Tuesday, August 14, 2018

Breaking News

   मंगल ग्रह पर आशियाना बनाएगा इंसान, वैज्ञानिकों को मिली पानी की सबसे बड़ी झील     ||   भाजपा नेता का अटपटा ज्ञान, 'मृत्युशैया पर हुमायूं ने बाबर से कहा था, गायों का सम्मान करो'     ||   आज से एक हुए IDEA-वोडाफोन! अब बनेगी देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी     ||   गोवा में बड़ी संख्‍या में लोग बीफ खाते हैं, आप उन्‍हें नहीं रोक सकते: बीजेपी विधायक     ||   चीन फिर चल रहा 'चाल', डोकलाम में चुपचाप फिर शुरू कीं गतिविधियां : अमेरिकी अधिकारी     ||   नीरव मोदी, चोकसी के खिलाफ बड़ा एक्शन, 25-26 सितंबर को कोर्ट में पेश होने के आदेश     ||   जापान में फ़्लैश फ्लड से 200 लोगों की मौत     ||   देहरादून में जलभराव पर सरकार ने लिया संज्ञान अधिकारियों को दिए निर्देश     ||   भारत ने टॉस जीता फील्डिंग करने का फैसला     ||   उपेन्द्र राय मनी लाउंड्रिंग मामले में सीबीआई ने 2 अधिकारियों को गिरफ्तार किया     ||

पलायन से प्रभावित हुए अल्मोड़ा और पौड़ी के गांव फिर से होंगे आबाद, सरकार तैयार कर रही कार्ययोजना

अंग्वाल न्यूज डेस्क
पलायन से प्रभावित हुए अल्मोड़ा और पौड़ी के गांव फिर से होंगे आबाद, सरकार तैयार कर रही कार्ययोजना

देहरादून। उत्तराखंड में पलायन से सबसे ज्यादा प्रभावित गांव जल्द ही एक बार फिर से आबाद होंगे। प्रदेश सरकार इसके लिए कदम उठाना शुरू कर दिया है। राज्य के ग्राम्य विकास विभाग और पलायन आयोग मिलकर कार्ययोजना तैयार कर रहा है। बता दें कि प्रदेश में पलायन की मार से सबसे अधिक प्रभावित अल्मोड़ा और पौड़ी जिले के 60 गांव प्रभावित हुए हैं। इन गांवों की जनसंख्या महज 2 से लेकर 10 के बीच रह गई है। अब सरकार की ओर से इसे एक बार फिर से बसाने की तैयारी की जा रही है।

गौरतलब है कि राज्य का अल्मोड़ा और पौड़ी जिले पर पलायन की सबसे ज्यादा मार पड़ी है। गांव में रोजगार की कमी और शिक्षा की कोई सुविधा नहीं होने की वजह से इन जिलों के ज्यादातर गांवों से लोग पलायन कर गए हैं। गांवों से लगातार हो रहे पलायन को रोकने के लिए ग्राम्य विकास और पलायन आयोग ने मिलकर कार्ययोजना तैयार कर रहा है जिसके तहत इन गांवों को फिर से बसाया जाएगा। 

ये भी पढ़ें - भाजपा विधायक ने हरिद्वार में रोहिंग्या की घुसपैठ का किया खुलासा, गृह विभाग से जांच की मांग 

यहां बता दें कि पहले चरण में अल्मोड़ा और पौड़ी के 30-30 गांवों को लिया गया है। आयोग के उपाध्यक्ष डॉ.एसएस नेगी बताते हैं कि महज 2 से 10 के बीच जनसंख्या वाले इन गांवों का सर्वे कर वहा रह रहे लोगों की राय के आधार पर  कृषि समेत आर्थिक गतिविधियों के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।


इन गांवों को बसाने से पहले इनका सर्वे कराया जाएगा। इन गांवों में खाली पड़ी जमीन, घरों और वहां की आर्थिक और कृषि जैसी सुविधाओं के विकास का भी सर्वे किया जाएगा। इसके बाद ही रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी।

 

Todays Beets: