Thursday, November 26, 2020

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 सरकार ने यूजीसी एक्ट में बदलाव कर छात्रों को दी राहत, अब शिक्षण संस्थान नहीं रख सकेंगे मूल प्रमाण पत्र

अंग्वाल न्यूज डेस्क
 सरकार ने यूजीसी एक्ट में बदलाव कर छात्रों को दी राहत, अब शिक्षण संस्थान नहीं रख सकेंगे मूल प्रमाण पत्र

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने छात्रों को एक बड़ी राहत दी है। सरकार ने छात्रों की दिक्कतों को देखते हुए सर्टिफिकेट और फीस वापसी पर यूजीसी एक्ट में बदलाव किया है। अब सेंट्रल, स्टेट, डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी, प्राईवेट यूनिवर्सिटी समेत उच्च शिक्षण संस्थान अब दाखिले के दौरान छात्रों के मूल प्रमाण पत्र (ओरिजनल सर्टिफिकेट) नहीं रख सकेंगे। दाखिला विंडो बंद होने से 16 दिन या पहले सीट छोड़ने पर 100 फीसदी, दाखिला विंडो बंद होने के एक महीने बाद तक सीट छोड़ने पर 50 फीसदी फीस लौटानी पड़ेगी। अगर कोई संस्थान नियमों का पालन नहीं करता तो जुर्माना लगाया जाएगा और मान्यता रद्द कर दी जाएगी। 

गौरतलब है कि मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि यूजीसी एक्ट के नए नियम अंडरग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, एमफिल व पीएचडी प्रोग्राम में लागू होंगे। नए नियमों के अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थान छात्रों से एक साथ फीस नहीं ले पाएंगे, उन्हें सिर्फ सेमेस्टर और वार्षिक फीस ही लेना होगा। यूजीसी की ओर से जल्द ही विश्वविद्यालयों के लिए नोटिफिकेशन जारी करेगा। 

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यहां बता दें कि अब दाखिले के दौरान कॉलेज या उच्च शिक्षण संस्थान छात्रों के ओरिजनल सर्टिफिकेट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट, मार्क्स शीट या डिग्री सर्टिफिकेट नहीं रख सकेंगे। कॉलेजों को दाखिला आवेदन पत्र के साथ स्वयं सत्यापित आवेदन पत्र भी देना होगा। कॉलेज प्रबंधन को दाखिले के दौरान ओरिजनल सर्टिफिकेट एवं मार्क्स शीट जांचने के बाद उसी समय वापस करनी होगी। कॉलेज प्रबंधन सर्टिफिकेट की स्वयं सत्यापित कॉपी रख सकेंगे। मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि अगर कोई शिक्षण संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो सख्त कार्रवाई होगी। केंद्र सरकार से फंड लेने वाले संस्थानों पर यूजीसी सीधे जुर्माना लगाने के अलावा उनकी मान्यता तक रद्द कर सकती है।

जावडे़कर के मुताबिक, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और मेडिकल कॉलेज छात्रों से प्रोसेसिंग फीस के नाम पर सबसे अधिक लूट करते हैं। नए नियम के तहत उच्च शिक्षण संस्थान कुल दाखिला फीस का 5 फीसदी या फिर अधिकतम 5 हजार रुपये तक ही प्रोसेसिंग फीस काट सकते हैं।


यह होंगे फीस वापसी के नियम

- नए नियम के तहत दाखिला आवेदन विंडो बंद होने से 16 दिन या उससे पहले कोई छात्र सीट छोड़ता है तो उसकी सौ फीसदी फीस वापस करनी होगी। 

- दाखिला आवेदन विंडो बंद होने से पंद्रह दिन या उससे पहले सीट छोड़ने पर 90 फीसदी फीस वापस की जाएगी।

- सरकार ने दाखिला विंडो बंद होने के बाद भी छात्रों को राहत दी है। कोई छात्र दाखिला बंद होने के पंद्रह दिन के भीतर सीट छोड़ता है तो उसे 80 फीसदी फीस वापस होगी। 16 से 30 दिन में सीट छोड़ने पर 50 फीसदी फीसदी लौटानी पड़ेगी।

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