Saturday, January 29, 2022

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उत्तराखंड कांग्रेस के फिर घमासान , राहुल गांधी के चुनावी फॉर्मूले से हरीश रावत  खफा , दिल्ली तलब किया गया

अंग्वाल न्यूज डेस्क
उत्तराखंड कांग्रेस के फिर घमासान , राहुल गांधी के चुनावी फॉर्मूले से हरीश रावत  खफा , दिल्ली तलब किया गया

देहरादून । उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव हरीश रावत एक बार फिर से सुर्खियों में हैं । पिछले दिनों पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और पंजाब के प्रदेश पार्टी अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच जारी कलह को दूर करने के लिए बनाई गई समिति के अहम सदस्य के रूप में गतिरोध को कम करने की जुगत में लगे नजर आए । लेकिन अब खबर है कि उत्तराखंड विधानसभा चुनावों को लेकर राहुल गांधी के तैयार फॉर्मूले से अब वह खुद नाराज हो गए हैं । वह खुद को उत्तराखंड कांग्रेस का चुनावी चेहरा बताना चाहते हैं , लेकिन पार्टी आलाकमान इससे सहमत नहीं है । इसी के चलते उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी का इजहार तक कर दिया है । हंगामा बढ़ता देख पार्टी आलाकमान ने उन्हें दिल्ली तलब कर लिया है । 

हाईकमान को लपेटा

बता दें कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत इस बार फिर से विधानसभा चुनावों से पहले खुद को पार्टी का मुख्य चेहरा बताने में जुटे हैं । लेकिन पार्टी आलाकमान के रुख ने उन्हें नाराज कर दिया है । इस संबंध में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर भी की है । अपनी पोस्ट में आलाकमान के फैसले पर आपत्ति जताते हुए चुनावों के मद्देनजर काम करने की स्वतंत्रता देने के बजाए उनकी घेराबंदी किए जाने जैसे सवाल खड़े कर दिए हैं । हरीश रावत ने एक ट्वीट करते हुए आलाकमान के खिलाफ मोर्चा खोलने की कोशिश की है । उन्होंने लिखा - 

 है न अजीब सी बात, चुनाव रूपी समुद्र को तैरना है, सहयोग के लिए संगठन का ढांचा अधिकांश स्थानों पर सहयोग का हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। जिस समुद्र में तैरना है, 

सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं। जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। मन में बहुत बार विचार आ रहा है कि #हरीश_रावत अब बहुत हो गया, बहुत तैर लिये, अब विश्राम का समय है! 

फिर चुपके से मन के एक कोने से आवाज उठ रही है "न दैन्यं न पलायनम्" बड़ी उपापोह की स्थिति में हूंँ, नया वर्ष शायद रास्ता दिखा दे। मुझे विश्वास है कि #भगवान_केदारनाथ जी इस स्थिति में मेरा मार्गदर्शन करेंगे।


क्या है पार्टी का कहना 

असल में हरीश रावत विधानसभा चुनावों में खुद को पार्टी का मुख्य चेहरा घोषित करने की रणनीति पर काम कर रहेहैं , लेकिन पार्टी आलाकमान और प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी देवेंद्र यादव आगामी विधानसभा चुनावों को सामूहिक नेतृत्व में लड़ने की बात कह रहे हैं । इसके साथ ही प्रदेश की स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडे ने भी सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात कहते हुए पार्टी आलाकमान का समर्थन किया है , जिससे हरीश रावत नाराज हो गए हैं । 

हरीश रावत के खिलाफ बन रही हवा

असल में इस समय उत्तराखंड कांग्रेस का प्रभारी देवेंद्र यादव को बनाया गया है , जो राहुल गांधी के करीबी है तो हरीश रावत के विरोध भी रहे हैं । असल में देवेंद्र यादव इस बार के चुनावों में राहुल गांधी की सोच के अनुसार , युवा नेताओं को आगे लाना चाह रहे हैं , जिसके चलते हरीश रावत की राह में रोड़े अटक सकते हैं । हाल में कांग्रेस कमेटी में ऐसे लोगों की एंट्री करवाई गई है , जो हरीश रावत खेमे का विरोध करते रहे हैं । 

हरदा  के समर्थन में आए कांग्रेसी

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब हरीश रावत के समर्थन में भी कई नेता खुलकर सामने आने लगे हैं । इसी क्रम में कांग्रेस उपाध्यक्ष सुरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि हरीश रावत पार्टी और प्रदेश के वरिष्ठ नेता हैं । देवेंद्र यादव की मौजूदगी में राहुल गांधी की रैली से हरीश रावत के पोस्टर हटा दिए जाते हैं । इससे साफ हो गया है कि कुछ ताकतें ऐसी हैं जो नहीं चाहती कि हरीश रावत को इस बार के चुनावों में आगे किया जाए । प्रदेश प्रभारी जिस तरह काम कर रहे हैं , उससे साफ है कि कांग्रेस के प्रदेश की सत्ता में वापस आने पर अड़ंगा लग लगा है । 

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