Saturday, September 21, 2019

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उत्तराखंड सरकार की मुफ्त तीर्थाटन योजना के लिए नहीं मिल रहे बुजुर्ग , विभाग ने आधा किया लक्ष्य

अंग्वाल न्यूज डेस्क
उत्तराखंड सरकार की मुफ्त तीर्थाटन योजना के लिए नहीं मिल रहे बुजुर्ग , विभाग ने आधा किया लक्ष्य

देहरादून । उत्तराखंड सरकार को अपनी एक योजना के लिए बुजुर्ग ही नहीं मिल रहे हैं । इसके चलते सरकार ने अपनी योजना का लक्ष्य तक को आधा कर दिया है, लेकिन स्थिति अभी भी काफी खराब स्थिति में पहुंच गई है । हम बात कर रहे हैं दीनदयाल मातृ-पितृ तीर्थाटन योजना की, जिसके तहत प्रदेश के बुजुर्गों को प्रदेश में तीर्थाटन करवाया जाता है। इस योजना की शुरुआत केदारनाथ आपदा के बाद की गई थी , जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के लोगों को प्रदेश में तीर्थाटन करवाना था, लेकिन अब विभाग के सामने बड़ा संकट यह आ गया है कि विभाग को अब इस योजना को चलाने के लिए बुजुर्ग ही नहीं मिल रहे । 

इस योजना के तहत आवेदनों में भारी कमी आई है और अब पूरे प्रदेश में इस योजना के लक्ष्य को घटा दिया गया । जब इस योजना की शुरुआत हुई थी तब इसका लक्ष्य 25 हजार बुजुर्गों को तीर्थाटन करवाया जाना था, अब 12500 का लक्ष्य तय किया है ।बता दें कि पूर्व की उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2014 में मेरे बुजुर्ग मेरे तीर्थ योजना ' योजना की शुरुआत की थी , लेकिन बाद में इस योजना का नाम बदलकर दीनदयाल मातृ-पितृ तीर्थाटन योजना कर दिया गया । इस योजना की लाभ प्रदेश के बुजुर्गों ने उठाया लेकिन जब से सरकार ने इस योजना का नाम बदला यह योजना ठप पड़ गई । हाल ये है कि अब सरकार को इस योजना को चलाने के लिए बुजुर्ग ही नहीं मिल रहे । विभाग ने इस योजना को चलाने के लिए जो लक्ष्य रखा था, उससे कोसो दूरी बनी हुई है । 


असल में इस योजना का लाभ लेने के लिए सीनियर सिटिजन जिला मुख्यालयों में आवेदन करते हैं, जिसके बाद नामों को शॉर्ट लिस्ट किया जाता है और फिर चिन्हित 13 तीर्थ स्थानों में से एक पर इन लोगों को भेजा जाता है । इन बुजुर्गों के रहने और खाने की और ट्रांसपोर्टशन की व्यवस्था गढ़वाल मण्डल विकास निगम करता है, लेकिन जिलों में योजना में तीर्थाटन करने के लिए बुजुर्ग ही नहीं मिल रहे हैं । 

इस मुद्दे पर जानकारों का कहना है कि इस योजना के तहत 25 हजार बुजुर्गों को 13 तीर्थस्थलों के दर्शन कराने का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए बजट भी रखा जाता है , लेकिन इतनी बड़ी संख्या में लोगों के नहीं मिलने की सूरत में यह बजट कई बार रखा रह जाता है और इस बजट को दूसरी योजना में ट्रांसफर करने में भी परेशानियां आती हैं। ऐसे में इसका लक्ष्य घटाया गया है ।  

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