Sunday, June 24, 2018

Breaking News

   उत्तर भारत में धूल: चंडीगढ़ में सुबह 11 बजे अंधेरा छाया, 26 उड़ानें रद्द; दिल्ली में भी धूल कायम     ||   टेस्ट में भारत की सबसे बड़ी जीत: अफगानिस्तान को एक दिन में 2 बार ऑलआउट किया, डेब्यू टेस्ट 2 दिन में खत्म     ||   पेशावर स्कूल हमले का मास्टरमाइंड और मलाला पर गोली चलवाने वाला आतंकी फजलुल्लाह मारा गया: रिपोर्ट     ||   कानपुर जहरीली शराब मामले में 5अधिकारी निलंबित     ||   अब जल्द ही बिना नेटवर्क भी कर सकेंगे कॉल, बस Wi-Fi की होगी जरुरत     ||   मौलाना मदनी ने भी की एएमयू से जिन्‍ना की तस्‍वीर हटाने की वकालत     ||   भारत-चीन सेना के बीच हॉटलाइन की तैयारी, LoC पर तनाव होगा दूर     ||   कसौली में धारा 144 लागू, आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर     ||   स्कूली बच्चों पर पत्थरबाजी से भड़के उमर अब्दुल्ला, कहा- ये गुंडों जैसी हरकत     ||   थर्ड फ्रंट: ममता, कनिमोझी....और अब केसीआर की एसपी चीफ अखिलेश यादव के साथ बैठक     ||

राजाजी पार्क में वनरक्षकों की भर्ती में हुआ फर्जीवाड़ा, तीन बर्खास्त गार्ड के खिलाफ मुकदमा दर्ज 

अंग्वाल न्यूज डेस्क
राजाजी पार्क में वनरक्षकों की भर्ती में हुआ फर्जीवाड़ा, तीन बर्खास्त गार्ड के खिलाफ मुकदमा दर्ज 

देहरादून। राजाजी पार्क में साल 2013 में हुई वनरक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें पहली बार वन्यजीव प्रतिपालक प्रदीप कुमार ने तीन बर्खास्त वनरक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। इसके बाद अब इन पर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। शहर कोतवाली में जाकिर हुसैन निवासी गुमखाल पौड़ी, सूर्यप्रकाश निवासी उत्तरकाशी और कुलदीप सिंह नेगी निवासी पल्ली पौड़ी के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर नौकरी पाने का केस दर्ज किया गया। 

नियमों की अनदेखी

गौरतलब है कि साल 2013 में पार्क के उपनिदेशक की 4 सदस्यीय कमेटी ने वनरक्षकों की भर्ती फर्जी दस्तावेजों के आधार पर की थी। इनकी नियुक्ति में हुए फर्जीवाड़े को लेकर ऋषिकेश के आरटीआई कार्यकर्ता के द्वारा दस्तावेज दिखाकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की। जिस पर दिसंबर 2013 में जांच एपीसीसीएफ डॉ. धनंजय मोहन को दी गई। जांच में चार फाॅरेस्ट गार्ड के दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर उन्हें 2016 में बर्खास्त कर दिया गया। 

ये भी पढ़ें - उत्तराखंड में भारी बारिश का सिलसिला जारी, चंपावत में एनएच 9 भूस्खलन के बाद आवाजाही के लिए बंद 

विभागीय जांच की सिफारिश


इसके बाद तत्कालीन उपनिदेशक एच के सिंह और दूसरे अधिकारियों से इसका जवाब मांगा गया लेकिन संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। हरिद्वार के डीएफओ ने कहा कि समय कम होने के कारण वे ठीक ढंग से प्रमाणपत्रों की जांच नहीं कर पाए। उनकी इस दलील को शासन ने नहीं माना। एचके सिंह व तीन सदस्यों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और भर्तियों की विजिलेंस जांच की सिफारिश की गई है जिस पर सरकार को निर्णय लेना है।

 

 

Todays Beets: