Thursday, November 26, 2020

Breaking News

   कानपुर: विकास दुबे और उसके गुर्गों समेत 200 लोगों की असलहा लाइसेंस फाइल हुई गायब     ||   हाथरस कांड: यूपी सरकार ने SC में पीड़िता के परिवार की सुरक्षा पर दाखिल किया हलफनामा     ||   लखनऊ: आत्मदाह की कोशिश मामले में पूर्व राज्यपाल के बेटे को हिरासत में लिया गया     ||   मानहानि केस: पायल घोष ने ऋचा चड्ढा से बिना शर्त माफी मांगी     ||   लक्ष्मी विलास होटल केस: पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी हुए सीबीआई कोर्ट में पेश     ||   पश्चिम बंगाल: CM ममता बनर्जी ने अलापन बंद्योपाध्याय को बनाया मुख्य सचिव     ||   काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद मामले में 3 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई     ||   इस्तीफे पर बोलीं हरसिमरत कौर- मुझे कुछ हासिल नहीं हुआ, लेकिन किसानों के मुद्दों को एक मंच मिल गया     ||   ईडी के अनुरोध के बाद चेतन और नितिन संदेसरा भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित     ||   रक्षा अधिग्रहण परिषद ने विभिन्न हथियारों और उपकरणों के लिए 2290 करोड़ रुपये की मंजूरी दी     ||

उत्तराखंड में 'नेचुरल हाउस' देंगे भूकंप में सुरक्षा , लोगों को दिया जा रहा ऐसे भवन निर्माण का प्रशिक्षण 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
उत्तराखंड में

नैनीताल । पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा के बाद जहां लोगों को भूकंप का डर सताता रहता है , वहीं मानसून के मौसम में भी जानमाल के नुकसान का डर बना रहता है । ऐसे में पहाड़ों के मकानों के निर्माण को लेकर नई बहस छिड़ गई है । ऐसे मकानों को बनाए जाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है , ताकि भूकंप की स्थिति में ज्यादा जानमाल का नुकसान न हो । इसी क्रम में इन दिनों नैनीताल जिले में मिट्टी से बने ऐसे ही घरों को बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन्हें नेचुरल हॉउस कहा जाता है । पहाड़ों में पहले मिट्टी,पत्थर और लकड़ी से घर बनाए जाते रहे हैं लेकिन अब पहाड़ों पर भी ईट सीमेंट से बने मकानों का चलन तेज हो गया है , जो ऐसी किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में उसमें रहने वालों के लिए असुरक्षित भी हैं । 1991 में उत्तरकाशी भूकंप में ऐसे घरों में भारी तबाही हुई थी । उस दौरान मिट्टी और पत्थरों के घर सुरक्षित रहे , जबकि सीमेंट और सरिया से बने मजबूत ध्वस्त हो गए थे । 

पूर्व के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए नैनीताल जिले के मेहरोड़ा गांव में गीली मिट्टी फार्म में मिट्टी के घरों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है । प्रशिक्षण दे रही नूतन सिंह ने बताया कि सीमेंट से बने घर शरीर को नुकसान पहुंचाते है । साथ ही वह बताती हैं कि दुनिया में अर्थ बैग, कॉब, एडोनी, टिम्बर फ्रेम और लिविंग रूफ तकनीक से घर बनाये जाते है । 


नूतन का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार भी मिट्टी पत्थर से बने घरों को बनाने की बात कह रही हैं , लेकिन, ये घर कैसे बनेंगे ये कोई नही जानता । ऐसे में  मेहरोड़ा गांव में मिट्टी के घरों को बनाने की कला सीखने के लिए कई प्रशिक्षु पहुंच रहे हैं । 

स्थानीय युवा भी इस तकनीक से घर बनाना सीख रहे हैं. साथ ही कई देशों से भी घर बनाने का प्रशिक्षण लेने के लिए लोग पहुंच रहे है । विदित हो कि इस समय दुनिया में सबसे खतरनाक दैवीय आपदा भूकंप को ही कहा जा रहा है । भूकंप की तबाही को देखते हुए इन दिनों दुनिया के कई देशों में ऐसे घरों को बनाने की कवायद तेज हो रही है , जो  भूकंप में भी सुरक्षित रहे । हालांकि उत्तराखंड के पहाड़ों में अपने पारंपरिक भवन निर्माण की कला को छोड़ते हुए नए लेंटर वाले मकान बनाने का चलन शुरू हो गया है । दूर दराज के गांवों में भी अब पक्के मकान ज्यादा देखे जा रहे हैं । जो राज्य की भौगोलिक स्थिति के मद्देनजर उतने सुरक्षित नहीं हैं जितने मिट्टी पत्थर वाले मकान । बहरहाल, ऐसे में एक बार फिर से पारंपरिक मिट्टी पत्थऱ वाले मकानों को बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है

Todays Beets: