Sunday, September 23, 2018

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कैलास मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालु पहली बार कर सकेंगे हेली सर्विस का इस्तेमाल, खर्चे पर असमंजस की स्थिति

अंग्वाल न्यूज डेस्क
कैलास मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालु पहली बार कर सकेंगे हेली सर्विस का इस्तेमाल, खर्चे पर असमंजस की स्थिति

देहरादून। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में लिपुलेख दर्रे से होकर जून में शुरू होने वाले कैलास मानसरोवर यात्रा में श्रद्धालु पहली बार हेलीकाॅटर के जरिए पहुंच सकेंगे। बता दें कि करीब 17 हजार फुट पर स्थित कैलास मानसरोवर की यात्रा के लिए विदेश मंत्रालय ने पिथौरागढ़ प्रशासन और भारतीय क्षेत्र में यात्रा की नोडल एजेंसी कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) की इसकी सूचना दे दी है। विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि यात्रा मार्ग के कुछ हिस्से में सडक निर्माण का कार्य अभी तक तक पूरा नहीं हो पाया है ऐसे में जरूरत पडने पर श्रद्धालुओं को हेलीकाॅप्टर से वह दूरी तय कराई जाए। हालांकि खर्चे को लेकर अभी असमंजस बनी हुई है।

गौरतलब है कि पिथौरागढ के जिलाधिकारी सी रविशंकर ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि उनके पास विदेश मंत्रालय से इस संबंध में निर्देश आया है कि धारचूला से गुंजी तक सड़क निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो पाने की स्थिति में हेलीकाॅप्टर का प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हो पाया है कि हैली सेवा का प्रयोग करने में आने वाला खर्च कौन वहन करेगा।

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यहां बता दें कि मानसरोवर यात्रा के लिए अभी तक हेली सर्विस का प्रयोग नहीं हुआ है। इस साल धारचूला से गुंजी तक 42 किलोमीटर लंबी सडक के निर्माण का कार्य शुरू हुआ था जिसमें लखनपुर-नजम के हिस्से का निर्माण अभी पूरा नहीं हो पाया है।  बता दें कि सड़क निर्माण का काम ग्रेफ के जरिए किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने बताया कि ग्रेफ ने अगले महीने तक सड़क निर्माण का काम पूरा किए जाने का भरोसा दिलाया है लेकिन मानसून की वजह से इसमें देरी हो सकती है। 


 

यात्रा कराने वाली नोडल एजेंसी कुमाऊं मंडल विकास निगम भी यात्रा शुरू होने से पहले सड़क निर्माण का काम पूरा हो जाने की बात को लेकर आश्वस्त नहीं दिख रहा है। निगम के महाप्रबंधक त्रिलोक सिंह मर्तोलिया ने बताया कि यात्रा को लेकर केएमवीएन की तैयारियां पूरी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मानसरोवर यात्रा के लिए हमारी तैयारियां पूरी हैं।’’ उन्होंने बताया कि यात्रा शुरू होने की संभावित तारीख 12 जून है पर अभी तक उनके पास विदेश मंत्रालय से इस संबंध में कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं प्राप्त हुआ है।

 

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