Wednesday, September 23, 2020

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BCCI में होगी नए युग की शुरुआत , गांगुली के अध्यक्ष बनने के बाद शास्त्री - कोहली की 'दबंगई' होगी खत्म

अंग्वाल संवाददाता
BCCI में होगी नए युग की शुरुआत , गांगुली के अध्यक्ष बनने के बाद शास्त्री - कोहली की

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट में नए युग की शुरुआत लाने के सूत्रधार माने जाने वाले टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का  भारतीय किक्रेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) का नया अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है । इस पद के लिए नामांकन करने के लइए वह मुंबई में हैं और तमात समीकरण ऐसे संकेत दे रहे हैं कि उनका बीसीसीआई अध्यक्ष पद चुना जाना तय है । हालांकि उनके अध्यक्ष बनने के बाद बीसीसीआई में भी नए युग की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है । हालांकि उनका अध्यक्ष बनना वर्तमान में टीम के हैड कोच रवि शास्त्री को चुभ सकता है । शास्त्री उन लोगों में शुमार हैं , जिन्होंने 2016 में हैड कोच  के लिए हुए उनके इंटरव्यू के दौरान सौरव गांगुली की अनुपस्थिति पर जहर उगलते हुए कहा कि गांगुली उन्हें हेड कोच नहीं बनने देना चाहते थे । गांगुली उस दौरान उस क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) का हिस्सा थे जिसने 2016 में रवि शास्त्री की बजाय अनिल कुंबले को टीम इंडिया के कोच के रूप में चुना था । इसके बाद दोनों के बीच विवाद और गहरा गया था । बहरहाल, गांगुली के अध्यक्ष बनने के बाद शास्त्री और कोहली के एक तरफाफैसलों पर लगाम लगना तय है।

विदित हो कि  CAC  में रहते गांगुली शास्त्री को कोच के लिए नहीं चुनना चाहते थे। वहीं, एक बार एक टॉक शो में भी शास्त्री ने गांगुली के बारे में एक विवादित बयान दिया था। दोनों के बीच में तल्खी किसी से भी छुपी नहीं थी। अब जब गांगुली BCCI अध्यक्ष बनने जा रहे हैं तो शास्त्री के लिए यह समय आसान नहीं होगा ।

असल में शास्त्री और गांगुली के बीच गतिरोध की खबरें 2007 के दौरान सामने आई थीं , जब शास्त्री पहली बार टीम के मैनेजर बने थे । एक बार शास्त्री गांगुली के बिना ही टीम बस लेकर रवाना हो गए थे, क्योंकि दादा (सौरव गांगुली) को देर हो चुकी थी । हालांकि यह वाक्या शास्त्री ने बताया था , जबकि गांगुली ने ऐसा कभी नहीं होने की बात कही थी ।


इसी क्रम में वर्ष 2017 में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान तत्कालीन हैड कोच अनिल कुंबले ने कप्तान विराट कोहली से गतिरोधों की खबरों के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।  कोहली उस दौरान सीएसी से अंदरखाने शास्त्री को ही कोच बनाने की मांग करते रहे , जिन्हें पूर्व में चुना नहीं गया था । वहीं गांगुली शास्त्री को कोच बनाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रशासकों की समिति और सचिन तेंदुलकर के कारण सौरव गांगुली को पीछे हटना पड़ा था। बावजूद इसके समय-समय पर गांगुली कोच के रवैये की आलोचना करते रहे। यही नहीं, शास्त्री ने भी कई बार कहा कि कुछ लोग जानबूझकर टीम और मेरी बुराई करते हैं।

इस सब से इतर अगर अब गांगुली बीसीसीआई अध्यक्ष बन जाते हैं तो इसका असर शास्त्री - कोहली के एकतरफा फैसलों पर भी पड़ेगा । असल में कोहली और शास्त्री टी-20 विश्व कप की तैयारियों के लिए नियमित अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाडि़यों के बजाए युवाओं को लगातार मौका दे रहे हैं। टीम में कुछ भी गलत हो रहा हो कोहली और शास्त्री एक सुर में उसका समर्थन करते रहे हैं। लेकिन अब गांगुली के अध्यक्ष बनने से इन एकतरफा फैसलों पर लगाम लगेगी।

गांगुली ने हमेशा ही स्पिनर कुलदीप यादव और युजवेंद्रा सिंह चहल का समर्थन किया है। गांगुली हमेशा कहते आए हैं कि कुलदीप को तीनों प्रारूपों में टीम का मुख्य स्पिनर बनाना चाहिए। इतना ही नहीं टीम चयन से लेकर टीम के फैसलों पर गांगुली खुलकर अपनी राय रखते आए हैं , जो कई बार शास्त्री और कोहली के फैसलों से इतर होती है । ऐसे में आने वाले समय में कोहली शास्त्री के एकतरफा फैसलों पर भी लगाम लग सकती है।

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