Friday, September 20, 2019

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा हुआ पास हुआ तो 50 फीसदी पदों पर सीधे होगी प्रधानाचार्यों की भर्ती , निजी स्कूलों पर पड़ेगा ये असर

अंग्वाल संवाददाता
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा हुआ पास हुआ तो 50 फीसदी पदों पर सीधे होगी प्रधानाचार्यों की भर्ती , निजी स्कूलों पर पड़ेगा ये असर

देहरादून । उत्तराखंड में अगर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 का मसौदा पास हुआ तो राज्य के सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्यों के 50 प्रतिशत पदों को सीधी भर्ती से भरा जाएगा। इतना ही नहीं इस नीति के पास होने की स्थिति में शेष 50 फीसदी पद वरिष्ठता के आधार पर भरे जाएंगे। इसमें केंद्र को यह सुझाव भी दिया गया है कि प्रधानाचार्या के पास आकस्मिक मानव संसाधन एवं रखरखाव के लिए एक निधि की व्यवस्था हो। इस नीति के तहत स्कूल परिसर के बेहतर संचालन के लिए प्रधानाचार्य के पास 5 से 10 लाख रुपये की एक निधि भी होगी। इतना ही नहीं नई शिक्षा नीति में राज्य शिक्षक भर्ती बोर्ड के गठन की भी तैयारी है। यदि भर्ती बोर्ड गठित हुआ तो प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों की कमी दूर होगी। वहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 के ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि निजी स्कूल सार्वजनिक शब्द का उपयोग नहीं करेंगे। पब्लिक शब्द का उपयोग केवल सरकारी स्कूलों एवं वित्त पोषित स्कूलों द्वारा किया जाएगा।

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इसी क्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति में राज्य शिक्षा आयोग के गठन का भी सुझाव है, लेकिन प्रदेश सरकार इसके लिए तैयार नहीं । शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में पहले से बाल आयोग गठित है। राज्य शिक्षा आयोग के गठन से राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। 

बता दें कि शिक्षा विभाग में अभी प्रधानाचार्यों के पद वरिष्ठता के आधार पर भरे जाते हैं , लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा पास हुआ तो करीब 50 फीसदी पदों पर विभागीय परीक्षा के तहत प्रधानाचार्यों की सीधी भर्ती हो सकेगी , जबकि शेष सीटों पर वरिष्ठता को तरजीह दी जाएगी । अच्छी बात यह है कि उत्तराखंड सरकार ने इस सुझाव पर सहमति जता दी है । इतना ही नहीं  इसका फाइनल ड्राफ्ट भी तैयार करते हुए उसे केंद्र सरकार को भेज रही है।


राज्य की ओर से केंद्र को यह सुझाव भी दिया गया है कि प्रधानाचार्या के पास आकस्मिक मानव संसाधन एवं रखरखाव के लिए एक निधि की व्यवस्था हो। हालांकि उत्तराखंड राजकीय प्रधानाचार्य एसोसिएशन सरकार के इस सुझाव से सहमत नहीं है। एसोसिएशन का कहना है कि प्रधानाचार्यों के सभी पदों को वरिष्ठता के आधार पर ही भरा जाना चाहिए। यदि इन पदों को सीधी भर्ती से भरा गया तो विभाग में 35 से 36 वर्षों से सेवा कर रहे प्रधानाध्यापक पदोन्नति से वंचित रह जाएंगे। 

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बता दें कि विभाग में वर्तमान में शिक्षकों के लगभग 4000 एवं प्रधानाचार्यों के 800 पद पिछले काफी समय से रिक्त हैं। इन पदों को भरने के लिए विभाग की ओर से लोक सेवा आयोग एवं अधीनस्थ चयन सेवा आयोग को कई बार लिखा जा चुका है, इसके बावजूद भर्ती में देरी से कई स्कूलों में शिक्षकों एवं प्रिंसिपलों की कमी बनी है।   

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