Monday, June 25, 2018

Breaking News

   उत्तर भारत में धूल: चंडीगढ़ में सुबह 11 बजे अंधेरा छाया, 26 उड़ानें रद्द; दिल्ली में भी धूल कायम     ||   टेस्ट में भारत की सबसे बड़ी जीत: अफगानिस्तान को एक दिन में 2 बार ऑलआउट किया, डेब्यू टेस्ट 2 दिन में खत्म     ||   पेशावर स्कूल हमले का मास्टरमाइंड और मलाला पर गोली चलवाने वाला आतंकी फजलुल्लाह मारा गया: रिपोर्ट     ||   कानपुर जहरीली शराब मामले में 5अधिकारी निलंबित     ||   अब जल्द ही बिना नेटवर्क भी कर सकेंगे कॉल, बस Wi-Fi की होगी जरुरत     ||   मौलाना मदनी ने भी की एएमयू से जिन्‍ना की तस्‍वीर हटाने की वकालत     ||   भारत-चीन सेना के बीच हॉटलाइन की तैयारी, LoC पर तनाव होगा दूर     ||   कसौली में धारा 144 लागू, आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर     ||   स्कूली बच्चों पर पत्थरबाजी से भड़के उमर अब्दुल्ला, कहा- ये गुंडों जैसी हरकत     ||   थर्ड फ्रंट: ममता, कनिमोझी....और अब केसीआर की एसपी चीफ अखिलेश यादव के साथ बैठक     ||

गंगोत्री में बनी झील का अस्तित्व खत्म पर खतरा बरकरार, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
गंगोत्री में बनी झील का अस्तित्व खत्म पर खतरा बरकरार, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता 

देहरादून। गंगा के उद्गम स्थल गोमुख के पास पिछले साल बनी झील का वजूद बिल्कुल खत्म हो चुका है इसके बावजूद प्रदेशवासियों के लिए खतरा कम नहीं हुआ है। इस बात का खुलासा गंगोत्री का दौरा कर वापस लौटे वाडिया शोध संस्थान के वैज्ञानिकों ने किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल झील का अस्तित्व तो खत्म हो गया है लेकिन वहां मौजूद मलबा परेशानी का सबब बनी हुई है। वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों ने बताया कि इसकी जानकारी जल्द ही राज्य सरकार और केन्द्र सरकार को भेजी जाएगी।

गौरतलब है कि गोमुख में पिछले साल एक ग्लेशियर के टूटने की वजह से बड़ी झील का निर्माण हो गया था। समय के बदलाव के साथ ही अब ग्लेशियर पूरी तरह से सूख गया है लेकिन उसका मलबा नई परेशानी खड़ी कर रहा है। वैज्ञानिकों ने बताया कि ग्लेशियर का मलबा कई किलोमीटर में फैला है और उसके कच्चा होने की वजह से बारिश के दौरान उसके नीचे खिसकने की संभावना बढ़ गई है। 

ये भी पढ़ें - हाईकोर्ट में जज के खिलाफ आपराधिक अवमानना की याचिका दायर, अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप

यहां बता दें कि ग्लेशियर के टुकड़ों में बड़ी मात्रा में बोल्डर और पत्थर के टुकड़े शामिल हैं ऐसे मंे बारिश के दौरान उसके नीचे गिरने से काफी नुकसान हो सकता है। वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकांे ने बताया कि इसकी जानकारी राज्य और केन्द्र सरकार को जल्द ही दी जाएगी ताकि मलबे को नीचे आने से रोकने के उपाय किए जा सकें। 


 

 

Todays Beets: