Friday, June 18, 2021

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पर्यावरणविद् सुंदर लाल बहुगुणा का ऋषिकेश एम्स में निधन , पिछले दिनों कोरोना से हुए थे संक्रमित

अंग्वाल न्यूज डेस्क
पर्यावरणविद् सुंदर लाल बहुगुणा का ऋषिकेश एम्स में निधन , पिछले दिनों कोरोना से हुए थे संक्रमित

ऋषिकेश । देश के विख्यात पर्यावरणविद् और पद्मविभूषण से सम्मानित 93 वर्षीय सुंदर लाल बहुणुणा का शुक्रवार दोपहर ऋषिकेश के एम्स में निधन हो गया है । वह पिछले दिनों कोरोना से संक्रमित होने के बाद एम्स में इलाज करवा रहे थे । उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने विश्व प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और पद्मविभूषण सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिपको आंदोलन को जन जन का आंदोलन बनाने वाले श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी का निधन न केवल उत्तराखण्ड और भारतवर्ष बल्कि समस्त विश्व के लिये अपूरणीय क्षति है।

बता दें कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में भर्ती पर्यावरणविद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पद्मभूषण सुंदरलाल बहुगुणा ने शुक्रवार दोपहर 12 बजे अंतिम साल ली । गत 8 मई को कोरोना संक्रमित होने के बाद उन्हें एम्स ऋषिकेश में भर्ती किया गया था।

 कोरोना के साथ ही निमोनिया भी हो गया था। उन्हें सिपेप मशीन सपोर्ट पर रखा गया था और उनका ऑक्सीजन सेचूरेशन लेवल 86 फीसदी पर आ गया था। एम्स में चिकित्सक उनके ब्लड शुगर लेवल और ऑक्सीजन लेवल को संतुलित करने में जुट थे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। वह डायबिटीज के मरीज भी थे। 

एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल ने बताया कि उन्हें यहां आईसीयू में लाइफ सपोर्ट में रखा गया था। उनके रक्त में ऑक्सीजन की परिपूर्णता का स्तर बीती शाम से गिरने लगा था। चिकित्सक विशेषज्ञ उनकी निरंतर स्वास्थ्य संबंधी निगरानी कर रहे थे। शुक्रवार की दोपहर करीब 12 बजे पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा ने अंतिम सांस ली। उनके पुत्र राजीव नयन बहुगुणा एम्स में ही मौजूद है। 


पर्यावरणविद बहुगुणा का अंतिम संस्कार ऋषिकेश गंगा तट पर शुक्रवार को ही पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। एम्स के निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने उनके निधन को उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अपूरणीय क्षति बताया है। उन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पर्यावरणविद् बहुगुणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त हुए इसे देश की अपूरणीय क्षति बताया है।

दुनिया में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के बड़े प्रतीक में शुमार सुंदरलाल बहुगुणा ने 1972 में चिपको आंदोलन को धार दी। साथ ही देश-दुनिया को वनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। परिणामस्वरूप चिपको आंदोलन की गूंज समूची दुनिया में सुनाई पड़ी।

 

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