Wednesday, September 23, 2020

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - शून्य से शिखर तक सफर तय करती एक शख्सियत , जानें वडनगर से पीएम आवास का सफरनामा

अंग्वाल न्यूज डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - शून्य से शिखर तक सफर तय करती एक शख्सियत , जानें वडनगर से पीएम आवास का सफरनामा

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 70वर्ष  के हो गए । उनके जन्मदिन पर उन्हें जहां देश भर के नेताओं , आम जनता , सेलेब्स की ओर से बधाई संदेश मिल रहे हैं , दुनिया की महाशक्तियों के कई दिग्गज नेता भी अपने बधाई संदेश दे रहे हैं । असल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के सामने एक ऐसी शख्सियत बनकर उभरे हैं , जिन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है । यह उनके काम और उनके राष्ट्र के प्रति समर्पण का ही प्रतिफल है कि देश में आज की राजनीतिक को ''मोदी युग'' के नाम से जाना जा रहा है । 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्में मोदी भले ही आज देश और दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में शुमार हो गए हों , लेकिन एक समय था जब उन्होंने अपना जीवन बहुत निर्धनता के बीच गुजारा । असल में पीएम मोदी बचपन से ही देश सेवा करना चाहते थे, इसके लिए वह सेना में भी शामिल होने का सपना देखते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था । 

गरीबी से संघर्ष करते हुए पीएम मोदी का पूरा परिवार वडनगर के एक छोटे से घर में रहता था। उनके पिता स्थानीय रेलवे स्टेशन पर एक चाय के स्टाल पर चाय बेचते थे । शुरुआती दिनों में मोदी भी पिता के साथ स्टेशन पर चाय बेचने का काम करते थे । हालांकि इस सबके साथ ही मोदी एक होनहार छात्र भी थे । 

वडनगर के भगवताचार्य नारायणाचार्य स्कूल में पढ़ने के दौरान उन्हें एक मेहनती छात्र के रूप में जाना जाता था ।  वह स्कूल के दिनों से ही तर्क वितर्क करने में माहिर थे । वह काफी समय पुस्तकालय में बिताते थे । 

बचपन में पीएम मोदी का सपना भारतीय सेना में जाकर देश की सेवा करने का था, हालांकि उनके परिजन उनके इस विचार के सख्त खिलाफ थे ।  नरेन्द्र मोदी जामनगर के समीप स्थित सैनिक स्कूल में पढ़ने के बेहद इच्छुक थे, लेकिन जब फीस चुकाने की बात आई तो घर पर पैसों का घोर अभाव सामने आ गया. नरेंद्र मोदी बेहद दुखी हुए । 

इस सबके बीच बचपन में ही वह संघ की तरफ झुकते चले गए । गुजरात में आरएसएस का मजबूत आधार भी था । वह 1967 में 17 साल की उम्र में अहमदाबाद पहुंचे और उसी साल उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ली। इसके बाद 1974 में वे नव निर्माण आंदोलन में शामिल हुए । इस तरह सक्रिय राजनीति में आने से पहले मोदी कई वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे । 

80 के दशक में वह गुजरात की भाजपा ईकाई में शामिल हुए।  1988-89 में वह भाजपा की गुजरात ईकाई के महासचिव बने । इसके बाद उन्होंने आडवाणी की 1990 की सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा के आयोजन में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद उनकी कार्यक्षमता और नेतृत्वक्षमता को समझते हुए पार्टी ने उन्हें कई राज्यों का प्रभारी भी बनाया । 


वर्ष 1995 में उन्हें पार्टी ने और ज्यादा जिम्मेदारी देते हुए राष्ट्रीय सचिव और पांच राज्यों का पार्टी प्रभारी बना दिया । वर्ष 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) बनाया जो अक्‍टूबर 2001 तक बना रहा । इस बीच गुजरात में केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद एकाएक उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई । 

हालांकि उनके लिए पद संभालने के कुछ ही माह बाद गुजरात में गोधरा कांड हो गया , जिसने कई हिंदू कारसेवक मारे गए । इसके बाद फरवरी 2002 में ही गुजरात में मुसलमानों के खिलाफ़ दंगे भड़के , जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए ।  मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम इन दंगों में खींचा गया और उन्हें दंगा भड़काने का आरोपी बनाया गया । 

उस दौरान उन्हें सीएम पद से हटाने की मुहिम तेज हुई लेकिन आडवाणी उनके समर्थन में आए और वह पद पर बरकरार रहे । हालांकि इसके बाद उनकी गुजरात में लोकप्रियता इस कदर बढ़ी की उन्होंने गुजरात की सूरत ही बदल दी । दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनावों में पीएम मोदी ने जीत दर्ज की थी । इसके बाद 2007 के विधानसभा चुनावों में और फिर 2012 में भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी गुजरात विधानसभा चुनावों में जीती । 

जब 2012 में लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की, तब तक ये माना जाने लगा था कि अब मोदी राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करेंगे ।  ऐसा ही हुआ भी जब मार्च 2013 में नरेंद्र मोदी को भाजपा संसदीय बोर्ड में नियुक्त किया गया । उस दौरान वह अकेले मुख्यमंत्री थे , जिसे इस बोर्ड में शामिल किया गया था । 

इसके बाद साल 2014 में नरेंद्र मोदी को भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाकर पेश किया और उसके बाद से भाजपा का गणित ही बदल गया । उनके केंद्र की राजनीति में आने के साथ ही देश में मोदी युग की शुरुआत हुई ।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई । भाजपा ने अकेले दम पर 282 सीटों पर जीत दर्ज की । इसके बाद वह एक बार फिर से 2019 में लोकसभा चुनावों में उतरे और दोबारा प्रचंड जीत के साथ सरकार बनाने में कामयाब हुए । अपने कार्यकाल में मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार से जुड़ा कोई आरोप नहीं लगा है । इतना ही नहीं उन्होंने अपने इस दूसरे कार्यकाल में जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने समेत कई ऐसे काम किए हैं , जिनके लिए उन्हें देश के सर्वक्षेष्ठ नेताओं में शीर्ष पर रखा जाएगा । 

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