Friday, November 17, 2017

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मनोज तिवारी- विजय गोयल के बीच गतिरोध चरम पर, पार्टी आलाकमान ने आगामी चुनौतियों के मद्देनजर एकजुट रहने की हिदायत दी

अंग्वाल न्यूज डेस्क
मनोज तिवारी- विजय गोयल के बीच गतिरोध चरम पर, पार्टी आलाकमान ने आगामी चुनौतियों के मद्देनजर एकजुट रहने की हिदायत दी

नई दिल्ली । राजनीति में वर्चस्व की लड़ाई को लेकर अपनों के बीच गतिरोध पैदा होना कोई नई बात नहीं है। शायद इसी वर्चस्व की लड़ाई इन दिनों दिल्ली प्रदेश भाजपा में लड़ी जा रही है। अमूमन हार के बाद पार्टी के नेताओं के बीच गतिरोध और एक दूसरे पर सवाल उठाने का सिलसिला देखा जाता है लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा में इन दिनों दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी और विजय गोयल के बीच जबरदस्त खींचतान चल रही है।

इसका नमूना पिछले दिनों उस समय देखने को मिला जब विजय गोयल  ने नवनिर्वाचित पार्षदों के लिए एक सम्मान समारोह का आयोजन किया, लेकिन मनोज तिवारी ने खुद इस कार्यक्रम में जाने से इनकार करते हुए पार्षदों को भी इस कार्यक्रम में जाने से मना करने वाला फरमान जारी कर दिया। वहीं मंगलवार को पार्टी की एक बैठक को कवर करने के लिए जहां मनोज तिवारी ने पत्रकारो को बुलाया था वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पत्रकारों की मौजूदगी में कार्यसमिति की बैठक में पार्टी नेताओं को संबोधित करने का उद्देश्य बेकार होने की बात कही। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को जाने के बाद पार्टी आलाकमान ने दिल्ली इकाई के नेताओं को हिदायत ही है कि वे अपने गतिरोध जल्द से जल्द खत्म करें।

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तिवारी बोले-संगठन का कार्यक्रम नहीं

असल में पहले घटनाक्रम में विजय गोयल के साथ मनोज तिवारी की खींचतान उस समय उजागर हुई, जब दिल्ली निगम चुनावों में जीतने वाले पार्षदों को सम्मानित करने के लिए गोयल ने एक सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में न तो मनोज तिवारी पहुंचे और पार्षदों को न जाने  का भी फरमान दे डाला। तिवारी का कहना था कि उन्हें बताया गया था कि यह कार्यक्रम नेहरू युवा केंद्र का है, इसलिए उन्होंने हामी भर दी थी, लेकिन जब पता चला कि विजय गोयल सम्मानित करेंगे तो उन्होंने कार्यक्रम में जाने से मना कर दिया। 

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तिवारी की नाराजगी के बाद बदला कार्यक्रम का नाम

सूत्रों का कहना है कि तिवारी की नाराजगी की बात सामने आने पर इस सम्मान समारोह को स्लम आंदोलन के रूप में रखा गया, जिसमें पार्षदों को एक स्लम एरिया गोद लेने की बात कही गई, लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के फरमान के चलते इस कार्यक्रम में विजयी 184 में से मात्र 25-30 पार्षद की कार्यक्रम में पहुंचे थे। हालांकि इस पूरे मामले में विजय गोयल के साथ खड़े नजर आए दिल्ली प्रभारी श्याम जाजू। इस पूरे मामले को लेकर तिवारी ने अपने समर्थकों के बीच तर्क रखा कि विजय गोयल केंद्र में मंत्री है और राजस्थान से राज्यसभा सांसद, ऐसे में उनका दिल्ली के जीते हुए पार्षदों को सम्मानित करने का कोई औचित्य नहीं बनता। 

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मनोज तिवारी के रुख पर उठाए सवाल

इससे इतर, मंगलवा को भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में भी असहज स्थिति देखने को मिली। मनोज तिवारी ने बैठकको कवर करने के लिए मीडिया कर्मियों को भी बुलाया हुआ था लेकिन केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने  मनोज तिवारी के इस रुख पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि मीडिया की मौजूदगी में दिल्ली भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में पार्टी नेताओं को संबोधित करने का औचित्य नहीं रह जाएगा। हालांकि इससे पहले मनोज तिवारी ने तर्क दिया था कि उन्होंने ही मीडिया को विशेष रूप से आमंत्रित किया है। इस सब के बीच जहां दिल्ली के नेता पत्रकारों को रुकने के लिए कह रहे थे वहीं गोयल चाहते थे कि पत्रकार वहां न रहें।

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पार्टी ने अपनाया कड़ा रुख  

बहरहाल इस सब के बीच पार्टी ने मनोज तिवारी और विजय गोयल के बीच खींचतान की खबरों का संज्ञान लिया। इस मामले को निपटाने के लिए केंद्रीय संगठन मंत्री रामलाल को दखल देना पड़ा। उन्होंने दिल्ली के संगठन मंत्री सिद्धार्थन को दोनों के बीच गतिरोध खत्म करने का काम सौंपा है। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की दिल्ली इकाई के नेताओं को भविष्य की चुनौतियों के मद्देनजर एकजुट रहने और जानकारियों को मीडिया में लीक करने से बचने की हिदायत दी है।

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