Friday, August 23, 2019

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बद्रीनाथ धाम में पाया जाने वाला यह पौधा , जिसके गुणों को जानने के बाद वैज्ञानिकों ने दाबी दांतों तले अंगुलियां

अंग्वाल न्यूज डेस्क
बद्रीनाथ धाम में पाया जाने वाला यह पौधा , जिसके गुणों को जानने के बाद वैज्ञानिकों ने दाबी दांतों तले अंगुलियां

पौड़ी गढ़वाल । उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू हो चुकी है । गंगोत्री-यमुनोत्री के साथ ही अब बद्रीनाथ-केदानाथ धाम के कपाट भी खुल गए हैं। इस साल बद्री-केदार के कुछ रास्तों में अभी भी काफी बर्फ जमा है, जिसके चलते श्रद्धालु काफी उत्साहित हैं । इस चारधाम यात्रा के साथ ही एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है बद्रीनाथ धाम में पैदा होने वाला वो पौधा, जिसने विज्ञान जगत को हैरत में डाला हुआ है , इतना ही नहीं लोग इस पौध की पत्तियों को प्रसाद के तौर पर अपने साथ ले जाते हैं। असल में यह पौधा कोई ओर नहीं बल्कि बद्री तुलसी है, जो अपने गुणों के लिए देश-दुनिया की चर्चा में रहती है । असल में दुनिया भर के वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने में जुटे रहते हैं कि दुनिया भर में ग्लोबल वार्मिंग का असर इस बद्री तुलसी पर इस बार कैसा नजर आएगा । लेकिन हर बार नतीजे चौंकाने वाले होते हैं।

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बता दें कि बद्रीनाथ धाम के पास पाए जाने वाली तुलसी को बद्री तुलसी नाम दिया गया है । असल में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए तैयार किए जा रहे डाटा बेस के तहत पहली बार विज्ञानियों ने बदरी तुलसी पर परीक्षण किया। इसमें जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने की अद्भुत क्षमता पाई गई। वैज्ञानिकों की रिसर्च में सामने आया है कि हजारों साल पहले हिमालय की बर्फीली वादियों में उपजी और ठंडे माहौल में रहने की आदी बदरी तुलसी अधिक कार्बन सोखेगी। इतना ही नहीं तापमान बढ़ने पर वह और बलवती हो जाएगी। कई रिसर्च के बाद सामने आया है कि इसका इस्तेमाल कई बीमारियों में फायदेमंद है । मसलन जिन लोगों को चर्म रोग (लेसमेनियासिस), डायरिया, डायबिटीज, घाव, बाल झड़ना, सिर दर्द, इंफ्लुइंजा, फंगल संक्रमण, बुखार, कफ-खांसी, बैक्टीरियल संक्रमण आदि है, अगर वो इसका इस्तेमाल करें तो उनके रोग घट सकते हैं।


स्थानीय लोगों ने भी इस पौध को भगवान बदरी विशाल को समर्पित कर दिया है। कोई भी इसके पौधों को हानि नहीं पहुंचाता। श्रद्धालु केवल इसे प्रसाद के लिए तोड़ते हैं। पुराणों में भी इसके औषधीय गुणों का खूब बखान किया गया है। लोग इसकी चाय भी पीते हैं। वहीं बद्रीनाथ आने वाले श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं।

कुछ समय पहले एफआरआई की इकोलॉजी, क्लाइमेट चेंज एंड फॉरेस्ट इन्फ्सुएंस डिवीजन ने अपने ओपन टॉप चैंबर में इस पर परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि सामान्य तुलसी और अन्य पौधों से इसमें कार्बन सोखने की क्षमता  12 फीसदी अधिक है। तापमान अधिक बढ़ने पर इसकी क्षमता 22 फीसदी और बढ़ जाएगी। इसका पौधा 5-6 फुट लंबा हो जाता है। पौधे छतरी की शक्ल बना लेते हैं, जिससे यह अधिक कार्बन सोख लेती है।

 

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