलाइन होने वाली क्लासें भी कम घातक नहीं है । डॉक्टरों की मानें तो कई घंटों तक कंप्यूटर के सामने बैठकर ऑनलाइन क्लास उनकी सेहत को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है । जहां बच्चों को इस सबके चलते सर्वाइकल की समस्या हो सकती है , वहीं इन बच्चों को आंखों का स्ट्रेस , मानसिक समस्याएं और चिड़चिड़ापन की समस्या हो सकती है । इन्हीं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय ने डिजिटल एजुकेशन को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किया है ।

मंत्रालय के नए दिशानिर्दे्श के मुताबिक प्री-प्राइमरी में पढ़ने वाले बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास का समय 30 मिनट से ज्यादा न हो। अगर बात क्लास 1 से 8वीं तक के छात्रों की करें तो उनके लिए दो ऑनलाइन सेशन होने चाहिए । इस दौरान एक सेशन 45 मिनट का होगा। वहीं क्लास 9 से 12 के लिए 30-45 मिनट के 4 सेशन होंगे । एचआरडी मंत्रालय ने नई गाइडलाइन के जरिए बच्चों के फिजिकल और मेंटल हेल्थ दोनों का ध्यान रखने की कोशिश की है ।

इससे इतर , ऑनलाइन क्लास ने बच्चों की मेंटर के साथ फिजिकल हेल्थ को भी बुरी तरह प्रभावित किया है । मेट्रो अस्पताल के फिजियो हैड डॉक्टर दिनेश समुझ के अनुसार ,ऑनलाइन क्लासों के लिए मंत्रालय की ओर से गाइडलाइन तो जारी कर दी गई है , लेकिन परिजनों को इस दौरान ध्यान रखना होगा । बच्चों के लिए लगातार कंप्यूटर के सामने लंबे समय तक बैठना ठीक नहीं है । 

डॉक्टर दिनेश समुझ के अनुसार , पिछले 4 महीने के लॉकडाउन के दौरान बच्चों ने खेल कूद के साथ ही अपनी शारीरिक गतिविधियों को लगभग बंद ही कर दिया है । वहीं इस डिजिटल युग में जहां परिजन पहले से ही अपने बच्चों के गैजेट से चिपके रहने से परेशान थे , ऐसे में कोरोना काल ने उन्हें गैजेट से चिपके रहने का एक और मौका दे दिया है । इस सबके बीच अब पढ़ाई भी कंप्यूटर पर होना बच्चों के लिए काफी परेशानी भरा हो सकता है । 

उन्होंने कहा कि भारत में कई जगहों पर लोगों को इंटरनेट की अच्छी स्पीड नहीं मिलने का सामना करना पड़ता है । ऐसे में उन्हें ऑनलाइन क्लास के दौरान वीडियो और ऑडियो की खराब गुणवत्ता का सामना करना पड़ रहा है । ऐसे में उन्हें अनावश्यक रूप से ज्यादा ध्यान लगाकर बातें सुननी पड़ी रही हैं । वहीं अगर वो लीड लगाकर सुनते हैं तो उन्हें बात में परेशानी होती है । 


भारत में सभी लोग ऑनलाइन क्लास के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। न ही भारत के सभी घरों में बच्चों के लिए स्टडी रूम होता है । ऐसे में बच्चों को या तो परिजनों के बीच में रहते हुए ही अपनी पढ़ाई करनी होती है , या बैड- सोफा- या किसी ऐसी जगह बैठकर क्लास ज्वाइन करनी पड़ती है , जहां लंबे समय तक बैठकर पढ़ना उनके लिए काफी कष्टदायी होता है । 

असल में बच्चों के इन ऑनलाइन क्लास के दौरान , न तो वह सही से बैठ पाते हैं और न ही उनका स्कीन को देखने का तरीका सही होता है । इससे जहां उन्हें गर्दन कंधों में दर्द की परेशानी हो सकती है। वहीं कुछ बच्चों को कमर में दर्द संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है । इतना ही नहीं बच्चों के सही तरह से बैठकर नहीं पढ़ने से उनकी रीढ़ की हड्डी के जोड़ों और डिस्क में समस्या आ सकती है । मोटापे से ग्रसित बच्चों के लिए यह समस्या और गंभीर हो सकती है। 

डॉक्टर समुझ का कहना है कि देश में अधिकांश परिजनों को इस बात का पता नहीं है कि पढ़ने के लिए टेबल और कुर्सी को कितनी ऊंचाई पर होना चाहिए । कंप्यूटर स्क्रीन का आकार कितना होना चाहिए तो आंखों के लिए नुकसान दायक और पीड़ादायक न हो । इतना ही नहीं कुछ छात्र ऑनलाइन क्लास में बहुत अच्छे तरीके से पढ़ नहीं पाते , जिससे उन्हें मानसिक तनाव भी होता है । वहीं शुरुआती दिनों में तो इस तरह से पढ़ना अच्छा लगता है लेकिन इस दौरान होने वाली आफतों के चलते बच्चे जल्द परेशान होने लगते हैं। 

ऐसे में परिजनों को चाहिए कि वो बच्चों को सोफा- बैड या किसी भी ऐसे स्थान पर ऑनलाइन क्लास के लिए न बैठने न दें , जिससे उसे परेशानी हो । उनके बैठने के लिए उचित प्रबंध करें , ताकि ये क्लासें उन्हें शारीरिक कष्ट न दें । वहीं बच्चों की क्लास के बाद उन्हें आने वाली परेशानियों के बारे में बात करें और जहां तक संभव हो उन समस्याओं को दूर करें । 

अगर संभव हो तो बीच बीच में छोटे बच्चों की ऑनलाइन क्लास छुड़वाई भी जा सकती है , जिसे आप बाद में खुद पढ़ा दें। 

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