Sunday, September 23, 2018

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एमफिल, पीएचडी के बाद नौकरी नहीं मिली, तो मुर्दाघर में नौकरी के लिए किया आवेदन

अंग्वाल न्यूज डेस्क
एमफिल, पीएचडी के बाद नौकरी नहीं मिली, तो मुर्दाघर में नौकरी के लिए किया आवेदन

कोलकाता।

पश्चिम बंगाल में बेरोजगारी का आलम कितना गंभीर है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि यहां के एक मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर में डोम की नौकरी के लिए एमफिल् और पीएचडी धारकों ने भी आवेदन किया है।

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मामला मालदा मेडिकल कॉलेज से जुड़ा है। यहां अस्पताल प्रबंधन की ओर से लैब अटेंडेंट्स ग्रुप डी पद पर मुर्दा घर में नौकरी के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसके लिए करीब 350 लोगों ने आवेदन किया है। इन लोगों में ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, पीएचडी और एमफिल धारी शामिल हैं। ग्रुप डी में वह कर्मचारी आते हैं जिन्हें अस्पताल में शवों को संभालने और लाने—ले जाने का काम करना होता है।अस्पताल प्रशासन इस बात से हैरान है कि उच्च शिक्षित लोगों को अपनी योग्यता से कम के काम के लिए आवेदन करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, आवेदनकर्ताओं में से हर चौथा आवेदनकर्ता या तो पीएचडी या फिर एमफिल की पढ़ाई कर रहा था। वहीं कई आवेदनकर्ताओं में से कुछ तो डबल एमए और लगभग हर तीसरा आवेदनकर्ता ग्रेजुएट है।


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ग्रुप डी  के लिए 7 जुलाई को अस्पताल प्रशासन ने आवेदनों की जांच शुरू की थी। इस नौकरी के लिए न्यूनतम क्वालिफिकेशन 8वीं पास तय की गई है। बता दें कि भारत में उच्च शिक्षित लोगों द्वारा अपनी योग्यता से कम की नौकरी के लिए आवेदन करने का यह पहला मामला नहीं है। साल 2015 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा सचिवालय में चपरासी के महज 368 पदों के लिए लगभग 23 लाख आवेदन हुए थे। यह 23 लाख आवेदनकर्ता पीएचडी धारक थे। साथ ही जनवरी 2016 में यूपी के ही अमरोहा जिले में रेलवे में सफाईकर्मी के 114 पदों के लिए, लगभग 17 हजार एमबीए, बीटेक और बीएससी डिग्री धारकों ने आवेदन किया था।

 

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