Friday, May 20, 2022

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रुड़की धर्म संसद पर प्रशासन ने लगाई रोक, हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपनाए थे सख्त तेवर

अंग्वाल न्यूज डेस्क
रुड़की धर्म संसद पर प्रशासन ने लगाई रोक, हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपनाए थे सख्त तेवर

देहरादून/रुड़की । हरिद्वार के डाडा जमालपुर गांव में रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान हिंसा मामले को लेकर बुधवार को रुड़की में प्रस्तावित धर्म संसद पर रोक के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है. इस आयोजन को धर्म संसद की बजाये हिंदू महापंचायत बता रही काली सेना के कई पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के साथ ही गांव के पांच किलोमीटर के दायरे में धारा 144 लागू कर दी गई है. प्रशासन की तरह से यह कदम इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के सख्त तेवर अपनाने के बाद उठाया गया है. प्रशासन ने बुधवार को हरिद्वार काली सेना के संस्थापक स्वामी आनंद स्वरूप और स्वामी परमानंद को उनके आश्रम में नजरबंद भी कर दिया.

प्रशासन ने पहले भी आगाह किया था

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में हरिद्वार और दिल्ली में आयोजित धर्म संसद में एक समुदाय विशेष के खिलाफ हेट स्पीच से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान प्रशासन को आगाह को किया था रुड़की में इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए. साथ ही कहा था कि अगर रुड़की धर्म संसद में नफरती भाषा का इस्तेमाल किया गया तो राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी जैसे शीर्ष अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के सख्त तेवरों के बाद मंगलवार शाम ही प्रशासन सक्रिय हो गया. आनन-फानन में काली सेना के राज्य संयोजक स्वामी दिनेशानंद और कुछ अन्य पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया. साथ ही जमालपुर गांव के आसपास के पांच किलोमीटर के दायरे में धारा 144 भी लागू कर दी गई.

धर्म संसद या हिंदू महापंचायत

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान रूड़की में होने वाले आयोजन का जिक्र धर्म संसद के तौर पर किया गया. हालांकि, इसका आयोजन करने वालों का कहना है कि यह धर्म संसद नहीं हिंदू महापंचायत थी. इसका आयोजन काली सेना की तरफ से किया जाना था. हिंदू संगठनों की तरफ से सोशल मीडिया पर जारी पोस्टरों में इसे हिंदू महापंचायत बताया गया है. और प्रशासन की कड़ी सख्ती के बावजूद बड़ी संख्या में हिंदुओं से डाडा जमालपुर में जुटने का आह्वान किया गया है. इस संदर्भ में हरिद्वार काली सेना के संस्थापक और शांभवी पीठ के प्रमुख स्वामी आनंद स्वरूप ने मंगलवार को कहा था कि हिंदू महापंचायत होने जा रही है, न कि धर्म संसद है. धर्म संसद की बात कहकर सुप्रीम कोर्ट को गलत जानकारी दी जा रही है. उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि हिंदू महापंचायत के आयोजन पर रोक नहीं लगाई जा सकेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि डाडा जमामपुर गांव में रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान जो कुछ हुआ, उसके आरोपियों को पुलिस बचा रही है. इसे सहन नहीं किया जाएगा.


क्यों पड़ी सख्ती की जरूरत

गौरतलब है कि गत 16 अप्रैल को डाडा जमालपुर गांव में रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान दो पक्षों में टकराव हो गया था. इसके बाद पथराव और आगजनी की घटना से क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई. हिंसक झड़प के दौरान दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए थे. घटना के बाद से ही क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. ऐसे में धर्म संसद के आयोजन से हालात एक बार फिर बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है. वहीं, हरिद्वार, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश में उना में पूर्व में धर्म संसद के आयोजनों के दौरान भड़काऊ बयानबाजी होने को देखते हुए रुड़की के आयोजन से भी माहौल गर्माने की आशंका जताई जा रही थी.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिए थे निर्देश

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हरिद्वार और दिल्ली में आयोजित धर्म संसद के दौरान भड़काऊ बयानबाजी के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हो रही थी. इस दौरान वकील कपिल सिब्बल ने रुड़की में बुधवार को प्रस्तावित धर्म संसद का जिक्र किया. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त तेवर अपनाते हुए कहा कि अगर इसमें किसी भी तरह की भड़काऊ बयानबाजी हुई तो शीर्ष अफसरों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा. कोर्ट ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव से कहा कि इसमें किसी तरह की अप्रिय भाषा के इस्तेमाल को रोकना सुनिश्चित करें. कोर्ट ने इस बात को लेकर भी चिंता जताई की राज्यों को एहतियाती कदम उठाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाने के बावजूद इस तरह की घटनाएं हो रही हैं. साथ ही राज्य से यह बताने को भी कहा कि कोर्ट के दिशानिर्देशों पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं.

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