Tuesday, January 22, 2019

Breaking News

   ताबड़तोड़ एनकाउंटर पर योगी सरकार को SC का नोटिस, CJI बोले- विस्तृत सुनवाई की जरूरत     ||   तेहरान में बोइंग 707 किर्गिज कार्गो प्लेन क्रैश, 10 क्रू मेंबर की मौत     ||   PM मोदी बोले- जवानों के बाद किसानों की आंखों में धूल झोंक रही कांग्रेस     ||   PM मोदी बोले- हम ईमानदारी से कोशिश करते हैं, झूठे सपने नहीं दिखाते     ||   कुशल भ्रष्टाचार और अक्षम प्रशासन का मॉडल है कांग्रेस-कम्युन‍िस्ट सरकार-PM मोदी     ||   CBI: राकेश अस्थाना केस में द‍िल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई 20 द‍िसंबर तक टली     ||   बैडम‍िंटन खि‍लाड़ी साइना नेहवाल ने पी कश्यप से की शादी     ||   गुलाम नबी आजाद ने जीवन भर कांग्रेस की गुलामी की है: ओवैसी     ||   बाबा रामदेव रांची में खोलेंगे आचार्यकुलम, क्लास 1 से क्लास 4 तक मिलेगी शिक्षा     ||   मैंने महिलाओं व अन्य वर्गों के लिए काम किया, मेरा काम बोलेगा: वसुंधरा राजे     ||

वैज्ञानिकों ने की नई अल्गोरिद्म विकसित, फेसबुक और ट्विटर के फर्जी यूजर्स का पता लगाना होगा आसान

अंग्वाल न्यूज डेस्क
वैज्ञानिकों ने की नई अल्गोरिद्म विकसित, फेसबुक और ट्विटर के फर्जी यूजर्स का पता लगाना होगा आसान

नई दिल्ली। इन दिनों सोशल मीडिया साइट फेसबुक के डाटा लीक होने की खबर के बाद वैज्ञानिकों ने इसे ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए गलत और फेक यूजर्स की पहचान करने के लिए एक अलग किस्म का अल्गोरिथम विकसित किया है जिससे फेसबुक और ट्विटर पर फर्जी यूजर का पता आसानी से लगा सकते हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि ऐसा देखा गया है कि फर्जी यूजर ज्यादातर अपने दोस्तों को अजीबोगरीब लिंक भेजते हैं। 

गौरतलब है कि इजरायल में हुए शोध में इस बात का खुलासा हुआ कि हाल के दिनों में फेसबुक पर डाटा का सुरक्षित न रहना वैज्ञानिकों की चिंताएं बढ़ा रहा है। इस्राइल की बेन-गुरियोन यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता दीमा कगान ने कहा, ‘हाल के दिनों में यूजर की निजता को सुरक्षित रखने में नाकामयाबी की चिंताजनक खबरें और चुनावों को प्रभावित करने के लिए रूस द्वारा सोशल मीडिया के लमन~नस"; सउद्देश्य  इस्तेमाल की खबरों के बाद फेक यूजरों को हटाना बहुत जरूरी हो गया है।


ये भी पढ़ें - रिलायंस जियो टेलीकाॅम कंपनियों को दे सकती है एक और झटका, बाजार में लाएगी सिम वाला लैपटाॅप

कगान ने कहा, ‘हमने हमारे अल्गोरिद्म की जांच 10 अलग - अलग सोशल नेटवर्कों पर मौजूद नकली और वास्तविक डाटा संग्रहों पर की। इसने दोनों पर ही अच्छे से काम किया।’ यह अध्ययन सोशल नेटवर्क एनालिसिस एंड माइनिंग पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। 

Todays Beets: