Tuesday, August 22, 2017

मां स्कंदमाता की अराधना में लीन श्रद्धालु, जानिए क्यों कहा गया इन्हें मां पार्वती

पंडित विवेक खंकरियाल
मां स्कंदमाता की अराधना में लीन श्रद्धालु, जानिए क्यों कहा गया इन्हें मां पार्वती

सर्व मंगल मांगल्ये सिवे सर्वाथ साधिके ।शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणी नम्स्तुते । ।

नवरात्रों के पांचवे दिन मां स्कंदमाता के स्वरूप का पूजन किया जाता है। स्कंदमाता संतों की रक्षा के लिए सिंह पर सवार होकर दुष्टों का संहार करती हैं। मां की चार भुजाएं हैं। इनमें से दो हाथ में कमल का फूल, एक भुजा से भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को सहारा देकर अपनी गोद में बैठाए हुए हैं, जबकि मां की चौथी भुजा आशिर्वाद देने की मुद्रा में होती है। मां हिमालय की पुत्री पार्वती हैं, जिन्हें माहेश्वरी और गौरी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्वत राज की पुत्री होने के नाते पार्वती कहलाती हैं। महादेव की वामनी यानि पत्नी होने से इन्हें माहेश्वरी भी कहा गया है। अपने गौर वरण के कारण इन्हें देवी गौरी भी कहा गया है।

---पूजन का विधान--

1- मां का पूजन करने से पहले अपने देवस्थान को साफ कर लें। इसके बाद गंगाजल का छिड़काव कर स्थान को पवित्र करें और अपने हिसाब से सजा लें।


2- सर्वप्रथम गणेश पंचांग चौकी तैयार करें, जिसमें गौरी-गणेश, ओमकार (ब्रहमा-विष्णु-महेश) स्वास्तिक, सप्त घृतमात्रिका, योगनी, षोडस मात्रिका, वास्तु पुरुष, नवग्रह देवताओं समेत वरुण देवता को तैयार करें। 

2-तदोपरांत सर्वतो भद्र मंडल (चावल से बनाया गया आसन, जिसपर आह्वान करके हमारे सभी देवी-देवताओं को विराजमान किया जाता है। ) को तैयार करें। 

3-इसके बाद एक सकोरे में मिट्टी भरकर उसमें जौ को बोएं और देव स्थान पर रख दें। 

4-इसके बाद माता के मंदिर को चुनरी और फूल मालाओं से सजाएं। माता पर रोली का टिका लगाएं। चावल लगाएं। साथ ही देवस्थान पर अपनी श्रद्धानुसार फल-फूल-मिष्ठान तांबुल दक्षिणा इत्यादि समर्पित करें।

5-इसके बाद अपने अनुसार या ब्राह्मणों के द्वारा पाठ करें/कराएं।  

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