Friday, January 22, 2021

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ममता पर भड़के बंगाल के गवर्नर,  बोले - सत्ता पक्ष के अलावा यहां कोई नेता सुरक्षित नहीं , न लोकतंत्र बचा न मानवाधिकार 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
ममता पर भड़के बंगाल के गवर्नर,  बोले - सत्ता पक्ष के अलावा यहां कोई नेता सुरक्षित नहीं , न लोकतंत्र बचा न मानवाधिकार 

कोलकाता । पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सियासी दलों के बीच जुबानी जंग और सियासी साजिशों का खेल शुरू हो गया है । इस सबके बीच प्रदेश के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने एक पत्रकार वार्ता बुलाकर राज्य की कानून व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की । इस दौरान उन्होंने कहा कि बंगाल में विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं बची है । सत्ता दल से अलग कोई नेता यहां पर सुरक्षित नहीं है । उनके लिए कोई अधिकार नहीं बचे हैं, ना ही लोकतांत्रिक और ना ही मानवाधिकार । राज्यपाल ने कहा कि नियमों के मुताबिक, मैंने राज्य के हालात की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी है ।

इस दौरान उन्होंने सीएम ममता बनर्जी पर सवाल दागा कि आखिर वह राज्य में किसे बाहरी कह रही हैं । क्या भारतीय नागरिक भी बाहरी हैं, ममता को इस तरह बयान नहीं देने चाहिए । इस दौरान उन्होंने नसीहत भरे लहजे में कहा कि सीएम को आग से नहीं खेलना चाहिए , बल्कि संविधान का पालन करना चाहिए । 

विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में मचे राजनीतिक घमासान और कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच राज्यपाल ने शुक्रवार को एक पत्रकार वार्ता बुलाई । इस दौरान उन्होंने राज्य की टीएमसी सरकार को आड़े हाथों लिया ष उन्होंने कहा कि संविधान की आत्मा का ध्यान रखें, भारत एक है उसका नागरिक है । उन्होंने सीएम ममता बनर्जी को नसीहत देते हुए कहा कि अगर आप इस रास्ते से भटकती हैं, तब मेरे दायित्व की शुरुआत होती है । वह बोले - भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर टीएमसी कार्यकर्ताओं की पत्थरबाजी की घटना को लेकर मैंने राज्य के डीजीपी, चीफ सेक्रेटरी को तलब किया । कल चीफ सेक्रेटरी ने मुझे संदेश भेजा था कि उन्होंने राजनीतिक दौरे को लेकर डीजीपी को अलर्ट किया है ।  


वह बोले-  क्या राज्य की पुलिस ‘राजनीतिक पुलिस’ हो गई है । राज्य के हालात खराब होते जा रहे हैं । सिर्फ भ्रष्टाचार चल रहा है । सरकारी तंत्र का राजनीतिक तंत्र हो गया है और विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं है । बंगाल में इस वक्त ऐसे हालात हैं कि किसी विपक्ष के लिए जगह नहीं है । 

इस दौरान उन्होंने भाजपा अध्यक्ष के काफिले पर हुए पथराव की निंदा करते हुए कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए था, ये लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है ।  लोकतंत्र में हर किसी को अपने विचारों को रखने का हक है । मुख्यमंत्री किस प्रकार लापरवाह हो सकता है, क्या बंगाली कल्चर इस तरह बात करने की इजाजत देता है । ममता बनर्जी वरिष्ठ नेता हैं, मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरा कार्यकाल पूरा कर रही हैं । ऐसे में अगर वो अपने शब्दों के लिए माफी मांगती हैं, तो अच्छा होगा ।

वह बोले - राजनीतिक दल क्या करते हैं, उससे मुझे मतलब नहीं है । लेकिन बतौर गर्वनर मेरी कुछ जिम्मेदारी हैं। संविधान की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है । बंगाल की सीएम भी संविधान में बंधी हैं, उन्हें नियमों और कानून का पालन करना होगा । वो संविधान से अलग हटकर काम नहीं कर सकती हैं।

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